मोबाइल फोन की वे तकनीकें जो धीरे-धीरे खत्म हो गईं

टच स्क्रीन (Touch screens)
1990 के दौर में रजिस्टिव टच स्क्रीन का जमाना रहा लेकिन तभी पहली बार एप्पल ने कैपेसिटिव टच स्क्रीन से लैस आईफोन लांच किया था जो कैपेसेटिव टच स्क्रीन वाला पहला मोबाइल फोन था। कैपेसेटिव टच स्क्रीन में स्क्रीन की लेयर में हल्का सा इलेक्ट्रिक चार्ज रहता है जैसे ही आप स्क्रीन में कहीं भी टच करते हैं वहां पर हल्का का इलेक्ट्रिक चार्ज और बढ़ जाता है। फोन में लगे सेंसर टच की पहचान करके रिस्पांस करते हैं। वहीं रजिस्टिव टच स्क्रीन में ग्लास की लेयर होती है जिसमें से एक में इलेक्टिक फ्लो होती रहती है जैसे ही आप स्क्रीन को टच करते हैं वहां पर वह करेंट फ्लो ब्रेक हो जाता है। रजिस्टिव टच स्क्रीन मल्टी टच की सुविधा नहीं होती जबकि कैपेसिटिव टच स्क्रीन में मल्टीटच की सुविधा दी जा सकती है।
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