फुल फ्रेम और क्रॉप फ्रेम में क्या फर्क होता है
DSLR कैमरा खरीदने की बात आती है तो हम हर तरह की जानकारी खोजते हैं कि कौन सा कैमरा हमारे लिए अच्छा है।

इसी में एक सवाल यह भी आता है कि क्या हमे फ़ुल फ़्रेम कैमरा लेना चाहिए या क्रॉप फ़्रेम कैमरा ? क्योंकि DSLR कैमरा खरीदते वक़्त इस बात का ध्यान रखना पड़ता है। इसी समस्या का समाधान करने के लिए आज हम आपको फ़ुल फ़्रेम और क्रॉप फ़्रेम के बीच का फर्क बताने जा रहें हैं।
फुल फ़्रेम
DSLR कैमरा फुल फ्रेम एक तरह का इमेज सेंसर होता है जो 35mm फॉर्मेट (36×24 mm) फिल्म कहे लाता है। दरअसल फुल फ्रेम सेंसर में अच्छी इमेज क्वालिटी आती है यही नहीं high ISO में ऐसी इमेज में काफी रौशनी होती है। फुल फ्रेम और क्रॉप फ्रेम में अगर फर्क पता करना है तो फेल्ड ऑफ़ व्यू देखें।
फुल फ्रेम कैमरा ज्यादातर प्रफेशनल फोटोग्राफर इस्तेमाल करते हैं जिससे वे अच्छी पिक्चर ले सके। यही नहीं फुल फ्रेम कैमरा उन्हें वाइड एंगल पर अच्छे से काम करने में मदद करता है।
क्रॉप फ्रेम
क्रॉप फ्रेम की बात करें तो इसमें छोटा सेंसर होता है जो 35mm के अंदर आता है। क्रॉप सेंसर के साथ कैमरे भी छोटे आकार में आते हैं। इसके अलावा इसमें नेरो एंगल ऑफ़ व्यू होता है जिसे वाइड एंगल एफेक्ट को कम करके टेलीफोटो इफ़ेक्ट बढ़ाया जाता है।
कौनसा आपके लिए सही है ?
अगर आप वाइल्डलाइफ, नेचर और स्पोर्ट्स फोटोग्राफी करना पसंद करते हैं तो क्रॉप सेंसर का इस्तेमाल करें। वहीँ अगर आपको प्राकृतिक और कम रोशनी में लैंडस्केप, और आर्किटेक्चरल फोटोग्राफी करनी है तो फुल फ्रेम का इस्तेमाल करें क्योंकि इसमें नार्मल फोकल लेंथ के लेंस इस्तेमाल हो सकते हैं जिससे आप हाई ISO पर शूट कर सकते हैं।


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