भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) द्वारा मोबाइल संदेशों की संख्या पर लगाए गए प्रतिबंध के कारण बधिर लोगों को काफी दिक्कतें हो रही हैं और उनका मानना है कि ऐसा कर उन्हें संचार के एक सशक्त माध्यम से वंचित किया जा रहा है। बधिरों के लिए 100 एसएमएस का नियम असुविधा पैदा कर रहा है मैसेज पर लगा प्रतिबंध अवांछित फोन और संदेशों पर लगाम कसने की कार्रवाई के तहत ट्राई ने हाल में ही एक दिन में भेजे जाने वाले मोबाइल संदेशों की संख्या को 100 तक सीमित कर दिया है।
व्यवसाय जगत से जुड़े लोग और छात्र-छात्राएं ट्राई के इस कदम पर काफी हल्ला मचा चुके है। ट्राई के इस निर्णय से उन बधिर छात्र और छात्राओं को संवाद करने में दिक्कत हो रही है जो घर-परिवार से दूर रहकर बाहर पढ़ाई करते हैं। चेन्नई में ग्यारहवीं कक्षा में पढ़ने वाली छात्रा देवप्रण सरकार कहती हैं कि यह प्रतिबंध अनावश्यक रूप से उनके संचार को बाधित कर रहा है।
हालांकि, ऐसी मांगें की जा चुकी है कि बधिरों को इस निर्णय से अलग रखा जाए लेकिन सरकार इससे सहमत नहीं हैं। वह कहती हैं, यह मूर्खतापूर्ण और अनाश्वयक मालूम पड़ता है। मैं यह नहीं कह रही हूं कि केवल बधिरों को ही इस निर्णय से अलग रखा जाए। अगर मेरे दोस्त सौ से ज्यादा संदेश नहीं भेज सकते हैं तो फिर मेरे पास सौ से ज्यादा संदेश भेजने की सुविधा होने का क्या फायदा है।