Trump पर चुप क्यों है Google AI Overview? क्या है इसकी वजह
गूगल अपने AI सर्च फीचर को लगातार बेहतर बनाने और उसे सुरक्षित रखने के लिए कई बदलाव करता रहता है। इसी कड़ी में अब कंपनी ने कुछ खास तरह की सर्च क्वेरीज पर सख्त पाबंदी लगाई है। खासतौर पर उन सवालों पर, जिनमें अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मानसिक स्वास्थ्य स्थिति को लेकर जिक्र होता है।

ट्रंप और डिमेंशिया क्वेरी पर नहीं मिलेगा AI ओवरव्यू
रिपोर्ट्स के मुताबिक, जब कोई यूज़र Google पर "क्या ट्रंप डिमेंशिया के लक्षण दिखाते हैं?" जैसे सवाल सर्च करता है, तो वहां सामान्य AI-जनरेटेड ओवरव्यू नहीं दिखाई देता। इसके बजाय गूगल एक संदेश दिखाता है - "AI Overview is not available for this search." यानी इस तरह की क्वेरी पर AI का संक्षिप्त सारांश उपलब्ध नहीं कराया जा रहा।
यही नहीं, अगर यूजर गूगल के फुल AI मोड में जाकर भी यही सवाल पूछते हैं, तब भी उन्हें सिर्फ 10 साधारण वेब लिंक की लिस्ट ही मिलती है। मतलब गूगल ने साफ तौर पर इन सवालों के लिए ऑटोमेटेड AI रिस्पॉन्स जनरेट करने पर रोक लगा दी है।
जो बाइडेन से जुड़े सवालों पर क्यों अलग है स्थिति?
दिलचस्प बात यह है कि यह रोक सिर्फ ट्रंप के नाम से जुड़ी मानसिक स्वास्थ्य क्वेरीज़ पर दिखाई देती है। उदाहरण के लिए, अगर कोई "क्या जो बाइडेन डिमेंशिया के लक्षण दिखाते हैं?" पूछे तो रेगुलर सर्च में भले ही ओवरव्यू न मिले, लेकिन AI मोड में यूज़र को सारांश (summary) मिल जाता है। हां, इसके साथ गूगल यह चेतावनी जरूर जोड़ता है कि - "कोई क्लिनिकल डायग्नोसिस या सार्वजनिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है।'
इससे यह साफ है कि गूगल ने ट्रंप से जुड़े सवालों पर अतिरिक्त सावधानी बरतनी शुरू कर दी है, जबकि अन्य नेताओं के मामले में उतनी सख्ती नहीं है।
क्यों बढ़ रही हैं ऐसी सर्च क्वेरीज?
डोनाल्ड ट्रंप और जो बाइडेन - दोनों ही अमेरिका के इतिहास में सबसे उम्रदराज राष्ट्रपति रहे हैं। ट्रंप की उम्र 78 वर्ष और बाइडेन की उम्र 81 वर्ष है। यही वजह है कि उनकी मानसिक और शारीरिक फिटनेस को लेकर आम जनता और मीडिया में लगातार सवाल उठते रहते हैं।
लोगों की जिज्ञासा को देखते हुए इस तरह की क्वेरीज़ का सर्च वॉल्यूम तेजी से बढ़ रहा है। लेकिन गूगल ने ट्रंप से जुड़े सवालों पर AI ओवरव्यू रोककर यह संदेश दिया है कि संवेदनशील राजनीतिक मुद्दों पर बिना प्रमाण के कोई निष्कर्ष नहीं दिया जा सकता।
कानूनी और सटीकता की चिंता
गूगल का यह कदम केवल तकनीकी नहीं, बल्कि कानूनी कारणों से भी जुड़ा हो सकता है। हाल ही में कंपनी को ट्रंप के यूट्यूब अकाउंट सस्पेंशन मामले में 24.5 मिलियन डॉलर का सेटलमेंट चुकाना पड़ा था। ऐसे में यदि गूगल का AI किसी विवादित या अप्रमाणित बयान को प्रमोट करता है, तो कंपनी पर बड़े मुकदमों का खतरा बढ़ सकता है।
दूसरी ओर, स्वास्थ्य से जुड़ी क्वेरीज़ में गलत जानकारी देना यूज़र्स के लिए भी भ्रामक हो सकता है। खासकर तब जब वह किसी बड़े राजनीतिक चेहरे से जुड़ी हो। यही वजह है कि गूगल ने अपनी AI नीतियों में कुछ शब्दों और विषयों पर 'नो-रिस्पॉन्स पॉलिसी' लागू की है।
गूगल का आधिकारिक बयान
टेक वेबसाइट The Verge के मुताबिक, जब उन्होंने गूगल से इस रोक को लेकर सवाल किया तो कंपनी के प्रवक्ता ने केवल इतना कहा कि - "AI Overview और AI Mode हर क्वेरी का जवाब देने के लिए डिजाइन नहीं किए गए हैं।" यानी कंपनी ने ट्रंप के नाम को लेकर किसी विशेष पॉलिसी पर साफ जवाब नहीं दिया।
गूगल का यह कदम दिखाता है कि आने वाले समय में AI आधारित सर्च में हमें और भी ज्यादा सेलेक्टिव ब्लॉकिंग देखने को मिलेगी। इसका मकसद होगा गलत सूचनाओं, विवादित बयानों और कानूनी दिक्कतों से बचना। फिलहाल, ट्रंप की मानसिक स्वास्थ्य स्थिति से जुड़ी क्वेरीज़ पर यूज़र्स को सिर्फ पारंपरिक वेब लिंक ही देखने को मिलेंगे।


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