God as a Service: सुविधा या आस्था का व्यापार? डिजिटल भक्ति से हो रही करोड़ों की कमाई
God as a Service: बीते कुछ साल में हर सेक्टर डिजिटलाइज हो गया है, चाहे एजुकेशन हो या जॉब; हर जगह टेक्नोलॉजी ने बड़े पैमाने पर अपनी जगह बना ली है। इतना ही नहीं, मंदिरों में दर्शन भी अब डिजिटलाइज हो चुके हैं। जहां पहले आप ब्रॉडकास्ट के जरिए किसी भी बड़े मंदिर के दर्शन कर सकते थे, वहीं अब VR के जरिए आप स्पर्श दर्शन का एक्सपीरियंस ले सकते हैं।
VR के 360° इमर्सिव आरती देखने से लेकर QR स्कैन के जरिए दिया जलाने तक भगवान को भी डिजिटल कर दिया गया है। सबसे खास बात ये है कि जहां ये टेक्नोलॉजी लोगों के लिए दुर्लभ और जटिल दर्शन को आसान बना रही है, वहीं दूसरी तरफ ये बिजनेस 5000 करोड़ का बनकर फिनटेक कैटेगरी में शामिल हो गया है। आइए जानते हैं 'भगवान को डिजिटल बनाना' कहां तक सही और कारगर है।

कैसे बना 5000 करोड़ का बिजनेस?
अगर आपसे 5-6 साल पहले हम इसकी बात करते, तो शायद हमें विश्वास नहीं होता कि भगवान को डिजिटल बनाया जा सकता है। साथ ही आज के समय में यह लगभग 5000 करोड़ की फिनटेक कैटेगरी में शामिल हो गया है। अब सवाल उठता है कि भारतीय की आस्था पर इसका क्या असर पड़ रहा है और क्यों केवल कुछ ही सालों में यह करोड़ों का बिजनेस बन गया है।
भारत में लाखों छोटे-बड़े मंदिर हैं, जहां कुछ का खास महत्व है तो कुछ अपनी अनोखी कहानियों के लिए प्रचलित हैं। 12 ज्योतिर्लिंग, 4 धाम, 4 शक्तिपीठ, सबकी अपनी मान्यता है। हिंदू धर्म में हर मंदिर के दर्शन का अपना महत्व है। मगर हर किसी के लिए इन तीर्थस्थलों के दर्शन करना आसान काम नहीं है। ऐसे में डिजिटलाइजेशन ने काफी मदद की है।
डिजिटलाइजेशन का फायदा
मंदिरों में दर्शन-पूजन को डिजिटलाइज करने का सबसे बड़ा फायदा ये है कि लोगों को लंबी लाइनों में लगने की जरूरत नहीं है। वे एक आराम चेयर पर बैठकर बिना किसी धक्का-मुक्की के आराम से दिव्य दर्शन कर सकते हैं।
इतना ही नहीं, ऑनलाइन आप प्रसाद चढ़ा सकते हैं, दिए जलवा सकते हैं, आपको बस एक QR स्कैन करना होगा। यानी प्रसाद की लाइनों से भी छुटकारा मिल जाता है।
डिजिटलाइजेशन का सबसे ज्यादा फायदा घर के बुजुर्गों के साथ होता है, जब उन्हें तीर्थ स्थलों या चारधाम की यात्रा करने के लिए कई किलोमीटर पैदल चलने की जरूरत नहीं होती है।
डिजिटल प्लेटफॉर्म किसी भी समय, कहीं से भी अनुष्ठानों और कार्यक्रमों में भाग लेने की सुविधा देते हैं, जिससे आपको लंबी यात्रा करने की जरूरत नहीं होती है।
जो लोग उम्र, स्वास्थ्य या किसी दूसरे कारण से मंदिर तक नहीं जा पाते, वे लाइव-स्ट्रीम के जरिए रियल टाइम में आरती और अन्य कार्यक्रम में शामिल हो सकते हैं।
मंदिरों का डिजिटलाइजेशन रिकॉर्ड को डिजिटल करके और वर्चुअल टूर के जरिए मंदिर की परंपराओं और इतिहास को संरक्षित करने में मदद करता है।
किसको हो रहा ज्यादा फायदा?
जहां एक तरफ हम इन सुविधाओं से फायदा हो रहा है, वहीं दूसरी तरफ इस तरह की सुविधाएं देने वाली कंपनियां या ऐप अपनी जेबें भर रहे हैं।
भारत के प्रमुख तीर्थस्थलों में अब तकनीक ने दस्तक दे दी है। काशी विश्वनाथ मंदिर में तो भक्त अब VR चश्मा लगाकर गर्भगृह का 3D "दुर्लभ दर्शन" कर सकते हैं।
वहीं तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (TTD) ने मंदिर परिसर में कैशलेस डोनेशन कियोस्क लगाए हैं। यानी आप QR स्कैन कर 1 से 1 लाख रुपये तक UPI के जरिए दान कर सकते हैं।
जम्मू के वैष्णो देवी आश्रम बोर्ड ने भी मोबाइल ऐप लाया है, जिसमें भक्त लाइव दर्शन के साथ ऑनलाइन 'हवन' जैसी सुविधाएं पा सकते हैं।
यहां तक कि दक्षिण भारत में तो तमिलनाडु सरकार ने 2022 में 536 मंदिरों में QR कोड के जरिए दिए जलाने की सुविधा भी पेश की है।
आसान भाषा में कहें तो अब भक्त पूजन-पाठ के लिए अभिषेक, वस्त्र, प्रसाद आदि चुनकर QR को स्कैन कर भुगतान करते हैं।
भले इससे लोगों को आराम मिला है और लंबी लाइनें कम हुई हैं, लेकिन क्या इसकी गारंटी है कि ये सभी चीजें भगवान को चढ़ाई जा रही हैं। ऐसे में क्या ये कहना गलत होगा कि भक्तों से ज्यादा इसका फायदा मंदिरों के ट्रस्ट और सरकार को हो रहा है।
करोड़ों कमा रही कंपनियां
धर्म और टेक्नोलॉजी को मिलाकर कई स्टार्टअप सामने आए हैं। इसमें AppForBharat, AstroTalk और VAMA जैसे ऐप्स शामिल हैं। इन ऐप्स ने आस्था और विश्वास के नाम पर करोड़ों रुपये का मुनाफा कमाया है।
AppsForBharat (Sri Mandir) भक्तों को ऑनलाइन पूजा, पाठ और धार्मिक सामग्री उपलब्ध कराने में मदद करता है। बता दें कि नवम्बर 2023 में इस कंपनी ने 3.5 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया, जो कि बीते साल की तुलना में 92 गुना अधिक है। वहीं FY24 में इसकी रेवेन्यू ₹18.59 करोड़ तक बढ़ गई।
AstroTalk की बात करें तो ऑनलाइन ज्योतिष सेवा देने वाले इस प्लेटफॉर्म का FY24 में ऑपरेटिंग रेवेन्यू 651 करोड़ रुपये पहुंच गया, जो एक साल में दोगुना था। इसी वर्ष नेट प्रॉफिट 94 करोड़ रुपये रहा। यानी विदेशों समेत 10,000+ ज्योतिषियों को जोड़कर AstroTalk ने ज्योतिष को भी डिजिटल डेस्क पर बिठा दिया।
VAMA App की बात करें तो ई-पूजा और वर्चुअल दर्शन की सुविधा देने वाले इस ऐप ने नवम्बर 2023 में Wavemaker Partners की लीड फंडिंग राउंड में 1.5 मिलियन जुटाए हैं। जानकारी के लिए बता दें कि लॉन्च के बाद VAMA पर 150,000 से ज्यादा वर्चुअल पूजा/ज्योतिष सेशंस हो चुके हैं।
इन कंपनियों ने धर्म के टच और टेक्नोलॉजी के ट्रेंड को मिलाकर एक बड़ा मार्केट तैयार कर लिया है।
सरकार भी नहीं पीछे
सरकार भी इसमें पीछे नहीं है। संस्कृति मंत्रालय ने अप्रैल 2022 में Temple360 पोर्टल लॉन्च किया, जिसके जरिए देश के 12 ज्योतिर्लिंग और चार धाम का कहीं से भी वर्चुअल दर्शन संभव हुआ।
इस वेबसाइट पर भक्त ई-दर्शन, ई-प्रसाद और ई-आरती जैसी सुविधाएं पा सकते हैं। यानी अगर आप घर बैठे काशी, बद्रीनाथ या रामेश्वरम दर्शन करना चाहें तो Temple360 की मदद से मिनटों में मंदिर के गर्भगृह तक पहुंच सकते हैं।
क्या ये सही है?
हम टेक्नोलॉजी के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन ये सोचने वाली बात है कि जहां एक तरफ लोग सैकड़ों किलोमीटर की दूरी तय करते हैं, पहाड़ों पर नंगे पैर चढ़ते हैं, बिना कुछ खाए लंबी लाइनों में घंटों तक अपनी बारी का इंतजार करते हैं। फिर कहीं जाकर भगवान की एक झलक पाते हैं। वहीं दूसरी तरफ बस एक ऐप में दो बार टैप करके आप दिव्य दर्शन की उम्मीद कैसे कर सकते हैं?
तकनीकी दुनिया में कुछ लोग इसे 'God-as-a-Service' कहते हैं। यानी ऐसा प्लेटफॉर्म जो भक्त की मनोकामनाओं के हिसाब से कस्टम पूजा-अर्चना तैयार करे। हालांकि इस नई टेक्नोलॉजी से लोगों को घर बैठे ही चारधाम और 12 ज्योतिर्लिंग के दर्शन जैसी सुविधा मिल जाएगी ,लेकिन क्या इससे उन धार्मिक स्थलों की मान्यता प्रभावित नहीं होंगी।
जहां एक तरफ लोग कड़ी मेहनत और कई किलोमीटर चलने के बाद भगवान के दिव्य दर्शन पा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ लोग बस कुछ क्लिक के जरिए दर्शन कर ले रहे हैं। ऐसे में सिर्फ अपनी सुविधा के लिए कहीं भगवान को अपने करीब लाने की कोशिश में हम उनसे दूर तो नहीं होते जा रहे हैं?


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