ऑनलाइन शॉपिंग में छिपे Extra Charges से परेशान? यहां करें Complaint और पाएं Refund
अगर आपने हाल ही में Flipkart Big Billion Days, Amazon Great Indian Festival या फिर Zepto जैसी किसी ऑनलाइन सेल से कोई सामान ऑर्डर किया है, तो शायद आपने भी यह महसूस किया होगा, डिस्काउंट देखकर दिल खुश हुआ, लेकिन पेमेंट करते समय असली झटका लगा।
पहले प्रोडक्ट ₹5,999 दिखा, लेकिन पेमेंट पेज पर पहुंचते ही टैक्स, सर्विस चार्ज और प्लेटफॉर्म फीस मिलाकर वही पुरानी कीमत लौट आई। यही चालबाजी अब 'ड्रिप प्राइसिंग' (Drip Pricing) के नाम से जानी जाती है और भारत सरकार ने इस पर सख़्त चेतावनी जारी की है।

क्या है ड्रिप प्राइसिंग?
सरल शब्दों में ड्रिप प्राइसिंग वह तरीका है जिसमें किसी प्रोडक्ट को पहले "सस्ता" दिखाया जाता है, लेकिन धीरे-धीरे पेमेंट स्टेप्स में "छिपे हुए चार्ज" जोड़ दिए जाते हैं।
उदाहरण के लिए आपको ₹6,000 का हेडफोन दिखता है, लेकिन 'Proceed to Pay' करते ही कुल रकम ₹6,499 या ₹6,699 तक पहुंच जाती है।
यह वही रकम होती है जिसे कंपनियां कंज्यूमर साइकोलॉजी का फायदा उठाकर धीरे-धीरे बढ़ा देती हैं ताकि आपको धोखे का एहसास भी न हो।
डार्क पैटर्न का असली खेल
ड्रिप प्राइसिंग, असल में, डार्क पैटर्न्स (Dark Patterns) की बड़ी लिस्ट का हिस्सा है, यानी ऐसे डिजिटल ट्रिक्स जिनसे यूजर को भ्रमित किया जाता है।
- कार्ट में दिखने वाली कीमत और चेकआउट कीमत अलग होना।
- "Free Delivery" लिखा होना, लेकिन इनवॉइस में ₹49 डिलीवरी चार्ज दिख जाना।
- "Zero Processing Fee" ऑफर के बावजूद पेमेंट करते समय प्रोसेसिंग चार्ज जुड़ जाना।
- "GST कम हुआ" का ऐड, लेकिन फाइनल बिल में कोई राहत न दिखना।
भारत सरकार ने हाल ही में डिजिटल कंज्यूमर प्रोटेक्शन फ्रेमवर्क के तहत इन प्रैक्टिसेज को "भ्रामक और अवैध" बताया है।
छिपे चार्ज पर होगी कार्रवाई
उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने साफ कहा है कि ई-कॉमर्स और फूड डिलीवरी प्लेटफ़ॉर्म्स अब उपभोक्ताओं को गुमराह नहीं कर सकते। अगर किसी वेबसाइट या ऐप पर ड्रिप प्राइसिंग या हिडन चार्ज का मामला पाया गया, तो उस पर कठोर कार्रवाई की जाएगी।
मंत्रालय के मुताबिक, कंपनियों को अब ट्रांसपेरेंट प्राइसिंग पॉलिसी अपनानी होगी, यानी जो कीमत पहले स्क्रीन पर दिखे, वही आखिरी पेमेंट तक रहे।
नेशनल कंज्यूमर हेल्पलाइन से करें शिकायत
अगर आपको भी किसी ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म ने ड्रिप प्राइसिंग के जाल में फँसाया है, तो घबराने की जरूरत नहीं। सरकार ने इसके लिए National Consumer Helpline (NCH) बनाई है, जहाँ आप सीधी शिकायत दर्ज कर सकते हैं।
- शिकायत दर्ज करने का तरीका बेहद आसान है।
- 1915 पर फोन करें, यह हेल्पलाइन हर राज्य में काम करती है।
- शिकायत में प्रोडक्ट का नाम, प्लेटफॉर्म का नाम और स्क्रीनशॉट जरूर जोड़ें।
- चाहें तो consumerhelpline.gov.in वेबसाइट या NCH ऐप के जरिए भी शिकायत दर्ज करें।
- आपकी शिकायत सिर्फ आपकी नहीं, हजारों उपभोक्ताओं की आवाज बन सकती है।
क्यों जरूरी है सतर्क रहना
आज के डिजिटल दौर में कंपनियां एल्गोरिद्म और यूज़र बिहेवियर का एनालिसिस करके आपको वही दिखाती हैं जो आप देखना चाहते हैं , जैसे सस्ता, जल्दी और ऑफर वाला प्राइस। लेकिन यही 'सस्ता ऑफर' कब 'महंगा सौदा' बन जाए, इसका एहसास बहुत देर में होता है।
ड्रिप प्राइसिंग को पहचानना और रिपोर्ट करना न सिर्फ अपने पैसे की सुरक्षा है, बल्कि ई-कॉमर्स प्लेटफ़ॉर्म्स को ज़िम्मेदार बनाने की दिशा में एक कदम है।
सरकार अब इस विषय पर गंभीर है, और उपभोक्ताओं से उम्मीद कर रही है कि वे सिर्फ "ऑफर देखकर" खरीदारी न करें, बल्कि "बिल देखकर" समझदारी दिखाएं। क्योंकि डिजिटल इंडिया में अब जागरूक खरीदार ही असली ताकत है।


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