Meta Verified यूजर्स का क्यों बढ़ा गुस्सा? बिना वार्निंग अकाउंट लॉक, सपोर्ट भी नदारद
Facebook और Instagram की पेरेंट कंपनी Meta एक बार फिर विवादों में घिर गई है। इस बार मामला उन यूजर्स से जुड़ा है जो Facebook और Instagram पर Meta Verified सब्सक्रिप्शन लेकर कंपनी की एक्स्ट्रा फीचर्स का लाभ उठा रहे थे। अब यही यूजर्स नाराज हैं क्योंकि बिना किसी चेतावनी के उनके अकाउंट लॉक कर दिए गए हैं और सबसे बड़ी बात उन्हें इस समस्या का कोई हल भी नहीं मिल रहा।
इतनी ही नहीं इनका सपोर्ट सिस्टम भी काम नहीं कर रहा है। आइए जानते हैं कि ये परेशानी क्यों हो रही है। आइए जानते हैं कि ये कैसे काम करता है।

अचानक लॉक हुए अकाउंट्स
TechCrunch की एक रिपोर्ट में पता चला है कि बहुत से Meta Verified सब्सक्राइबर्स ने शिकायत की है कि उनके Facebook और Instagram अकाउंट्स अचानक सस्पेंड कर दिए गए हैं। इनमें आम यूजर्स से लेकर बिजनेस पेज, ग्रुप एडमिन्स और कंटेंट क्रिएटर्स तक शामिल हैं। कई लोगों को कोई कारण नहीं बताया गया और न ही कोई नोटिस मिला।
बेअसर हो रहा है Paid सब्सक्रिप्शन
Meta Verified सब्सक्रिप्शन लेने वालों को कुछ खास फायदे मिलते है जैसे- प्राइमरी कस्टमर सपोर्ट, अकाउंट सिक्योरिटी और पहचान की पुष्टि (ब्लू टिक)। लेकिन जब यूज़र्स को समस्या आई तो उन्हें न कोई इंसानी सहायता मिली और न ही किसी पेज पर सही जवाब। कई लोगों ने कहा कि उन्हें लगातार खराब या नॉन-फंक्शनल पेजों की ओर रीडायरेक्ट किया जा रहा है।
यूज़र्स का कहना है कि उन्होंने पैसे देकर सब्सक्रिप्शन लिया था, लेकिन अब वह बेकार साबित हो रहा है। कुछ यूज़र्स ने तो अपने Verified Badge को 'बेकार का टैग' तक कह दिया है।
AI सिस्टम बना समस्या की जड़?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, Meta की AI-बेस्ड मॉडरेशन सिस्टम ही इस गड़बड़ी का मेन कारण है। कई बार ये ऑटोमैटिक एल्गोरिदम किसी वैलिड पोस्ट को भी पॉलिसी वायलेशन मानकर अकाउंट सस्पेंड कर देता है। इससे यूजर्स को न सिर्फ नुकसान होता है, बल्कि बिना किसी गलती के उनका अकाउंट हटाया जा रहा है।
यह पहली बार नहीं है जब Meta के ऑटोमेटेड टूल्स के कारण यूजर्स को नुकसान हुआ हो। पहले भी कई बिजनेस और क्रिएटर्स इस तरह की समस्याओं का सामना कर चुके हैं।
महंगा है Meta Verified सब्सक्रिप्शन
जानकारी के लिए बता दें कि Meta Verified कोई सस्ता सब्सक्रिप्शन नहीं है। अमेरिका में इसकी कीमत 14.99 डॉलर प्रति महीने है, जबकि भारत में यह 699 रुपये प्रति माह में उपलब्ध है। ऐसे में जब यूजर्स पैसे देकर भी समाधान न पा सकें, तो उनकी नाराजगी लाजमी है।
कंपनी ने मांगी माफी, लेकिन समाधान नहीं
Meta की तरफ से एक औपचारिक माफी जरूर दी गई है, लेकिन यूज़र्स को इससे कोई राहत नहीं मिली है। कई यूजर्स अब सोशल मीडिया पर कंपनी के खिलाफ अपने एक्सपीरियंस साझा कर रहे हैं और समाधान की मांग कर रहे हैं।
अब देखना यह है कि क्या Meta इन परेशानियों का कोई ठोस हल पेश करता है या फिर यूज़र्स को यूं ही सिस्टम की गड़बड़ियों से जूझना पड़ेगा। लेकिन एक बात साफ है, पैसे देने के बावजूद अगर मदद न मिले, तो भरोसे की डोर कमजोर हो जाती है।


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