वैज्ञानिकों ने खोजा दर्दनाक मौत के ठीक पहले क्या सोचता है दिमाग
कहा जाता है कि मनुष्य का मस्तिष्क सदैव सक्रिय रहता है। यहां तक कि जब हम सोते भी हैं तो भी हमारा दिमाग जगता रहता है और कुछ न कुछ सोचता रहता है। हमारे मस्तिष्क में लगातार नए-नए विचार जन्म लेते रहते हैं।
यहां तक हमारा दिमाग प्रतिदिन साठ हजार विचारों को जन्म देता है। अब वैज्ञानिकों द्वारा अनेक शोध व प्रयोग किए जा रहे हैं ताकि जाना जा सके कि मरने वाले व्यक्ति के मस्तिष्क में क्या चल रहा होता है, वह कैसा अनुभव करता है, विभिन्न प्रकार के हमलों से शरीर में क्या बदलाव आता हैं, चीख सुनकर शरीर सतर्क क्यों हो जाता हैं, भयभीत रहने वाले की चिंता कम करने का क्या उपाय है?
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अमेरिकी केमिकल सोसाइटी द्वारा इस विषय पर एक वीडियो जारी किया गया है जिसमें किसी हमले से शरीर विशेषकर मस्तिष्क पर होने वाले रासायनिक परिवर्तनों की जानकारी देने का प्रयास किया गया है। जानलेवा हमले से दिमाग सजग हो जाता व बचने का प्रयास करता है। इससे शारीरिक व मनोवैज्ञानिक बदलाव को समझा जा सकता है पर कुल्हाड़ी जैसे तेज हथियारों से हमलावर द्वारा हाथ पकड़ने पर क्या होता है? उस समय दो चीजें होती हैं। पहली, दिमाग सुन्न हो जाना।
चूंकि मस्तिष्क के विभिन्न भाग एक साथ सतर्क हो जाते हैं। हमलावर के पकड़ने पर गहरा दर्द महसूस होता है, दिल की धड़कनें बढ़ जाती हैं, दिमाग तुरंत सक्रिय होकर हमें अलर्ट भेजता है और बचाव हेतु प्रत्येक शारीरिक ऊर्जा एकजुट होकर प्रयास करती है। मौत के बाद के हालात को जानना बहुत कठिन था।
चूंकि आज तक वहां से लौटकर कोई भी नहीं आया है। पर नियर डैथ एक्सपीरियंस वाले कुछ लोगों की माने तो वहां पर प्रकाश की एक लंबी-चैड़ी दीवार थी जिसका न तो कोई आरंभ था और न ही अंत। इसके बाद उनकी आंख बंद होने लगी और खुली तो वह अस्पताल के बिस्तर पर थे।


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