Mud Pot Air Cooler: AC या कूलर नहीं! मिट्टी का ये घड़ा देगा ठंडी हवा; तपती गर्मियों में इको-फ्रेंडली और सस्ता
Mud Pot Air Cooler: भारत में गर्मी का असर देखने को मिल रहा है। ऐसे में लोग AC या कूलर जैसा सॉल्यूशन चुनते हैं, लेकिन अगर हम आपको कहें कि एक साधारण का घड़ा आपकी गर्मी की समस्या को दूर कर सकता है तो! जी हां, मिट्टी के घड़े से बना एयर कूलर आपकी परेशानी दूर कर सकता है।
उत्तर भारत के कई राज्यों जैसे उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, झारखंड, पंजाब और पश्चिम बंगाल में जल्द ही तापमान 45 डिग्री सेल्सियस को पार कर सकता है। ऐसे में पंखे की हवा केवल दिखावे के लिए रह जाती है। जहां भारत का हर व्यक्ति एयर कंडीशनर खरीदने में सक्षम नहीं है, ऐसे में मिट्टी के घड़े से बना एयर कूलर आपके लिए सस्ता, इको-फ्रेंडली और बेहतरीन कूलिंग ऑप्शन हो सकता है। आइए इसके बारे में जानते हैं।

क्या है इसके पीछे का विज्ञान?
जैसा कि हम जानते हैं कि गर्मियों में मिट्टी से बनी चीजें ठंडी रहती हैं और पुराने समय में जब फ्रिज नहीं होते थे, तो लोग घड़े का इस्तेमाल करते थे।
इसके पीछे एक विज्ञान है, मिट्टी में छिद्रयुक्त (porous) संरचना मिलती है, जिससे जब आप मिट्टी पर पानी डालते हैं तो धीरे-धीरे वाष्पित होता है।
ये आसपास की गर्मी को सोख लेते हैं, जिससे ठंडक बनी रहती है। इसी तकनीक का इस्तेमाल करके अब मिट्टी के घड़े वाले कूलर बनाए जा रहे हैं।
कैसे काम करती है तकनीक?
मिट्टी के घड़े वाले इस कूलर में नीचे एक पानी का चैंबर होता है और ऊपर एक छोटा इलेक्ट्रिक पंखा लगाया जाता है।
जब पंखे की हवा को मिट्टी की ठंडी सतह और अंदर वाष्पित हो रहे पानी के ऊपर से गुजारती है, तो बाहर निकलने वाली हवा सामान्य पंखे की तुलना में कहीं ज्यादा ठंडी होती है।
DIY तकनीक से बने पारंपरिक कूलर
तमिलनाडु जैसे राज्यों में इस साल इन घड़े वाले कूलरों की खास मांग देखी जा रही है। यहां के कारीगर पुराने मिट्टी के बर्तन को आधुनिक तरीके से डिजाइन कर रहे हैं। कुछ विक्रेता सलाह देते हैं कि अगर आप कूलर के बाहर एक गीला कपड़ा लपेट दें, तो इसका असर और भी ज्यादा बढ़ जाता है, क्योंकि इससे वाष्पीकरण तेज होता है और ठंडी हवा निकलती है।
बजट में सस्ता सॉल्यूशन
जैसा कि हम जानते हैं कि अगर आप आम सा एसी भी खरीदते हैं, तो आपको 25 से 40 हजार रुपये खर्च करने पड़ सकते हैं।
इसके अलावा, आपको भारी बिजली का बिल भी देना पड़ सकता है। ऐसे में मिट्टी के ये कूलर बेहद किफायती ऑप्शन हैं। साथ ही ये कई ऑप्शन्स में आते हैं।
सिंगल फैन पॉट कूलर की बात करें तो ये 2,600 में खरीदा जा सकता है, जो छोटे कमरे के लिए बेस्ट ऑप्शन है।
वहीं डबल फैन मॉडल की कीमत 3,900 रुपये है, जो थोड़ा ज्यादा पावर और बड़े कवरेज के लिए इस्तेमाल होता है।
इसमें आपको जंबो वर्जन भी मिलता है, जिसकी कीमत 6,000 रुपये के आसपास है और यह बड़े कमरों के लिए बेस्ट ऑप्शन हो सकता है।
इन कूलर्स से आपकी बिजली की खपत भी कम होती है, क्योंकि ये केवल एक छोटा सा पंखा चलाते हैं।
इको-फ्रेंडली ऑप्शन
मिट्टी के ये कूलर केवल सस्ते ही नहीं, बल्कि इको-फ्रेंडली भी हैं, क्योंकि इन्हें बनाने में प्लास्टिक या हानिकारक कैमिकल का उपयोग नहीं होता है।
ये पूरी तरह बायोडिग्रेडेबल होते हैं और इसके लिए किसी तकनीशियन की जरूरत नहीं होती हैं।
साथ ही, इसमें शोर भी बहुत कम होता है और रख-रखाव बेहद आसान है।
आजकल ये कूलर्स तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। ये भारत में बढ़ते ग्रामीण नवाचार (Rural Innovation) का हिस्सा हैं।
स्थानीय कुम्हारों ने पारंपरिक मिट्टी के बर्तन को एक नए उपयोग के लिए ढाल लिया है। इससे उन्हें भी आय का नया साधन मिल रहा है और शहरों में भी उनकी चीजों की मांग बढ़ रही है।
कौन खरीद रहा है ये कूलर?
ग्रामीण क्षेत्रों की बात करें तो ये कूलर अब इलेक्ट्रिक कूलर का ऑप्शन बन चुके हैं। इसके साथ ही, शहरों में भी कई पर्यावरण-प्रेमी परिवार एसी का कम उपयोग करने के लिए इन्हें अपनाने लगे हैं।
इसके अलावा, दुकानदार, स्ट्रीट वेंडर और कम्युनिटी सेंटर भी इन कूलर्स को इस्तेमाल में ला रहे हैं, क्योंकि इनका खर्च कम होता है।
कैसे खरीदें ये कूलर?
फिलहाल, ये कूलर लोकल कुम्हारों, सड़क किनारे के विक्रेताओं और कुछ ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हैं।
सोशल मीडिया पर इनसे जुड़े वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं, जिसमें लोग इनके इस्तेमाल, रख-रखाव और DIY तरीके शेयर कर रहे हैं।
हालांकि ये कोई तकनीकी चमत्कार नहीं है, लेकिन गर्मी से राहत पाने के लिए ये देसी, टिकाऊ और स्मार्ट उपाय साबित हो रहा है।


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