भारत में 5% से भी कम इलेक्ट्रानिक कचरा रिसाइकिल होता है

देश में पांच फीसद से भी कम इलेक्ट्रानिक कचरा रिसाइकिल के जरिये पुन: इस्तेमाल हो पाता है। उद्योग मंडल एसोचैम ने कहा है कि उचित ढांचे, कानून तथा रूपरेखा के अभाव में ई-वेस्ट को रिसाइकिल नहीं किया जाता।
विश्व पर्यावरण दिवस पर अपने विश्लेषण में एसोचैम ने कहा है कि देश में सालाना 4.4 लाख टन इलेक्ट्रानिक वेस्ट उत्पन्न होता है। आधे से ज्यादा बेकार हो चुके इलेक्ट्रानिक उत्पाद या तो लैंडफिल या भंडार गृहों में पड़ा रहता है।
उद्योग मंडल ने कहा है कि कुल इलेक्ट्रानिक कूड़े में कंप्यूटर उपकरणों की हिस्सेदारी 68 प्रतिशत है। वहीं दूरसंचार उपकरणों का हिस्सा 12 प्रतिशत, इलेक्टि्रकल उपकरणों का 8 प्रतिशत, चिकित्सा उपकरणों का 7 प्रतिशत होता है।
इसके अलावा अन्य इलेक्ट्रॉनिक कचरे की हिस्सेदारी शेष 5 फीसद होती है। एसोचैम के महासचिव डी एस रावत ने चैंबर के विश्लेषण को जारी करते हुए कहा, देश में उत्पन्न 90 फीसद इलेक्ट्रानिक कूड़े का प्रबंधन असंगठित क्षेत्र द्वारा किया जाता है। स्क्रैप डीलर इन उपकरणों को खोलकर रिसाइकिल करने के बजाय फेंक देते हैं। रावत ने कहा कि इनमें से ज्यादातर उपकरणों को रिसाइकिल कर पुन: इस्तेमाल किया जा सकता है।
-
54,999
-
36,599
-
39,999
-
38,990
-
1,29,900
-
79,990
-
38,900
-
18,999
-
19,300
-
69,999
-
79,900
-
1,09,999
-
1,19,900
-
21,999
-
1,29,900
-
12,999
-
44,999
-
15,999
-
7,332
-
17,091
-
29,999
-
7,999
-
8,999
-
45,835
-
77,935
-
48,030
-
29,616
-
57,999
-
12,670
-
79,470


Click it and Unblock the Notifications