अब फोन की बैटरी क्यों नहीं निकलती? तकनीक की तरक्की या कंपनियों की चाल!
अगर आपने 2015 से पहले के फोन इस्तेमाल किए हैं, तो आप जानते होंगे कि जरूरत पड़ने पर बैटरी निकालना कितना आसान होता था। लेकिन आजकल के लगभग सभी स्मार्टफोन में बैटरी non-removable यानी हटाई नहीं जा सकती।
सवाल ये है कि क्या ये तकनीक का विकास है या कंपनियों की कोई रणनीति? आज हम इसी सवाल का जवाब जानने की कोशिश करेंगे।

बैटरी न निकलने के पीछे की कारण
स्लिम और कॉम्पैक्ट डिजाइन
आजकल के स्मार्टफोन पहले से कहीं ज्यादा पतले और हल्के होते हैं। हटाने योग्य बैटरी रखने से फोन का डिजाइन मोटा और भारी हो जाता था, जबकि फिक्स बैटरी से कंपनियों को sleek और प्रीमियम लुक देना आसान हो गया।
Waterproofing यानी वाटर रेसिस्टेंस
IP67 या IP68 जैसी रेटिंग्स तभी संभव हैं जब फोन सील्ड हो। बैटरी को हटाने योग्य बनाने से पानी और धूल फोन में घुस सकते हैं। इसलिए कंपनियां अब sealed यूनिबॉडी डिजाइन अपनाती हैं।
फास्ट चार्जिंग और सेफ्टी
नई टेक्नोलॉजी वाली बैटरियां ज्यादा तेज चार्ज होती हैं और ओवरहीटिंग से बचाव के लिए कई सुरक्षा लेयर्स के साथ आती हैं। फिक्स बैटरी के साथ इन सुरक्षा उपायों को लागू करना आसान होता है।
क्या ये कंपनियों की चाल भी है?
- कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि बैटरी को न हटाने देने के पीछे कॉरपोरेट स्ट्रैटेजी भी हो सकती है।
- जब बैटरी खराब होती है, तो यूजर को नया फोन खरीदने के लिए मजबूर किया जा सकता है।
- रिपेयरिंग में कंपनियों की कमाई बढ़ती है, क्योंकि ग्राहक सर्विस सेंटर पर निर्भर हो जाते हैं।
- यूजर की स्वतंत्रता सीमित हो जाती है, जिससे टेक कंपनियों पर उनकी निर्भरता बढ़ती है।
यूजर की परेशानी भी कम नहीं
गांवों या छोटे शहरों में, जहां सर्विस सेंटर दूर होते हैं, वहां बैटरी बदलवाना एक बड़ा सिरदर्द बन जाता है। पहले जहां लोग खुद बैटरी खरीदकर बदल लेते थे, अब इसके लिए तकनीशियन की जरूरत पड़ती है।


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