फिल्मों में होने वाली मौत, असल में है एक झूठ!
हॉलीवुड हो या बॉलीवुड; मौत को इतने सुपर अंदाज में दिखाया जाता है कि कई बार आपका दिमाग घूम जाता है और आप अपनी तरफ से कुछ सोचने की हालत में नहीं रह जाते हैं। स्टोरी को इस तरह बनाया जाता है कि कभी भी हीरो या विलेन मर जाता है और कभी भी जिंदा हो जाता है।

मरने के तरीके से याद आया कि फिल्मों में मरने के तरीके भी काफी अनोखे दिखाये जाते हैं जिन पर साइंस का मानना है कि ऐसा हर होना संभव नहीं होता है। लेकिन लम्बे समय से मरने के तरीके इसी तरीके से दिखाएं जा रहे हैं कि अब हमें भी ये तरीके सच ही लगते हैं और हम बिना दिमाग लड़ाए फिल्म का मजा लेते रहते हैं।
आइए जानते हैं कि फिल्मों में मरने के दिखाये जाने वाले कौन से तरीके गलत हैं:

1. लावा में गिरना -
भूतिया फिल्मों में अक्सर क्लामेक्स में लावा में गिरते हुए दिखाया जाता है और भूत या इंसान; मर जाता है। लेकिन विज्ञान के मुताबित ये गलत है। लावा का तापमान इतना ज्यादा होता है कि इसके अंदर गिरना असंभव है ऐसे में फिल्मों में मौत का ये पैंतरा गलत है।

2. दम घोंट देना -
विलेन दम घोंट देता है और हीरो 40 मिनट बाद फिर से जिंदा हो जाता है। ये विज्ञान की नज़र में मजाक से ज्यादा कुछ नहीं। किसी भी व्यक्ति का गला दबाने पर 1 मिनट में उसकी ब्रेन सेल्स डेड हो जाती हैं, 3 मिनट में दिमाग की नसों में भारी क्षति पहुँचती है और 10 मिनट में तो बचना मुश्किल हो जाता है।

3. शार्क का निगलना -
कई हॉलीवुड फिल्मों में दिखाया जाता है कि शॉर्क निगल लेती है। जबकि आपको पता होना चाहिए कि शॉर्क बेहद शर्मीली होती है उसे इंसानों से भी शर्म महसूस होती है और इस कारण वह दूर ही रहती है। वह बहुत कम ही आक्रामक होती हैं।

4. ग्रेनेड से मौत -
हथियारों में खास ग्रेनेड, कई प्रकार के होते हैं और इनसे तुरंत मौत होना जरूरी नहीं है। लेकिन फिल्मों में ग्रेनेड फटा नहीं कि हीरो मर जाता है।

5. रेत के दलदल में मरना -
रेतीले दलदल में इंसान फंस जाता है और अंदर घुसता चला जाता है और बाद में मर जाता है। ये कहानी सिर्फ फिल्मों में सच होती है, वास्तव में रेत के दलदल में कोई फंस सकता है और बाहर निकलने में दिक्कत हो सकती है लेकिन तुरंत मरता कोई नहीं।


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