Sanchar Saathi ऐप को लेकर 24 घंटे में बड़ा U-टर्न, अब सरकार ने साफ किया, चाहें तो डिलीट कर दें ऐप
Sanchar Saathi ऐप को लेकर पिछले 24 घंटे में जो माहौल बना, वह अब काफी बदल चुका है। शुरुआत में विवाद इस बात से बढ़ा कि यह सरकारी ऐप सभी नए स्मार्टफोनों में अनिवार्य रूप से प्री-इंस्टॉल किया जाएगा और इसे हटाया नहीं जा सकेगा।
अब केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने स्थिति साफ कर दी है। इस बयान के बाद उन करोड़ों यूज़र्स को राहत मिली है, जो इसे प्राइवेसी के लिए खतरा मान रहे थे।

नहीं चाहिए तो डिलीट कर दें ऐप
ANI से बात करते हुए सिंधिया ने बहुत साफ शब्दों में कहा कि सरकार की जिम्मेदारी सिर्फ ऐप के बारे में जानकारी देना है। इसके बाद लोग चाहें तो इसका इस्तेमाल करें, और यदि नहीं करना हो तो इसे फोन से डिलीट कर सकते हैं।
यही सबसे बड़ा पॉइंट है, क्योंकि शुरुआती रिपोर्ट्स में कहा गया था कि Sanchar Saathi एक सिस्टम ऐप की तरह होगा जिसे हटाया नहीं जा सकेगा। इस वजह से सोशल मीडिया पर विरोध शुरू हो गया था और कई विशेषज्ञ इसे सरकारी "फोर्स्ड ऐप इंस्टॉलेशन" बता रहे थे।
आखिर क्या है Sanchar Saathi ऐप?
Sanchar Saathi कोई नया ऐप नहीं है। इसे 2023 में लॉन्च किया गया था और अभी तक लाखों लोग इसका इस्तेमाल कर चुके हैं। इसके जरिये यूजर बहुत कुछ कर सकते हैं। यहां हम कुछ प्वॉइंट के बारे में जानते है।
- चोरी या खोए हुए फोन को ब्लॉक या ट्रैक कर सकते हैं।
- अपने नाम पर कितनी सिम चल रही हैं, यह चेक कर सकते हैं।
- फर्जी कॉल्स, फ्रॉड मैसेज और स्पैम रिपोर्ट कर सकते हैं।
- किसी सेकंड-हैंड फोन का IMEI नंबर असली है या नहीं, यह वेरिफाई कर सकते हैं।
सरकारी डेटा के मुताबिक, अब तक 26 लाख से ज्यादा चोरी या खोए फोन इसी सिस्टम के जरिए ट्रैक किए जा चुके हैं। यही कारण है कि सरकार इस ऐप को लोगों तक और ज्यादा पहुंचाना चाहती है।
विवाद क्यों बढ़ा?
मुद्दा ऐप के फ़ायदों का नहीं था, बल्कि इसे अनिवार्य बनाने को लेकर था। विपक्षी पार्टियों ने इसे प्राइवेसी उल्लंघन बताया। कांग्रेस सांसद रेणुका चौधरी ने संसद में कार्य स्थगन प्रस्ताव तक दे दिया। शशि थरूर ने भी कहा कि लोकतंत्र में किसी ऐप को जबरन लागू करने से पहले सार्वजनिक बहस और स्पष्टीकरण ज़रूरी है।
सरकार का बचाव: साइबर सुरक्षा पहले
बीजेपी नेताओं ने इसे उचित कदम बताया। उनका कहना है कि बढ़ते साइबर फ्रॉड और फेक IMEI मामलों को देखते हुए डिजिटल सुरक्षा मजबूत करना जरूरी है।
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि विपक्ष इस मुद्दे को बेवजह विवाद बना रहा है और सत्र को बाधित कर रहा है।
आपके लिए इसका मतलब क्या है?
साधारण मोबाइल यूज़र के लिए सबसे बड़ी राहत यही है कि ऐप भले ही प्री-इंस्टॉल आए, लेकिन आप इसे डिलीट कर सकेंगे। इसी बात ने पहले दिन सबसे ज्यादा चिंता पैदा की थी।
अब सवाल यह है कि स्मार्टफोन कंपनियां इसे कैसे लागू करेंगी। पहले दिए गए निर्देशों में "अनिवार्य प्रीलोडिंग" की बात थी, लेकिन अब Apple, Samsung, Xiaomi, Vivo और अन्य ब्रांडों की तरफ से स्पष्ट पॉलिसी आनी बाकी है। आने वाले दिनों में इस पर और अपडेट मिलने की उम्मीद है।
फिलहाल इतना साफ है कि विवाद ने सरकार को अपनी बात स्पष्ट करने पर मजबूर किया, और यूज़र्स की सबसे बड़ी परेशानी "जबरन ऐप इंस्टॉल" अब खत्म होती दिख रही है।


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