Social Media Side Effects: आपसे ज्यादा कहीं Social Media की बाते तो नहीं मानता आपका बच्चा?

Social Media Side Effects: क्या आप जानते है कि माता-पिता और उनके बच्चों के लिए क्या बेहद जरूरी है? यह जानने के लिए कि सोशल मीडिया ( Social Media ) - इसकी लोकप्रियता के बावजूद - हम सभी पर कुछ हानिकारक प्रभाव डाल सकता है। और जब 21वीं सदी में बच्चों और किशोरों की बात आती है, एक रिपोर्ट के अनुसार, यह पहचाना गया कि स्नैपचैट किशोरों द्वारा सबसे अधिक पसंद किया जाने वाला और उपयोग किया जाने वाला सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म है, जिसके बाद टिकटॉक और इंस्टाग्राम है।
विशेष रूप से, स्नैपचैट और टिकटॉक की तुलना में इंस्टाग्राम का उपयोग सबसे अधिक है। ये बात हम सभी को पता है सोशल मीडिया ( Social Media ) हम सभी के जीवन का एक अनिवार्य हिस्सा बन गया है, खासकर 13-साल के बाद के लोगों के लिए। पर ये बात तो हम सभी ने सुनी है कि हर चीज कि एक लिमिट होती है और वो लिमिट ज्यादा होने पर चीज हमे ही नुकसान देती है यह बात Social Media के लिए भी लागू होती है कई ऐसे कारण है जिनकी वजह से आपका बच्चा Social Media से प्रभावित हो रहा है, साथ ही चलिए जानते है Social Media कैसे कर रहा है आपके बच्चे को प्रभावित...
1- Detrimental to Mental Health ( मानसिक स्वास्थ्य के लिए हानिकारक )
मानसिक स्वास्थ्य से तात्पर्य आपके मनोवैज्ञानिक, भावनात्मक और सामाजिक कल्याण ( Psychological, Emotional, and Social Well-Being) से है। सोशल मीडिया का अत्यधिक उपयोग किशोरों के सोचने, प्रतिक्रिया करने और काम करने के तरीके को प्रभावित कर सकता है। हेल्थ मैटर्स के एक लेख के अनुसार, एक बच्चा जिस उम्र में सोशल मीडिया अकाउंट खोलता है उसकी औसत उम्र साढ़े 12 होती है।
जब एक किशोर में ऑनलाइन अधिक समय बीतता है तो , तो इसका परिणाम यह होता है कि वे वास्तविक जीवन में अपने साथियों के साथ बातचीत करने में कम समय व्यतीत करते है। जब किशोर 3 से 6 घंटे या उससे भी अधिक समय ऑनलाइन बिताते हैं, तो यह उस समय को सीमित कर देता है। जिसके चलते बच्चे के मानसिक स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ता है।
2- Disturbed Sleep ( नींद में खलल )
किशोरों के सामने सबसे आम समस्या सोशल मीडिया के अत्यधिक उपयोग के कारण सोने के पैटर्न में गड़बड़ी है। ग्लासगो विश्वविद्यालय के एक अध्ययन के अनुसार, किशोरों द्वारा सोशल मीडिया का जितना अधिक उपयोग किया जाता है, उतनी ही अधिक संभावना है कि वे सो जाते है और अक्सर रात के दौरान जागते है।

3- Depression ( डिप्रेशन )
"हम खुश तस्वीरों के साथ एक उदास पीढ़ी है"। एक अध्ययन के अनुसार, लगभग 48% किशोर जो प्रतिदिन 5 घंटे स्क्रीन पर बिताते है उनमें कम से कम एक सुसाइड जोखिम कारक होता है। साथ ी सोशल मीडिया धीरे धीरे डिप्रेशन की तरफ ले जा रहा है।
4- Anxiety ( चिंता )
सोशल मीडिया ने "culture of comparison बनाई है, इससे युवाओं में बेचैनी है। एक अध्ययन से पता चलता है कि किशोर अब सोशल मीडिया के दबाव का सामना करते है क्योंकि वे सामाजिक प्रतिष्ठा और आत्म-अभिव्यक्ति से जुड़ी समस्याओं के इर्द-गिर्द घूमते हैं। उनको सभी के जैसा बनना है जैसे सोशल मीडिया पर दिखाया गया है वैसा करना है ऐसा न कर पाने पर वह चिंता में आने लगते है।
5- Cyberbullying ( साइबर बुलिंग )
हम सभी ने साइबर बुलिंग के बारे में सुना है और जिन्होंने नहीं किया है, उनके लिए साइबरबुलिंग एक प्रकार की बदमाशी या उत्पीड़न है जिसे इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों का उपयोग करके ऑनलाइन बुलिंग के रूप में भी जाना जाता है।साइबरबुलिंग को सोशल मीडिया का सबसे नकारात्मक प्रभाव माना जाता है। उदाहरण के लिए, कोई भी आपके बारे में नकारात्मक टिप्पणियां या कहानियां पोस्ट कर सकता है जिससे किशोरों पर अन्य सोशल मीडिया प्रभाव पड़ सकते हैं।
ये प्रभाव हो सकते हैं:
अकेलापन
कम आत्म सम्मान
सामाजिक चिंता और भी बहुत कुछ


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