इन बातों को जान के भी अंजान बनते हैं

By Agrahi
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आप दुनिया के किसी भी कोने में चले जाएं, हर जगह आपको कुछ न कुछ मिथक जरूर मिल जाएंगे। ऐसा नहीं है कि ये मिथक सिर्फ धर्म या आध्‍यात्‍म में ही होते हैं बल्कि ये हर क्षेत्र में होते हैं। बिल्‍ली रास्‍ता काट जाए तो काम बुरा हो जाएगा, टूटता तारा देख लो तो मन्‍नत पूरी हो जाएगी; ऐसे कई मिथक समाज में व्‍याप्‍त है। क्‍या आपने सोचा है कि विज्ञान में भी ऐसे मिथक हैं। जी हां, विज्ञान में हर बात को तर्क और कारण के आधार पर पेश किया जाता है लेकिन इंसानी बुद्धि ने विज्ञान को दरकिनार कर उसमें भी मिथक घुसा दिए। आइए जानते हैं ऐसे ही कुछ विज्ञान सम्‍बंधी मिथकों के बारे में:

मिथक नम्‍बर - 1:
 

मिथक नम्‍बर - 1:

इंसानों के बीच मिथक है कि पहले इंसान या जानवर या कोई भी प्राणी उतना विकसित या समझदार नहीं था, जितना अब है।

विज्ञान का तर्क: लेकिन इस बारे में विज्ञान का तर्क है कि इंसानों ने पहले से ज्‍यादा सुधार लाया है लेकिन बाकी सभी प्राणियों में यह बात लागू नहीं होती है। विकासवादी सुधार, समय पर नहीं बल्कि पर्यावरण पर निर्भर करता है।

मिथक नम्‍बर - 2:

मिथक नम्‍बर - 2:

हॉलीवुड की कई फिल्‍मों में प्‍लॉट को मजेदार बनाने के लिए स्‍पेस में होने वाले यात्रियों को गायब होता, फटता और चटकता दिखा दिया जाता है।

विज्ञान का तर्क: इस बारे में विज्ञान का कहना है कि जब तक अंतरिक्ष यात्री, अंतरिक्ष में अपने फेफड़ों की हवा बाहर निकालकर, बाहर से हवा लेने की कोशिश नहीं करते हैं, तब तक वह जिंदा रह सकते हैं और इस प्रक्रिया में लगभग कुल 15 सेकेंड का समय मिलता है। लेकिन बाहर से ऑक्‍सीजन न मिल पाने के कारण उनका दम घुटने लगता है और मर जाते हैं। न ही वह चटकते हैं और फटते हैं।

चमकदार तारा -
 

चमकदार तारा -

पोलारिस, रात में उत्‍तरी गोलार्द्ध का सबसे चमकदार तारा है।

विज्ञान का तर्क : विज्ञान के तर्क के अनुसार, साइरिस, पोलारिस से ज्‍यादा चमकदार तारा है। इसका मैग्‍नीट्यूड, 1.47 है जबकि पोलारिस का 1.97 है। बस उत्‍तर में इसकी स्थिति होने के कारण यह ज्‍यादा चमकदार प्रतीत होता है।

मिथक नम्‍बर - 4 :

मिथक नम्‍बर - 4 :

ऐसा माना जाता है कि जमीन या फर्श पर गिरी चीज को 5 सेंकेड के भीतर उठा लेने पर उसमें कीटाणु या गंदगी नहीं जाती है।

विज्ञान का तर्क : ऐसा बिलकुल नहीं है। फर्श पर चीज गिरते ही उस पर जमीन के कीटाणु आदि चिपक ही जाते हैं। लेकिन याद रखें कि हर कीटाणु बुरा भी नहीं होता है, कुछ कीटाणुओं के शरीर में पहुँचने से इम्‍यूनिटी भी स्‍ट्रांग होती है।

मिथक नम्‍बर - 5:

मिथक नम्‍बर - 5:

चंद्रमा की कोई डार्क साइड भी है।

विज्ञान का तर्क: ऐसा कई बार माना जाता है कि चंद्रमा की कोई डार्क साइड भी है। लेकिन वैज्ञानिकों का कहना है कि चंद्रमा का हर हिस्‍सा, कभी न कभी सूर्य की रोशनी को पाकर चमकता ही है।

मिथक नम्‍बर - 6:

मिथक नम्‍बर - 6:

ऐसा माना जाता है कि ब्रेन की कोशिकाएं कभी सही नहीं होती या दुबारा अपने आप ठीक नहीं होती है।

विज्ञान का तर्क: साइंस में कई सालों तक ये मिथक सही माना गया था। लेकिन कुछ ही वर्षों पहले यह साबित हो चुका है कि दिमाग की कोशिकाओं में चोट आदि होने पर उनके दुबारा ठीक होने के आसार होते हैं। वो एकदम से बेकार नहीं हो जाती है।

मिथक नम्‍बर - 7:

मिथक नम्‍बर - 7:

कई बार आपने सुना होगा कि काफी ऊंचाई से गिराए गए सिक्‍के से नीचे जा रहे किसी व्‍यक्ति की जान तक जा सकती है।

विज्ञान का तर्क : यह गलत है। ऊंचाई से गिराए गए सिक्‍के की बेशक गति ज्‍यादा होगी लेकिन उससे किसी की जान चली जाना असंभव है, चोट लग सकती है।

मिथक नम्‍बर - 8:

मिथक नम्‍बर - 8:

वातावरण में प्रवेश करते ही उल्‍का घर्षण के कारण गर्म हो जाते हैं।

विज्ञान का तर्क: यह गलत है। उल्‍का जब वातावरण में प्रवेश करते हैं तो वे इतनी तेजी से आते हैं कि पर्यावरण में प्रवेश करते ही अपनी गति के कारण वह गर्म हो जाते हैं न कि घर्षण के कारण। वास्‍तव में उल्‍का, बहुत ठंडे होते हैं। जब ये टूटते हैं तो ये बहुत ठंडे होते हैं।

मिथक नम्‍बर - 9:

मिथक नम्‍बर - 9:

एक ही जगह पर दो पर आकाशीय बिजली नहीं गिरती है।

विज्ञान का तर्क: एक ही स्‍थान पर एक बार क्‍या कई बार आकाशीय बिजली गिर सकती है। बल्कि वास्‍तविकता मिथक के विपरीत है। बिजली कुछ विशेष जगह जैसे- चमकीला स्‍थान, पेड़, लोहे या टिन आदि पर ही गिरती है और एक बार नहीं कई बार गिर सकती है।

मिथक नम्‍बर - 10:

मिथक नम्‍बर - 10:

हम सभी मानते हैं कि अंतरिक्ष में गुरूत्‍व नहीं होता है।

विज्ञान का तर्क: विज्ञान की मानें तो ब्रहमांड की हर जगह गुरूत्‍व होता है। बस हर ग्रह पर इसका मान अलग-अलग होता है जिसकी वजह से कुछ ग्रह पर पैर नीचे टिकते नहीं है और कुछ पर टिक जाते हैं।

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English summary
There is nothing better than a bit of mythbusting, so here we are again, presenting you with a new list of terribly common misconceptions and myths this time about science.

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