बच्चों को iPhone दिलाएं या Android? पेरेंट्स की सबसे बड़ी कन्फ्यूजन!
स्मार्टफोन हर किसी की लाइफ में अहम रोल निभा रहा है। बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक- हर किसी को इसकी जरूरत पड़ रही है। ऐसे में जरूरी हो जाता है कि हमारे घर के बच्चे और बुजर्गों के पास उनकी जरूरत के अनुसार परफेक्ट फोन हो।
कुछ लोग कन्फ्यूजन में होते हैं कि उन्हें अपने बच्चे को iPhone देना चाहिए या Android? ये सवाल हर उस पैरेंट के मन में आता है जो अपने बच्चे की सुरक्षा, पढ़ाई और सोशल मीडिया के बढ़ते इस्तेमाल को लेकर सजग है।

iPhone महंगा... लेकिन सिक्योरिटी है
प्राइवेसी और सिक्योरिटी के लिहाज से iPhone टॉप पर है। एपल के iOS सिस्टम में कई फीचर्स जैसे Screen Time Monitoring, App Access Control, और Location Sharing को बड़ी आसानी से पैरेंट्स कंट्रोल कर सकते हैं।
हालांकि, इसकी कीमत 70,000 रुपये से ऊपर या इसके आसपास होती है, जो हर फैमिली के बजट में नहीं होता। लेकिन कुछ पेरेंट्स इसे एक इनवेस्टमेंट मानते हैं। बच्चे की डिजिटल सुरक्षा के लिए।
Android: बजट फ्रेंडली
दूसरी ओर Android स्मार्टफोन 8,000 रुपये से शुरू हो जाते हैं और 50,000 रुपये तक जाते हैं। इसमें कई ब्रांड्स जैसे Samsung, Realme, Xiaomi और Motorola सस्ते और अच्छे ऑप्शन देते हैं।
Android में कस्टमाइजेशन के काफी विकल्प होते हैं, लेकिन यही बात बच्चों के लिए रिस्क बन सकती है। गूगल प्ले स्टोर पर कई ऐसे ऐप्स हैं जो बच्चे की प्राइवेसी और डिवाइस को खतरे में डाल सकते हैं, अगर पैरेंट्स सतर्क न रहे तो।
क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स?
साइबर एक्सपर्ट्स मानते हैं कि अगर बच्चा 14 साल से कम उम्र का है, तो एक सीमित फीचर वाला Android फोन पर्याप्त है, जिसमें इंटरनेट और ऐप्स को कंट्रोल किया जा सके।
वहीं अगर बच्चा 15-18 साल का है और वो पढ़ाई या कंटेंट क्रिएशन के लिए फोन का उपयोग कर रहा है, तो iPhone भी एक सही विकल्प हो सकता है। लेकिन इसके लिए जरूरी है कि परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक हो।
Peer Pressure बनाम Practical Decision
कई बार बच्चे अपने फ्रेंड्स को देखकर iPhone मांगते हैं, लेकिन पेरेंट्स को समझना होगा कि टेक्नोलॉजी सिर्फ ट्रेंड नहीं है, एक जिम्मेदारी भी है।


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