ब्‍लैकबेरी सेवाएं फिर से हुईं शुरू

Posted By: Staff

ब्‍लैकबेरी सेवाएं फिर से हुईं शुरू

1999 में रिसर्च इन मोशन ने जब अपना पहला ब्‍लैकबेरी फोन लांच किया था तो सोंचा भी न होगा भविष्‍य में उसे बड़ी तकनीकी चुनौतियो का सामना करना पड़ेगा। धीरे-धीरे यह उद्योगपति, व्यापारियों और प्रोफेशनल व्यक्तियों के लिए एक स्‍टेटस सिंबल बन गया और आज इसकी पहुंच आम आदमी तक हो गई है।

सोमवार को कई देशों के ब्‍लैकबेरी उपभोक्‍ताओं को फोन में नेट सर्फिंग और मैसेजिंग सेवा में दिक्‍कत का सामना करना पड़ा था, ज्‍यादातर यह समस्‍या यूरोप, पश्चिम एशिया,अफ्रीका, भारत, ब्राजील, चिली और अर्जेंटीना के उपभोक्ताओं को ब्‍लैकबेरी मैसेजिंग और पेड सर्फिंग सेवाओं में आ रही थी मगर अंतत तीन दिन बाद ब्‍लैकबेरी की सभी सेवाओं ने सुचारू रूप से काम करना शुरू कर दिया।

रिम के मुख्य सूचना अधिकारी रॉबिन बियेंफेट ने जानकारी दी के ब्‍लैकबेरी की सभी सेवाओं में आ रही दिक्‍कतों को दूर कर दिया गया है । भारत में ब्‍लैकबेरी के करीब 10 लाख फोन उपभोक्‍ता है जो ब्‍लैकबेरी की ईमेल और एसएमएस सेवाओं का प्रयोग करते हैं।

कैसे काम करती है ब्‍लैकबेरी सेवा

भारत के अलावा विश्‍व के कई देशों में ब्‍लैकबेरी एसएमएस और ईमेल सेवा प्रदान करती है, भारत में ब्‍लैकबेरी की ईमेल सेवा को लेकर काफी विवाद चल रहा है। आम फोन से प्रेषित संदेशों के मुकाबले ब्‍लैकबेरी फोन से प्रेषित मैसेज और ईमेल को कोई भी बीच में पढ़ नहीं सकता। असल में ब्‍लैकबेरी द्वारा प्रेषित संदेश पूरी तरह से इंस्क्रीपटेड होते हैं जिन्‍हें भारत की सुरक्षा एंजेसियों के अलावा कोई भी सेंकड पार्टी पढ़ नहीं सकती।

Please Wait while comments are loading...
नए साल पर किया गया ये छोटा सा काम, देगा साल भर की खुशियां
नए साल पर किया गया ये छोटा सा काम, देगा साल भर की खुशियां
अध्यक्ष बनते वक्त भावुक हुए राहुल गांधी, चूमा मां सोनिया गांधी का माथा
अध्यक्ष बनते वक्त भावुक हुए राहुल गांधी, चूमा मां सोनिया गांधी का माथा
Opinion Poll

Social Counting

पाइए टेक्नालॉजी की दुनिया से जुड़े ताजा अपडेट - Hindi Gizbot