नेट न्यूट्रैलिटी क्‍या है, इससे हमें क्‍या फायदा होगा ?

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नेट न्‍यूट्रैलिटी को लेकर सरकार के ऊपर दवाब बढ़ता जा रहा है, भारत में ऑनलाइन इसे लेकर काफी चर्चा छिड़ी हुई है। एआईबी ने इसके प्रति लोगों में जागरुक्‍ता फैलाने के लिए एक वीडियो भी बनाया है जो काफी वॉयरल हो रहा है। इस वीडियों को शाहरुख खान से लेकर कई राजनेताओं ने सोशल मीडिया पर शेयर भी किया है।

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क्या है नेट न्यूट्रैलिटी
नेट न्‍यूट्रैलिटी एक तरह से समानता का अधिकार है जो ऑनलाइन सभी के लिए एक जैसा होना चाहिए यानी इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर की ओंर से दी जाने वाले सर्विस सभी के लिए समान रूप से हो।

नेट न्यूट्रैलिटी क्‍या है, इससे हमें क्‍या फायदा होगा ?

अगर आप इंटरनेट रिचार्ज करावाते हैं तो इंटरनेट से जुड़ी सभी सर्विसेज समान रूप से मिलें न कि फेसबुक के लिए अलग रिचार्ज, वाट्सएप के लिए अलग रिचार्ज। टेलिकॉम कंपनिया इसके सख्‍त खिलाफ हैं क्‍योंकि इससे वे हर सर्विस के लिए अलग से पैसे नहीं ले सकेंगी। 

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टेलिकॉम कंपनियां क्‍यों नहीं चाहतीं नेट न्यूट्रैलिटी
कुछ साल पहले टेलिकॉम कंपनियों की कमाई के कई जरिए थे जैसे मैसेजिंग, कॉलिंग, ढेरों टैरिफ पैक मगर अब वाट्सएप, वाइबर के अलावा कई इंटरनेट सर्विस की वजह से कंपनियों को काफी मुश्‍किलें आ रही हैं जिसकी वजह से उन्‍हें कमाई करने के लिए नाकों चने चबाने पड़ रहे हैं।

वाट्सएप की वजह से टेलिकॉम कंपनियों की मैसजिंग से होने वाली कमाई काफी कम हो गई है जबकि वे इसमें अपना हिस्‍सा चाहती हैं। ये बिल्‍कुल ऐसा ही है जैसे एक ही ट्रेन आमने सामने की सीट के अलग दाम रेलवे मांगे।

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सरकार भी चाहती है नेट न्यूट्रैलिटी
दरअसल सरकारी विभागों में वाट्सएप से लेकर सोशल मीडिया काफी प्रयोग होता है खासकर नई सरकार इंटरनेट, सोशल मीडिया को लेकर काफी एक्‍टिव है ऐसे में वो नहीं चाहती की कंपनियां ऐसे सर्विसेज़ पर अपना कब्‍जा करें। इससे कंपनियां मनमाने ढ़ंग से पैसा चार्ज कर सकती हैं।

क्‍या-क्‍या नुकसान होंगे इससे
1- आपको ज्‍यादा चैट करने के लिए एक्‍ट्रा पैसे देने पड़ेंगे।
2- हर सर्विस लिए अलग पैक डलवाना पड़ सकता है।
3- इंटनेट पैक के साथ कई दूसरे पैक डलवाने पड़ सकते हैं जैसे वाट्स एप के लिए अलग पैक, फेसबुक के लिए अलग।

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