आंखों और नींद पर मोबाइल का प्रभाव

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कई बार आपने बड़े लोगों को कहते हुए सुना होगा कि रात में मोाबइल मत चलाओ, आंखें खराब हो जाएगी।

आंखों और नींद पर मोबाइल का प्रभाव

लेकिन क्‍या वाकई में ऐसा होता है। रात में मोबाइल चलाने से आंखों और नींद पर कितना दुष्‍प्रभाव पड़ता है इसके बारे में जानने के लिए इस आर्टिकल को ध्‍यान से पढें।

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सोने-जागने पर कोई प्रभाव नहीं

आपकी जानाकरी के लिए बता दें कि मोबाइल के चलाने से सोन या जागने के चक्र पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है।

स्‍लीप पैरामीटर में कोई फर्क नहीं

मोबाइल के चलाने से इंसान के सोने के पैरामीटर में कोई फर्क नहीं पड़ता है। यह सर्वे, रात को मोबाइल चलाने वालों से पूछकर किया गया, जिसमें उन्‍होंने नींद से सम्‍बंधित किसी भी समस्‍या के लिए मोबाइल को कारण नहीं बताया।

नींद में कमी

हमारे शरीर में मेलाटोनिन नामक हारमोन होता है जो नींद के लिए जिम्‍मेदार होता है। मोबाइल के इस्‍तेमाल से यह शरीर में कम नहीं बनता है बल्कि सामान्‍य ही बनता है।

मेलाटोनिन की कमी, कैंसर का कारण

एक अध्‍ययन से मालूम चला है कि मेलाटोनिन की कमी से शरीर में कैंसर सेल्‍स के एक्टिव होने का खतरा बहुत ज्‍यादा रहता है।

मेलाटोनिन की कमी से होता है डिप्रेशन

अगर शरीर में नींद के हारमोन की कमी हो जाती है तो इससे डिप्रेशन होने का खतरा बहुत बढ़ जाता है।

आंखों को नुकसान

रात में मोबाइल से जो रोशनी निकलती है उसकी ब्राइटनेस को बहुत धीमा करने से आंखों पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए, रात में मोबाइल चलाना हो, तो कोई लाइट ऑन रखें।


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English summary
A recent study has proved that using your smartphone at night before sleep is no more a problem as it is not linked to causing any disorder as it was believed to. Take a look!
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