नेत्रहीन लड़का आईआईटी से हुआ रिजेक्ट, आज है 50 करोड़ की कंपनी का मालिक
वो बचपन से ही देख नहीं सकता था, अँधा पैदा हुआ था। उसे स्कूल व कॉलेज में बैठने से भी मना किया गया। कई नामी कॉलेज ने मार्क्स अच्छे होने के बाद भी उसे रिजेक्ट किया। लेकिन वो आज 50 करोड़ की कंपनी का मालिक है। ये कहानी है 24 साल के श्रीकांत बोला की, जो आन्ध्र प्रदेश से है, नेत्रहीन है लेकिन हुनर की जो रोशनी उसके पास है उससे वो पूरी दुनिया को रोशन कर सकता है।
देश भले ही हर क्षेत्र में तरक्की कर रहा है लेकिन कई बातों में समाज आज भी पिछड़ा हुआ है। इन्हीं में से एक है विकलांगता। हमारा समाज विकलांग बच्चों व व्यक्तियों से साथ जिस तरह का भेद-भाव करता है वह निंदनीय है। श्रीकांत बोला ने भी उम्रभर यह सब सहा है, केवल इसीलिए क्योंकि वह जन्म से नेत्रहीन हैं। हालांकि इतनी मुसीबतों, परेशानियों के बाद आज श्रीकांत ने अपने हुनर का लोहा मनवा लिया है।
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स्कूल में श्रीकांत काफी भेद-भाव झेलना पड़ा। नेत्रहीन होने के कारण उसे अनदेखा किया जाता था। वह लास्ट बेंच पर बैठने पर मजबूर था।
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इन सब के बावजूद भी श्रीकांत ने दसवीं कक्षा में 90 प्रतिशत अंक हासिल किए। लेकिन स्कूल में फिर भी उसे साइंस नहीं लेने दी गई।
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यह समस्या श्रीकांत की लाइफ में बढ़ती ही जा रही थी। इसके बाद उसने राज्य सरकार से इसके लिए लड़ाई की जो कि उसक हक में रही।
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समस्याओं का अंत वहीं पर नहीं हुआ, इसके बाद श्रीकांत को देश में प्रतियोगी परीक्षाओं में भी भाग नहीं लेने दिया गया। तभी श्रीकांत को एमआईटी में दाखिला मिला।
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और 2012 में श्रीकांत ने अपनी कंपनी 'बोल्लांत इंडस्ट्रीज' लॉन्च की।
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श्रीकांत ने लीड इंडिया प्रोजेक्ट के दौरान एपीजे अब्दुल कलाम के साथ भी काम किया है।
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अपनी स्ट्रगल भरी इस लाइफ में श्रीकांत जिस क्वालिटी को सबसे ज्यादा मानते हैं वह है 'कम्पैशन'।
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श्रीकांत की कंपनी का टर्नओवर 10 करोड़ रुपए है।
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हेदराबाद बेस्ड इस कंपनी में प्राकृतिक पत्तियों और रीसाइकल्ड पेपर से एको फ्रेंडली रीसायक्लेबल चीजें बनाई जाती हैं।
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श्रीकांत की इस कंपनी में करीब 60 प्रतिशत लोग फिजिकली चैलेंज्ड हैं।
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