मोबाइल फोन के बारे में 5 मिथ जिन्हें आप सच मानते थे
मोबाइल फोन को लेकर हम कई सारी बाते सुनते रहते हैं, जिनमें से सबसे ज्यादा पॉपुलर है, ज्यादा मोबाइल फोन यूज करने से कैंसर हो जाता है या फिर मोबाइल फोन गैस और पेट्रोल स्टेशन के पास यूज करने से ब्लास्ट हो जाता है। लेकिन क्या वे सभी सच हैं? आइए नज़र डालते हैं उन 5 आम टेक मिथ पर जिन्हें आप सच मानते थे।

मिथक 1: चार्जिंग के लिए फोन को रात भर लगा रहने देना बैटरी को नुकसान पहुंचाता है।
सच्चाई: आजकल के लेटेस्ट टेक्नालॉजी वाले स्मार्टफोन में लिथियम-आयन बैटरी होती हैं जो चार्ज होने पर एक्स्ट्रा करंट लेना बंद कर देती हैं इसलिए, फोन को रात भर चार्ज पर लगा रहने देना बैटरी को नुकसान नहीं पहुंचाता।
मिथक 2: थर्ड-पार्टी चार्जर का उपयोग करने से फोन खराब हो सकता है।
सच्चाई: जब तक आप एक अच्छी क्वालिटी वाला थर्ड-पार्टी चार्जर इस्तेमाल कर रहे हैं, यह आपके डिवाइस को नुकसान नहीं पहुंचाएगा। हालांकि, घटिया या लोकल चार्जर यूज करने पर आपकी डिवाइस को नुकसान पहुंच सकता है।
मिथक 3: मोबाइल फोन का प्रयोग करने से गैस स्टेशन पर विस्फोट हो सकता है
सच्चाई: ऐसा कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है जिससे इस बात की पुष्टी की जा सके कि मोबाइल फोन गैस स्टेशनों पर विस्फोट का कारण बनते हैं। ज्यादातर गैस स्टेशन में 'मोबाइल न चलाने' के निर्देश सिर्फ सावधानी के रूप में होते हैं।
मिथक 4: स्मार्टफोन का उपयोग करना कैंसर का कारण बन सकता है।
सच्चाई: अब तक की रिसर्च में मोबाइल फोन के उपयोग और कैंसर के खतरे के बीच कोई संबंध स्थापित नहीं किया गया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि अभी तक जो भी सबूत मिले हैं उससे सेहत पर किसी भी तरह का प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ा है।
मिथक 5: एयरप्लेन मोड में फोन का उपयोग करना विमान के नेविगेशन सिस्टम को प्रभावित करता है।
सच्चाई: लेटेस्ट फ्लाइट उपकरण बाहरी हस्तक्षेप के लिए पूरी तरह से सुरक्षित हैं। प्लेन में एयरप्लेन मोड को सुरक्षा के नजरिए से ऑन करने के लिए कहा जाता है।
तो, यह थे कुछ ऐसे मिथ जो एक बार में सच लगते थे लेकिन वास्तव में हैं नहीं। जैसे-जैसे तकनीक विकसित हो रही है, कई पुरानी मान्यताएं भी बदल रही हैं। यह जरूरी है कि नई जानकारी के साथ अपडेट रहें और अफवाहों तथा गलत सूचनाओं पर विश्वास न करें।


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