स्मार्टफोन नहीं ये है स्मार्ट केस, बन जाता है फोन की स्क्रीन!
तकनीक की दुनिया में लगातार नए बदलाव होते रहते हैं हर साल हमारे सामने कुछ ऐसी लेटेस्ट टेक्नोलॉजी आती है, जिसे देखकर हम चौंक जाते हैं। किसी जमाने में एक दूसरे को देख कर बात करने की थ्योरी भी कोरी कल्पना मालूम होती थी। लेकिन ये कल्पना भी सही साबित हुई इसके आगे भी काफी कुछ हो चुका है। फोन अब स्मार्ट हो चुका है, जो किसी कंप्यूटर की तरह काम करता है। यही नहीं इन स्मार्टफोन में ऐसी-ऐसी तकनीक का इस्तेमाल किया जाने लगा है, जिनके लिए कभी बड़ी-बड़ी मशीनों की जरूरत होती थी। जैसे अब हार्टबीट रेट को स्मार्टफोन में दिए जाने वाले सेंसर की मदद से जाना जा सकता है स्मार्टफोन से आप अपने होम एप्लायेंसेस को कनेक्ट करके उन्हें आंशिक रूप से ऑपरेट कर सकते हैं।
यही नहीं आप चाहें तो और भी कई सारे काम महज इस छोटे से डिवाइस से कर सकते हैं। खैर यहाँ हम तकनीक के इतिहास की बात नहीं करेंगे। अच्छा किसी ऐसे स्मार्टफोन केस के बारे में सोचिए जो किसी सेकेंड्री टचस्क्रीन की तरह काम करता हो। ये सुनकर हैरत में पड़ गए ना आप लेकिन आपको हैरत में पड़ने की बिलकुल जरूरत नहीं, क्योंकि ये सच है। माइक्रोसॉफ्ट और ऑस्ट्रेलियाई रिसर्चर ने एक ऐसा "फिक्सकेस" डेवलप किया है, जो एक प्रोटोटाइप स्मार्टफोन है। यह सेकेंड्री ई-लिंक डिस्प्ले की तरह काम करता है। माइक्रोसॉफ्ट और अपर ऑस्ट्रेलिया की यूनिवर्सिटी ऑफ़ एप्लाइड साइंस ने मिलकर एक ऐसा डिवाइस क्रियेट किया है, जो मोबाइल डिवाइस के लिए एक्सटेंडेड टच स्क्रीन की तरह काम करता है और डिवाइस को पॉवर कर सकता है।
#1
स्मार्टफोन केस प्रोटोटाइप की एक नहीं कई खूबियाँ हैं। मेन डिस्प्ले को कंट्रोल करने के लिए इस डिवाइस को फ्लेक्स, टैप और ट्विस्ट भी किया जा सकता है यह "फ्लेक्सकेस" योटाफोन की तरह ही काम करता है। यह साल 2013 में लॉन्च किया गया विश्व का पहला दो स्क्रीन वाला स्मार्टफोन था इस फोन में पीछे की ओर एक ई-लिंक डिस्प्ले तथा फ्रंट साइड में रेगुलर एलसीडी फ्रंट स्क्रीन दी गई थी।
#2
फ्लेक्सकेस महज एक एक्सटेंडेड केस नहीं बल्कि यह कई सारे काम भी करता है। इसका इस्तेमाल एक्सटेंडेड विजुअल क्लिपबोर्ड के जैसे किया जा सकता है, जिससे सर्चिंग और टाइपिंग करना आसान हो जाता है। इससे पेजेस को आसानी से फ्लिप तथा ज़ूम इन या ज़ूम आउट किया जा सकता है।
#3
प्रतिदिन होने वाले मोशन से काफी एनर्जी इलेक्ट्रीसिटी में कन्वर्ट की जा सकती है। पीजोइलेक्ट्रिक इफेक्ट (पुश या पुल) का उपयोग इलेक्ट्रोनिक फ्रीक्वेंसी जेनरेशन, डिटेक्शन और प्रोडक्शन ऑफ़ साउंड में किया जा सकता है।
#4
फ्लेक्सकेस प्रोटोटाइप पर भी ऊपर बताया गया सिद्धांत लागू होता है। डिवाइस को पॉवर देने के लिए यह पीजोइलेक्ट्रीसिटी करंट का उपयोग करता है। कवर को टैप, ट्विस्ट, स्ट्रेच, कम्प्रेस करने से उत्पन्न होने वाली एनर्जी से डिवाइस को चार्ज करने के लिए इलेक्ट्रिकल चार्ज जेनरेट होता है।
#5
फ्लेक्सकेस मई में लॉन्च हो सकता है। रिपोर्ट्स की मानें तो "कंप्यूटर-ह्यूमन इंटरेक्शन कांफ्रेंस" में कैलिफोर्निया यह डिवाइस लॉन्च किया जाएगा।
#6
देखें ये विडियो!
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