पानी में गिरा फोन फिर भी चालू, क्या है इसके पीछे का खेल; जो डिवाइस को रखता है ऑन
बरसात का मौसम इंसानों के लिए बहुत सुहावना और आनंद वाला होता है। लेकिन इन दिनों में मोबाइल को सेफ रखना बहुत बड़ी चुनौती होती है। खासकर वे लोग जो रोजाना ऑफिस जाते हैं या कहीं और जाते हैं। ऐसे में जरूरी है कि आपका फोन IP Rating से लैस है, जो फोन को पानी से सेफ रखे।
कुछ लोगों के जेहन में सवाल आता है कि आखिर IP Rating में ऐसा क्या खास होता है, जो पानी से फोन को सेफ करता है। आज की इस स्टोरी में हम IP रेटिंग के पूरे खेल को समझेंगे। इसे पढ़ने के बाद आपको पता चलेगा कि आखिर इसके पीछे क्या टेक छिपा हुआ है।

IP रेटिंग का मतलब क्या है?
IP का फुल फॉर्म है "Ingress Protection"। ये एक अंतरराष्ट्रीय मानक है जो इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस की धूल और पानी से सुरक्षा को दर्शाता है। इसके बाद आने वाला नंबर दो भागों में होता है।
पहला अंक (0-6): धूल से सुरक्षा का स्तर बताता है।
दूसरा अंक (0-9): पानी से सुरक्षा का स्तर दिखाता है।
जैसे IP68 का मतलब है -
6: पूरी तरह से धूल से सुरक्षित
8: लंबे समय तक पानी में रहने के बावजूद भी डिवाइस सुरक्षित
कैसे काम करती है यह तकनीक?
फोन में IP रेटिंग पाने के लिए कई इंजीनियरिंग तकनीकों का सहारा लिया जाता है।
- सीलिंग टेक्नोलॉजी: डिवाइस के इंटरनल कंपोनेंट्स को एयरटाइट या वाटरटाइट सील से कवर किया जाता है
- नैनो-कोटिंग: कुछ कंपनियाँ मदरबोर्ड और अन्य सर्किट पर विशेष जल-प्रतिरोधी नैनो-कोटिंग लगाती हैं।
- सिम ट्रे और चार्जिंग पोर्ट के चारों ओर रबर गैसकेट्स लगाए जाते हैं ताकि पानी अंदर न जा सके।
IP रेटिंग का मतलब वॉटरप्रूफ नहीं
ध्यान रखें, IP रेटिंग फोन को वॉटर-रेसिस्टेंट बनाती है, वॉटरप्रूफ नहीं। यानी कुछ मीटर गहराई तक सीमित समय के लिए पानी में रहने पर नुकसान नहीं होगा। लेकिन पानी में गिरने या तेज दबाव वाले पानी (जैसे बारिश में चलाना या नहाते वक्त इस्तेमाल) से बचाना चाहिए
कौन-कौन सी रेटिंग सबसे पॉपुलर है?
- IP67: 1 मीटर गहराई तक 30 मिनट तक सुरक्षित रहेगा।
- IP68: 1.5 मीटर या उससे ज़्यादा, समय कंपनी तय करती है।
- IPX4, IPX7: पानी से कुछ हद तक बचाव, लेकिन धूल की कोई गारंटी नहीं होती।


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