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जानिए भारतीय अन्तरिक्ष एजेंसी इसरो के ये 20 अनसुने राज़!

By Super

इंदिरा गांधी स्पेस अनुसंधान संगठन (इसरो) हमारे देश का महत्वपूर्ण अंग है। यह देश की ओर से होने वाले अंतरिक्ष अनुसंधान की दिशा में कार्य करता है। जानते हैं, इससे जुड़ी 20 बातें जिन पर आपको गर्व होगा।

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इसरो की स्थापना डॉ। विक्रम साराभाई द्वारा 1969 में स्वतंत्रता दिवस के मौके पर की गई थी। डॉ। साराभाई को भारतीय स्पेस प्रोग्राम का जनक कहा जाता है।

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भारत का पहला स्वदेशी उपग्रह एसएलवी-3 था, जिसे 18 जुलाई 1980 को लॉन्च किया गया था। इस प्रोजेक्ट के डायरेक्टर पूर्व राष्ट्रपति श्री अब्दुल कलाम थे। इस लॉन्चर के माध्यम से रोहिणी उपग्रह को कक्षा में स्थापित किया गया।

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इसरो का 40 का खर्च नासा के एक साल के खर्च से आधा है। आपको जानकर हैरत होगी, लेकिन ये सच है।

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इसरो का बजट वर्तमान में केंद्र सरकार के खर्च का मात्र 0.34 प्रतिशत है। जो सकल घरेलु उत्पाद का 0.08 प्रतिशत है।

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इसरो द्वारा भुवन को विकसित किया गया है, जो वेब आधारित 3D सेटेलाइट इमेजरी टूल है। जिसे गूगल अर्थ का भारतीय अवतार कहा जाता है।

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पूरे भारत में इसरो के 13 सेंटर हैं। इसरो अंतरिक्ष में मानव मिशन भेजने की दिशा में भी काम कर रहा है। इसके लिए ऐसा यान बनाया जा रहा है जिसमें अंतरिक्ष यात्रियों को सात दिन तक पृथ्वी की कक्षा में रखने की क्षमता होगी।

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बजट को देखकर आपको लग सकता है कि ये बहुत छोटा है। लेकिन पिछले वर्ष इसका टर्नओवर 14 बिलियन रुपये था।

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आप इसरो से सैटेलाइट डेटा भी खरीद सकते हैं। इसके लिए प्राइस लिस्ट के अनुसार पैसे चुकाने होंगे। इसरो का चंद्रयान-1 का बजट 390 करोड़ रुपये था, जो नासा से 8-9 गुना कम है।

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सैटेलाइट लॉन्च करने के अलावा इसरो बैंगलोर सेंटर पर ऑर्बिटल व्हीकल भी विकसित कर रहा है, जो 2017 के अंत में पूरा होने की संभावना है।

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यह इसरो की कमर्शियल डिविजन है, जो स्पेस तकनीक को अन्य देशों तक पहुंचाती है।

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एंट्रिक्स के बोर्ड ऑफ़ डायरेक्टर में देश के दो सबसे बड़े उद्योगपति रतन टाटा और जमशेद गोदरेज हैं।

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इसरो के मंगल मिशन बहुत सस्ता है, जिसका बजट 450 करोड़ रुपए है, मतलब एक किमी का 12 रूपये। मंगलयान में चंद्रयान तकनीक का इस्तेमाल किया गया था।

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भारत ऐसा पहला देश है, जो पहले ही प्रयास में मंगल तक पहुंचा। यह कारनामा इसरो ने ही किया।

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जी हाँ, इसरो में कई ऐसे वैज्ञानिक हुए जिन्होंने अपना पूरा जीवन संगठन को समर्पित कर दिया। उन्होंने कभी विवाह नहीं किया।

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काफी समय पहले मंगल मिशन के दौरान भारतीय वैज्ञानिकों से पूछा गया कि उन्होंने इसकी तैयारी और विधि कहाँ से ली। उन्होंने कहा कि संगठन ने सबकुछ अपनी दम पर विकसित किया है।

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इसरो दुनिया की उन 6 स्पेस एजेंसियों में शामिल है, जिसमें अपनी जमीन से सैटेलाइट बनाने और लॉन्च करने की क्षमता है।

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इसरो ने अब तक 23 पीएसएलवी सफलतापूर्वक लॉन्च किए हैं।

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देश की 65 सैटेलाइट को लॉन्च करने के अलावा इसरो ने 29 विदेशी सैटेलाइट को भी लॉन्च किया है।

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पाकिस्तान की स्पेस एजेंसी सुपार्को, इसरो से 8 साल पहले शुरू हुई थी। लेकिन यह अब तक महज दो सैटेलाइट ही लॉन्च कर पाई है, वो भी विदेशी सहयोग से।

#20

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1981 में एपल की सैटेलाइट बैलगाड़ी से ढोई गई थी।

 
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