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Google Nano Banana AI से बन रहे फर्जी PAN और आधार कार्ड, स्कैमर्स ऐसे कर रहे हैं ठगी

Google के Nano Banana AI ने लॉन्च होते ही इंटरनेट पर धूम मचा दी थी। अपनी सटीक और क्रिएटिव फोटो एडिटिंग के चलते यह टूल यूजर्स के बीच काफी फेमस हो गया। लेकिन अब इस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल स्कैमर्स ने लोगों को ठगने के लिए शुरू कर दिया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, स्कैमर्स इस AI टूल की मदद से हूबहू असली दिखने वाले फर्जी दस्तावेज (Fake IDs) जैसे पैन कार्ड और आधार कार्ड बना रहे हैं। इसका इस्तेमाल कर वे न सिर्फ फूड डिलीवरी ऐप्स को चूना लगा रहे हैं, बल्कि आम लोगों की पर्सनल जानकारी में सेंधमारी भी कर रहे हैं।

Google Nano Banana AI से बन रहे फर्जी PAN और आधार कार्ड

बेंगलुरु के टेकी ने खोली परफेक्शन की पोल

इस फर्जीवाड़े की गंभीरता तब सामने आई जब बेंगलुरु के एक टेक एक्सपर्ट ने सोशल मीडिया पर यह खुलासा किया कि Google Nano Banana AI मॉडल से फेक आईडी बनाना कितना आसान है। उन्होंने पब्लिकली उपलब्ध टूल्स का उपयोग करके फर्जी जानकारी वाले पैन कार्ड बनाए।

हूबहू दिखते हैं दस्तावेज

नतीजा चौंकाने वाला था- फर्जी कार्ड के फॉन्ट, लेआउट और यहां तक कि सेफ्टी चिन्ह बिल्कुल असली जैसे दिख रहे थे। ये इतने सटीक थे कि सामान्य आंखों से देखने पर असली और नकली में फर्क करना लगभग नामुमकिन है।

Zomato और Swiggy जैसे ऐप्स बने निशाना स्कैमर्स सिर्फ आईडी फ्रॉड तक सीमित नहीं हैं। वे AI-जनरेटेड तस्वीरों का इस्तेमाल कर Zomato और Swiggy जैसी फूड डिलीवरी सेवाओं के साथ भी धोखाधड़ी कर रहे हैं।

ठगी का तरीका

स्कैमर्स असली दिखने वाली नकली तस्वीरें बनाकर डिलीवरी पार्टनर्स को चकमा देते हैं। वे प्रीपेड ऑर्डर हासिल करने या फर्जी वेरिफिकेशन फोटो दिखाकर ऑर्डर कैंसिल/रिटर्न का रिफंड क्लेम करने जैसे हथकंडे अपना रहे हैं।

सुरक्षा में कहां हो रही है चूक?

साइबर सुरक्षा एक्सपर्ट्स का कहना है कि भारत में वेरिफिकेशन का तरीका एक बड़ा फ्लॉ है। आधार और पैन कार्ड में QR कोड होते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर (जैसे सिम कार्ड लेते वक्त या डिलीवरी के समय) अक्सर लोग सिर्फ कार्ड को देखकर ही भरोसा कर लेते हैं। स्कैमर्स इसी 'विजुअल इंस्पेक्शन' का फायदा उठा रहे हैं।

कैसे पहचानें AI वाला झूठ?

अगर आपको किसी डॉक्यूमेंट या फोटो पर शक हो, तो इन बातों का ध्यान रखें।

ऑनलाइन वेरीफाई करें: किसी भी डॉक्यूमेंट को सिर्फ देखकर भरोसा न करें। आधिकारिक पोर्टल पर जाकर डिटेल्स डालें और OTP के जरिए वेरीफाई करें।

टेक्स्ट और फॉन्ट: AI अक्सर टेक्स्ट को धुंधला या टेढ़ा-मेढ़ा कर देता है। स्पेलिंग और फॉन्ट की एलाइनमेंट गौर से देखें।

रोशनी और परछाई: अगर तस्वीर में परछाई अप्राकृतिक लग रही है या रोशनी अजीब दिशा से आ रही है, तो यह फेक हो सकती है।

टेक्सचर: अगर स्किन या कागज का टेक्सचर बहुत ज्यादा चिकना या प्लास्टिक जैसा लगे, तो सावधान हो जाएं।

 
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