सेकंड-हैंड फोन खरीदने से पहले रुकिए! एक गलती मुसीबत में फंसा सकती है?
बजट में स्मार्टफोन खरीदने के लिए लोग अक्सर सेकंड-हैंड या रीफर्बिश्ड फोन की ओर रुख करते हैं। पहली नजर में यह डील फायदेमंद लगती है, लेकिन सच ये है कि इसमें कई तरह के रिस्क भी छिपे होते हैं। ऐसे में जरूरी हो जाता है कि पुराना फोन खरीदते वक्त सावधानी बरती जाए।
अक्सर होता है कि कुछ लोग जल्दबाजी में गलती कर बैठते हैं और बाद में उन्हें खामियाजा भुगतना पड़ता है।आइए जानते हैं कि ऐसे फोन खरीदते समय किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है।

1. बैटरी हेल्थ हो सकती है कमजोर
पुराने स्मार्टफोन में बैटरी काफी हद तक इस्तेमाल हो चुकी होती है। कई बार यह जल्दी डिस्चार्ज होती है और बैकअप भी कम देती है। लंबे समय तक फोन चलाने वाले यूजर्स के लिए यह सबसे बड़ी समस्या बन सकती है।
2. डुप्लीकेट या खराब पार्ट्स का खतरा
रीफर्बिश्ड फोन के नाम पर कई बार ऐसे डिवाइस बेचे जाते हैं जिनमें डुप्लीकेट या लोकल क्वालिटी के पार्ट्स लगे होते हैं। इससे फोन का परफॉर्मेंस बिगड़ सकता है और यह ज्यादा दिन तक टिक नहीं पाता।
3. चोरी के फोन का रिस्क
सेकंड-हैंड फोन खरीदते समय सबसे बड़ा खतरा चोरी के डिवाइस का होता है। अगर आपने बिना चेक किए ऐसा फोन ले लिया, तो आप कानूनी मुसीबत में भी फंस सकते हैं। इसलिए खरीदने से पहले IMEI नंबर जरूर वेरिफाई करें।
4. सिक्योरिटी अपडेट्स का अभाव
पुराने स्मार्टफोन में अक्सर सिक्योरिटी अपडेट्स मिलना बंद हो जाते हैं। इसका मतलब है कि फोन हैकिंग और डेटा चोरी जैसे खतरों के लिए ज्यादा संवेदनशील हो जाता है।
5. वारंटी और रिपेयरिंग की दिक्कत
ज्यादातर सेकंड-हैंड फोन की वारंटी खत्म हो चुकी होती है। ऐसे में अगर फोन खराब होता है, तो रिपेयरिंग का पूरा खर्च आपकी जेब से जाएगा, जो कई बार नए फोन जितना महंगा पड़ सकता है।
क्या करें और क्या न करें?
- खरीदने से पहले हमेशा IMEI नंबर वेरिफाई करें।
- भरोसेमंद प्लेटफॉर्म या सर्टिफाइड रीसेलर से ही फोन खरीदें।
- बैटरी हेल्थ और कैमरा परफॉर्मेंस जरूर चेक करें।
- शक हो तो खरीदने से बेहतर है थोड़ा और पैसा जोड़कर नया फोन लेना।


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