फेसबुक और ट्विटर बढ़ा रहे हैं नस्‍लवाद विरोध

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विश्व की शीर्ष सोशल नेटवर्किंग साइट फेसबुक और ट्विटर ने नस्लवाद विरोधी समूहों द्वारा बार-बार एलर्ट करने के बावजूद इस्लाम से जुड़े पूर्वग्रहों को बढ़ावा देने वाले सैकड़ों पोस्ट अब तक नहीं हटाए हैं। समाचार पत्र 'द इंडीपेंडेंट' में शनिवार को प्रकाशित रपट से यह जानकारी मिली।

रिपोर्ट के अनुसार, रॉदरहम यौन प्रताड़ना और तेजी से विश्व पटल पर उभरे दुर्दात आतंकवादी संगठन इस्लामिक स्टेट द्वारा ब्रिटिश बंधकों की हत्या की घटनाओं के बाद इन सोशल साइटों पर मुस्लिमों के खिलाफ घृणा फैलाने वाले संदेशों की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ है।

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पिछले चार महीनों में नस्लवाद विरोधी समूह इस तरह के दर्जनों अकाउंट और सैकड़ों पोस्ट के प्रति सोशल साइट कंपनियों को आगाह कर चुके हैं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है, "रिपोर्ट करने के बावजूद इनमें से अधिकांश अकाउंट अभी भी सक्रिय हैं।

फेसबुक और ट्विटर बढ़ा रहे हैं नस्‍लवाद विरोध

विभिन्न धर्म समूहों के बीच भाइचारे के लिए काम करने वाली संस्था 'फेथ मैटर्स' के निदेशक फैयाज मुगल ने कहा, फेसबुक और ट्विटर जैसे सोशल मीडिया मंचों द्वारा नफरत फैलाने वाले, समाज को तोड़ने वाले और प्रत्यक्ष तौर पर कट्टरता फैलाने वाले संदेशों को न हटाना नैतिक रूप से अस्वीकार्य है।

फेसबुक ने प्रत्युत्तर में कहा है, "उसका लक्ष्य विचार की स्वतंत्रता में संतुलन बनाए रखना और सुरक्षित और विश्वासपूर्ण माहौल बनाए रखना है।" फेसबुक की प्रवक्ता ने कहा, "नस्ल, जाति, राष्ट्रीयता, धर्म, लिंग, सेक्स, सेक्स के प्रति अभिरूचि, अपंगता या चिकित्सकीय परिस्थिति के आधार पर सीधे तौर पर किए गए पोस्ट के खिलाफ रिपोर्ट मिलने पर कंपनी उन्हें तुरंत हटा देती है।

दूसरी ओर ट्विटर ने भी सफाई देते हुए कहा कि उन्होंने हिंसा की धमकी देने वाले संदेशों को पूरी तरह प्रतिबंधित कर रखा है और कंपनी का नियम तोड़ने वाले सभी संदेशों पर निगरानी रखती है।

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