भारत सरकार का बड़ा फैसला: अब हर AI-जेनरेटेड कंटेंट पर लगेगा ‘सिंथेटिक’ लेबल
भारत सरकार अब ऑनलाइन कंटेंट को रोकने नहीं, बल्कि उसे पारदर्शी बनाने की दिशा में कदम उठा रही है। इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी सचिव एस. कृष्णन ने गुरुवार को साफ किया कि सरकार का उद्देश्य AI-जनित कंटेंट (AI-generated content) को प्रतिबंधित करना नहीं है, बल्कि उसे सही तरह से लेबल करने की जिम्मेदारी तय करना है ताकि दर्शक यह समझ सकें कि कौन-सा कंटेंट असली है और कौन-सा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से तैयार किया गया है।

फोकस 'टांसपेरेंसी' पर, 'बैन' पर नहीं
एस. कृष्णन ने स्पष्ट किया कि हम सिर्फ इतना कह रहे हैं कि जो भी सामग्री AI से बनी है, उस पर एक लेबल होना चाहिए। इससे यूज़र्स को यह तय करने की आज़ादी मिलेगी कि वे उसे भरोसेमंद मानें या नहीं। सरकार का कहना है कि यह कदम डिजिटल फ्रीडम को सीमित करने के लिए नहीं, बल्कि यूज़र ट्रस्ट और जागरूकता बढ़ाने के लिए है।
कृष्णन ने यह भी बताया कि सरकार का मकसद सोशल मीडिया या AI क्रिएटर्स पर अनावश्यक बोझ डालना नहीं है। बल्कि अब प्रत्येक AI प्लेटफॉर्म, यूज़र और कंपनी की साझा जिम्मेदारी होगी कि जो भी कंटेंट सिंथेटिक (synthetic) हो, उस पर स्पष्ट और न हटने वाला लेबल लगाया जाए।
3 लेवल पर मिलेगी जिम्मेदारी
नए ड्राफ्ट में यह भी बताया गया है कि इस AI लेबलिंग रूल को लागू करने की जिम्मेदारी तीन स्तरों पर तय की जाएगी कि व्यक्ति या क्रिएटर कंटेंट अपलोड कर रहे हैं, उन्हें बताना होगा कि यह कंटेंट AI से जनरेट हुआ है या नहीं।
AI कंपनियां जो सॉफ्टवेयर या टूल्स कंटेंट बनाने में इस्तेमाल किए जाते हैं, उन्हें ऐसी तकनीक शामिल करनी होगी जिससे लेबल हटाया न जा सके।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स, जैसे YouTube, Meta, Instagram या X को सुनिश्चित करना होगा कि उनके प्लेटफॉर्म पर AI कंटेंट को सही टैग और फ़्लैग किया जाए।
नए IT नियमों में क्या है प्रस्ताव
सरकार द्वारा बुधवार को पेश किए गए IT Rules Amendment 2025 का मकसद ऑनलाइन पारदर्शिता को मजबूती देना है। ड्राफ्ट के अनुसार, अब हर synthetic या AI-generated content को मेटाडेटा (metadata) में टैग करना अनिवार्य होगा। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को यह दिखाने की जिम्मेदारी दी जाएगी कि कोई कंटेंट AI द्वारा जनरेटेड है या नहीं।
यदि कोई कंटेंट ग़लत सूचना या डीपफेक फैलाता है, तो उसके खिलाफ तेज़ कार्रवाई की जाएगी। इस ड्राफ्ट पर 6 नवंबर 2025 तक स्टेकहोल्डर्स की प्रतिक्रिया मांगी गई है।
AI इनोवेशन को नहीं रोका जाएगा
कृष्णन ने कहा कि भारत का रुख "innovation-first" रहेगा। यानी, सरकार AI टेक्नोलॉजी के विकास को प्रोत्साहित करेगी, लेकिन उसके जिम्मेदार उपयोग को सुनिश्चित करने के लिए नियम बनाएगी। उन्होंने कहा कि जो भी आप बना रहे हैं, बनाइए, बस इतना बताइए कि यह सिंथेटिक है। उसके बाद जनता तय करेगी कि यह अच्छा है या नहीं।"
क्यों जरूरी है यह कदम?
पिछले कुछ महीनों में भारत में डीपफेक वीडियो और गलत सूचना के मामलों में तेज़ी आई है। कई सेलिब्रिटीज़ और नेताओं के नाम पर AI से बने नकली वीडियो वायरल हुए, जिससे समाज में भ्रम और नुकसान हुआ। इन घटनाओं के बाद सरकार ने साफ कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को "synthetic accountability" के सिद्धांत पर चलना होगा।
इस नए नियम से न सिर्फ़ डीपफेक्स पर लगाम लगेगी, बल्कि यूज़र्स को यह जानने में मदद मिलेगी कि वे किस तरह की डिजिटल रियलिटी से रूबरू हो रहे हैं।
'Fake' नहीं, 'Label' ही है नया Digital Filter
सरकार का यह कदम डिजिटल युग में एक नई पारदर्शिता संस्कृति की ओर संकेत देता है। अब सवाल यह नहीं रहेगा कि कोई कंटेंट हटाया जाए या नहीं बल्कि यह रहेगा कि क्या दर्शक जानते हैं कि वह AI से बना है या इंसान से।
अगर यह नियम लागू होता है, तो भारत दुनिया के उन शुरुआती देशों में शामिल होगा, जिसने AI Transparency Framework को कानूनी रूप दिया, जो लोकतंत्र और टेक्नोलॉजी के बीच बकी नई मिसाल बनेगा।


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