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क्या Perplexity कर रहा Google Chrome खरीदने का प्लान? बदल जाएगा इंटरनेट का चेहरा

पिछले कुछ सालों में AI ने हमारी डिजिटल लाइव में बड़ी तेजी से जगह बनाई है। चैटबॉट्स से लेकर इमेज जनरेशन और कोडिंग तक हर क्षेत्र में इसने अपनी जगह बना ली है। हाल ही में Perplexity ने एयरटेल यूजर्स को फ्री में प्रो सर्विस देकर सुर्खियों में आ गया है, लेकिन अब AI एक और अहम हिस्से पर कदम रखने वाला है। हम वेब ब्राउजिंग की बात कर रहे हैं।

ऐसे में Perplexity AI का Google Chrome को खरीदने का प्रस्ताव इसी बदलाव की ओर इशारा करता है। अगर यह डील सफल होती है, तो इंटरनेट सर्फिंग का एक्सपीरियंस शायद हमेशा के लिए बदल सकता है। यहां हम इसके बारे में विस्तार से जानेंगे।

क्या Perplexity कर रहा Google Chrome खरीदने का प्लान?

AI और ब्राउजिंग का अनोखा मेल

आम ब्राउजिंग की बात करें तो हम गूगल या क्रोम का इस्तेमाल करते हैं। हालांकि आज की ब्राउजिग में, यूज़र को अलग-अलग टैब खोलने, जानकारी खोजने और उसे समझने में समय लगता है। वहीं Perplexity का विजन अलग है और उसका AI ब्राउजर Comet पहले से ही यूजर की क्वेरी को समझकर सीधे जवाब और क्यूरेटेड रिसर्च देता है। अच्छी बात ये है कि ये सिर्फ लिंक की लिस्ट नहीं होती है इसके पूरी जानकारी होती है।

ऐसे में अगर Chrome जैसी विशाल यूज़र-बेस वाली टेक्नोलॉजी Comet के AI ब्रेन के साथ जुड़ जाती है, तो इंटरनेट सर्च पूरी तरह पर्सनलाइज्ड और ऑटोमेटेड हो सकती है। आसान भाषा में कहें तो किसी टॉपिक पर रिसर्च करने के लिए आपको दर्जनों वेबसाइट विजिट करने की जरूरत नहीं होगी, Chrome खुद आपके लिए AI-जनरेटेड, वेरिफाइड और संक्षिप्त जानकारी तैयार करेगा।

3 अरब यूजर्स पर सीधा असर

Google Chrome के पास दुनिया भर में लगभग 3 अरब एक्टिव यूजर हैं। अगर Perplexity इसे हासिल कर लेता है, तो AI-बेस्ड ब्राउजिंग एक झटके में मेनस्ट्रीम बन जाएगी। ये सिर्फ टेक्नोलॉजी ट्रेंड नहीं होगा, बल्कि इंटरनेट उपयोग के तरीके में क्रांति होगी।

इसमें बहुत से शानदार फीचर्स मिल सकते हैं, जिसमें रियल-टाइम फैक्ट-चेकिंग, ऑटो-ट्रांसलेट और सारांश तैयार करना, कंटेंट को यूजर के पढ़ने के पैटर्न के अनुसार ढालना और वॉइस-इंटरैक्शन से ब्राउजिंग शामिल होंगे।

भले ही AI यूजर के लिए सर्च को आसान और बेहतर बना देगा। ऐसे में प्राइवेसी और डेटा सुरक्षा के नए सवाल खड़े हो जाते हैं। इसके साथ ही AI के गलत या पक्षपाती जवाब देने का खतरा भी हो सकता है। वेब पर "खुद से एक्सप्लोर' करने की आदत कम हो जाएगी।

Google के लिए खतरे की घंटी

अगर Chrome किसी और के हाथ में चला जाता है, तो Google का इकोसिस्टम कमजोर होगा। Chrome सिर्फ एक ब्राउजर नहीं है, बल्कि यह Google सर्च, Gmail, YouTube और Ads नेटवर्क का सीधा गेटवे है। अगर Perplexity इसे अपने AI इकोसिस्टम में इंटीग्रेट करता है, तो Google के सर्च डॉमिनेशन पर सीधा वार होगा।

Google पहले ही AI चैटबॉट Gemini को सर्च में इंटीग्रेट करने की कोशिश कर रहा है, लेकिन Chrome की बिक्री उसके खुद के रणनीतिक ढांचे को हिला देगी।

Perplexity को क्या होगी परेशानी

Perplexity की मौजूदा वैल्यूएशन करीब 18 बिलियन डॉलर है, जबकि Chrome खरीदने के लिए उसने $34.5 बिलियन का प्रस्ताव रखा है। यह उसके मार्केट वैल्यू से लगभग दोगुना है। कंपनी का दावा है कि 'कई फंड पूरी डील फाइनेंस करने को तैयार हैं', लेकिन असली चुनौती डील के बाद Chrome के संचालन और मोनेटाइजेशन में होगी।

AI-संचालित ब्राउजर के लिए बड़े पैमाने पर सर्वर, कंप्यूटिंग पावर और डेटा मैनेजमेंट की जरूरत होगी। NVIDIA जैसे निवेशकों का साथ इसे आसान बना सकता है, लेकिन लागत और प्राइवेसी रेगुलेशंस बड़ी बाधा साबित हो सकते हैं।

यूजर्स के लिए बदलते इंटरनेट का मतलब

अगर यह डील सफल होती है, तो यूजर एक्सपीरियंस तीन बड़े बदलाव देख सकता है। पहला सर्च से सीधे जवाब मिलेंगे, यानी वेबपेज की लिस्ट के बजाय सीधे AI द्वारा क्यूरेटेड रिजल्ट मिलेंगे।

दूसरा, आपको कम क्लिक में ज्यादा कंटेंट दिखने को मिलेगा, यानी इंटरनेट पर 'लिंक-आधारित' नेविगेशन की बजाय 'कॉन्टेंट-आधारित' ब्राउजिंग बढ़ेगी।

कंटेंट क्रिएटर्स के लिए नया दौर शुरू होगा और वेबसाइट ट्रैफिक कम हो सकता है क्योंकि यूजर AI-जनरेटेड समरी से ही संतुष्ट हो जाएंगे, जिससे एड-रेवेन्यू पर असर पड़ेगा।

क्या सच में होगा यह संभव?

एनालिस्ट मानते हैं कि Google Chrome को बेचने से पहले Google कानूनी लड़ाई लड़ेगा। DuckDuckGo के CEO गेब्रियल वीनबर्ग का मानना है कि अगर Google बेचने पर राजी भी हुआ, तो 50 बिलियन डॉलर से कम में नहीं करेगा।

हालांकि यह चर्चा एक नई बहस शुरू करती है कि अगर AI-फोकस्ड कंपनी के पास दुनिया का सबसे लोकप्रिय ब्राउजर आ जाए, तो इंटरनेट का चेहरा कैसा होगा?

 
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