क्या आपको 6 जीबी रैम वाले फोन की सच में जरुरत है?
दिनों-दिन स्मार्टफोन मेकिंग कम्पनियां उन्हें ज्यादा एडवांस बनाने में लगी हुई हैं। 2016 के आखिर तक मोबाइल फोन, एक कम्पलीट डिवाइस के तौर पर नजर आने वाले हैं। जल्द ही वीवो एक्सप्ले 5, दुनिया का पहला ऐसा स्मार्टफोन बनने जा रहा है जिसकी रैम, 6जीबी की होगी।
वीवो के अलावा, आसुस जेनफोन 3 डीलक्स, वनप्लस3, और ली ईको ले मैक्स 2 भी इस सूची में शामिल हैं। आने वाले महीने में ऐसी कई पॉवरफुल डिवाइस के मार्केट में उतरने की संभावना है।
लेकिन, सबसे बड़ा प्रश्न यह उठता है कि क्या स्मार्टफोन में 6जीबी रैम की जरूरत है क्योंकि आमतौर पर स्मार्टफोन को चैट, कॉल और सोशल मीडिया को चलाने के लिए ही इस्तेमाल किया जाता है। आइए जानते हैं कुछ अह्म बातें -
रैम
रैम, रेंडम एक्सेस मेमोरी का संक्षिप्त रूप है जो कि ऑपरेटिंग सिस्टम और उन एप को स्टोर करता है, जो डिवाइस में रन कर रही होती हैं। यही कारण है कि जिन सिस्टम का रैम हाई होता है उनकी स्पीड भी अच्छी होती है। रैम पर स्टोर किए गए डेटा को आसानी से इस्तेमाल भी किया जा सकता है।
प्रकार
शुरूआत के स्मार्टफोन में रैम सिर्फ 2 या 3 जीबी की ही होती थी। लेकिन कुछ समय बाद, स्मार्टफोन ने तरक्की की और रैम को बढ़ाकर 4 जीबी तक ले गए। लेकिन अब तो कमाल हो गया.. जल्दी ही फोन में 6जीबी की रैम आने वाली है यानि आपका फोन बहुत ही स्मूथ चलने वाला है और स्पेस प्रॉब्लम भी नहीं आएगी।
क्या एंड्रायड स्मार्टफोन को हाई रैम की जरूरत है
पहले सिर्फ 4 जीबी या उससे कम रैम के ही स्मार्टफोन आते थे लेकिन अब 6जीबी रैम के फोन आने वाले हैं। वैसे, माईक्रोसॉफ्ट ने एक डॉक्यूमेंट को जारी किया है कि विंडो 10ओएस में ओएस के 32 बिट वर्जन के लिए सिर्फ 1 जीबी रैम की आवश्यकता होती है और ओएय के 64 बिट के लिए 2 जीबी रैम की आवश्यकता होती है। यह विंडो 10 के सभी डिवाइस पर लागू होता है फिर चाहें वो लैपटॉप हो या कन्वर्टीबल पीसी।
इसके अलावा, आईफोन मॉडल में अधिकतम 2 जीबी की रैम आती है और उन फोन में कभी भी किसी प्रकार की समस्या या बाधा उत्पन्न नहीं हुई है।
क्या वाकई में एंड्रायड डिवाइस को अधिक रैम की आवश्यकता होती है?
इसके पीछे कारण यह है कि एप्पल के आईओएस प्लेटफॉर्म और एंड्रायड ओएस में काफी फर्क होता है। एंड्रायड ओएस, जावा प्रोग्रामिंग लैंग्वेज को सपोर्ट करता है और एप के इस्तेमाल के बाद मेमोरी की रिसाइक्लिंग पर निर्भर करता है। इस प्रक्रिया को गारबेज़ कलेक्शन के रूप में जाना जाता है। वहीं दूसरी ओर, आईओएस एप को अलग तरीके से लिखा जाता है जिसे इस प्रक्रिया की आवश्यकता नहीं पड़ती है।
इसके अलावा, वहां, प्रत्येक स्मार्टफोन ब्रांड के सॉफ्टवेयर में अलग-अलग चीजें होती है। उदाहरण के लिए - नेक्सेस 6 में बिना किसी एप रनिंग के 1.2 जीबी रैम को इस्तेमाल किया गया और ऑक्सीजनओएस में 1.39 जीबी रैम को इस्तेमाल किया गया, जबकि गैलेक्सी नोट 5 में 1.7 जीबी रैम को इस्तेमाल किया गया। अगर वहां बैकग्राउंड सर्विस हैं जो कि एंड्रायड डिवाइस पर रन करती हैं, तो यह अधिक मात्रा में रैम की खपत करती हैं।
अगर आपके पास एक एंड्रायड स्मार्टफोन है जिसमें 1 जीबी या 2 जीबी रैम है और उसमें बैकग्राउंड में कई एप रन करती हैं तो ऑपरेटिंग सिस्टम, लगातार मेमोरी को फ्लश करता रहेगा और आप जिन एप को इस्तेमाल कर रहे हैं उनके लिए डेटा को रिफिल करता रहेगा। यह प्रक्रिया, क्लटर्स में परिणामस्वरूप डिवाइस के प्रदर्शन को धीमा करता रहेगा।
उच्च रैम की वास्तविक आवश्यकता
अधिक रैम की आवश्यकता वाकई में एंड्रायड फोन को होती ही है, ताकि उन्हें कोई भी यूजर लम्बे समय तक इस्तेमाल कर सकें। अभी यूजर्स जिन फोन को इस्तेमाल कर रहे हैं वो आमतौर पर 1 जीबी से 2 जीबी तक हैं। लेकिन अगर आप अपनी डिवाइस में ढ़ेरों एप डालना चाहते हैं तो आपको अधिक रैम की आवश्यकता होगी, क्योंकि कई एप ऐसी होती हैं जिन्हें 4 जीबी रैम की आवश्यकता पड़ सकती है।
अधिक रैम होना लाभकारी
स्मार्टफोन में स्मार्ट फीचर्स को रन कराने के लिए, हाई रैम की आवश्यकता होती है। एंड्रायड प्लेटफॉर्म को इस प्रकार तैयार किया जाता है कि वह पूरी तरह से रैम पर निर्भर होता है। अगर रैम ज्यादा होगी तो फोन में ज्यादा डेटा और एप होंगे और उन पर काम करना भी आसान होगा।
उच्च रैम, फोन में डेटा को सेफ रखती है और हार्डवेयर को भी पॉवर देती है जिससे फोन सभी एप को अच्छे से हैंडल कर लेता है।
क्या आपको भी 6 जीबी रैम वाला फोन चाहिए?
अगर आप अपडेटेड रैम वाला फोन चाहते हैं तो 6 जीबी रैम वाला फोन ले लें। हैवी स्मार्टफोन यूजर्स के लिए ये काफी अच्छा विकल्प है। इससे प्रोडक्टविटी बढ़ती है और आपके सारे काम आसानी से हो जाते हैं।


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