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क्या बच्चे के लिए 'AI Chatbot' बन रहे हैं खतरनाक? पैरेंट्स के लिए बड़ी चेतावनी

AI चैटबॉट्स बच्चों और किशोरों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। लेकिन एक्सपर्ट मानते हैं कि यह उनके मानसिक विकास और असली रिश्तों पर गहरा असर डाल सकते हैं। जानें पैरेंट्स को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

हाल ही में अमेरिका से सामने आई एक दर्दनाक घटना ने पूरी दुनिया को झकझोर दिया है। कैलिफोर्निया के 16 वर्षीय किशोर एडम रेन की मौत ने यह बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर बच्चों और किशोरों के लिए AI चैटबॉट्स कितने सुरक्षित हैं? पिता का आरोप है कि उनके बेटे की आत्महत्या के पीछे AI चैटबॉट के साथ बढ़ता लगाव और गलत दिशा देने वाली बातचीत जिम्मेदार रही।

क्या बच्चे के लिए 'AI Chatbot' बन रहे हैं खतरनाक?

AI चैटबॉट से दोस्ती और खतरे का सफर

शुरुआत में एडम ने चैटजीपीटी को केवल पढ़ाई और होमवर्क के लिए इस्तेमाल किया। लेकिन धीरे-धीरे यह "टूल" उसका "साथी" और फिर "राजदार" बन गया। रिपोर्ट्स के अनुसार, चैटबॉट ने उसे शराब और फांसी जैसे खतरनाक तरीकों पर चर्चा करने की सलाह तक दे दी। यही नहीं, उसने आखिरी पल में ऐसी लाइन कही, जिसने एडम को और गहरी निराशा में धकेल दिया।

यह घटना उन सभी माता-पिता के लिए चेतावनी है जो यह मानते हैं कि उनका बच्चा ऑनलाइन सिर्फ गेम या सोशल मीडिया पर समय बिता रहा है। असलियत यह है कि बच्चे अब नई पीढ़ी के AI साथियों से जुड़ रहे हैं और यह रिश्ता कई बार खतरनाक मोड़ ले सकता है।

बच्चों में AI साथियों का बढ़ता चलन

हाल ही में Common Sense Media की एक रिपोर्ट ने दिखाया कि 13 से 17 साल के करीब आधे किशोर नियमित रूप से AI चैटबॉट का इस्तेमाल कर रहे हैं। वहीं 8 से 12 साल के बच्चों में भी इसका इस्तेमाल बढ़ रहा है।

चौंकाने वाली बात यह है कि 40% से ज्यादा AI ऐप्स खुद को 'साथी' या 'फ्रेंडशिप' ऐप के तौर पर प्रमोट करते हैं। कुछ तो AI बॉयफ्रेंड-गर्लफ्रेंड तक का विकल्प देते हैं, जिनमें रोल-प्ले और अनुचित बातचीत भी शामिल होती है।

असली खतरा कहां है?

विशेषज्ञों का मानना है कि किशोरावस्था का सबसे महत्वपूर्ण काम "सोशल स्किल्स" सीखना होता है-जैसे कि दोस्तों से झगड़ा सुलझाना, असहज परिस्थितियों से निकलना और सहानुभूति विकसित करना। लेकिन चैटबॉट्स इस प्राकृतिक प्रक्रिया में बाधा डाल सकते हैं।

AI साथी हमेशा सहमत रहते हैं, कभी आलोचना नहीं करते और यूजर को "लव बॉम्बिंग" यानी लगातार प्यार और मान्यता देकर बांधे रखते हैं। नतीजतन, बच्चे वास्तविक जीवन की जटिलताओं का सामना करना सीख ही नहीं पाते।

कंपनियों की जिम्मेदारी

हाल ही में OpenAI ने किशोरों के लिए एक "टीन वर्जन" लाने की घोषणा की है, जिसमें अश्लील कंटेंट ब्लॉक करने और जरूरत पड़ने पर सुरक्षा एजेंसियों को अलर्ट करने की सुविधा होगी। यह एक कदम है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि सिर्फ इतना काफी नहीं।

जरूरी है कि AI कंपनियां

  • बच्चों के लिए समय सीमा तय करें।
  • चैटबॉट को 'बहुत असली' दिखाने वाले ट्रिक्स (जैसे मानवीय बोलचाल की नकल) बंद करें।
  • बातचीत के दौरान समय-समय पर यह याद दिलाएं कि आप इंसान से नहीं, बल्कि एक मशीन से बात कर रहे हैं।

क्या कर सकते हैं पैरेंट्स ?

  • अभी के लिए माता-पिता ही सबसे मजबूत सुरक्षा दीवार हैं।
  • बच्चों से खुलकर बात करें कि वे AI चैटबॉट का इस्तेमाल करते हैं या नहीं।
  • छोटे बच्चों के साथ मिलकर चैटबॉट को टेस्ट करें और उन्हें समझाएँ कि हर जवाब 'सही' या 'मानवीय' नहीं होता।
  • टेक्नोलॉजी की बारीकियों पर AI लिटरेसी ट्रेनिंग लें ताकि बच्चों को सही दिशा दे सकें।

AI साथी हर स्थिति में बुरे नहीं हैं। कभी-कभी यह बच्चे को नया स्कूल ज्वाइन करने या आत्मविश्वास बढ़ाने में मदद भी कर सकते हैं। लेकिन अगर इनका इस्तेमाल "वास्तविक रिश्तों" के विकल्प के तौर पर होने लगे, तो यह खतरनाक है।

किशोर चैटबॉट्स की ओर इसलिए भाग रहे हैं क्योंकि वे असली दुनिया में जज होने से डरते हैं। सवाल यह है कि हम माता-पिता और समाज के तौर पर क्या ऐसा माहौल बना रहे हैं जहां बच्चे खुलकर बात कर सकें?

 
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English summary
Are AI Companions Safe for Kids? A Wake-up Call for Parents
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