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अपने देश में क्‍यों नहीं चल पाए भारतीय स्‍मार्टफोन ब्रांड

By Roith

एक समय था जब भारतीय बाजार में स्वदेशी स्मार्टफोन मैन्‍यूफैक्‍चर कंपनियों का बोलबाला था। माइक्रोमैक्स, लावा और कार्बन जैसे नाम विदेशी ब्रांडों से टक्‍कर लेते थे। हालांकि, धीरे-धीरे ये कंपनियां बाजार से गायब होती चली गईं और विदेशी दिग्गजों जैसे शाओमी, वीवो, ओप्‍पो ने फिर से स्मार्टफोन बाजार पर कब्जा कर लिया। आज हम बात करेंगे आखिर ऐसे क्‍या कारण रहे जिनकी वजह से भारतीय स्‍मार्टफोन कंपनियां इन विदेशी ब्रांड के सामने टिक न सकी।

भारतीय स्‍मार्टफोन ब्रांड अपने देश में क्‍यों हो गए फेल

कम कीमत, गुणवत्ता की कमी

भारतीय ब्रांडों ने अपना ध्यान सस्ते स्मार्टफोन बेचने पर फोकस किया था। हालाकि इससे उन्हें शुरुआत में कुछ सफलता भी मिली, लेकिन बाद में यह उनकी सबसे बड़ी कमजोरी साबित हुई। सस्ते स्मार्टफोन बनाने के लिए, इन कंपनियों ने क्‍वालिटी से समझौता किया और कम पॉवरफुल हार्डवेयर और सॉफ़्टवेयर का उपयोग किया। इससे नए स्‍मार्टफोन यूजर्स का ध्‍यान विदेशी ब्रांडों की तरफ खिचता चला गया जो कम दाम में बेहतर हार्डवेयर सपोर्ट दे रहे थे।

इनोवेशन की कमी

भारतीय ब्रांडों ने इनोवेशन को नजरअंदाज कर दिया साथ ही बेहतर फीचर्स और डिजाइन निकालने में विफल रहे। वे चीनी कंपनियों द्वारा बनाए गए लेटेस्‍ट डिज़ाइन और इनोवेशन के स्‍मार्टफोन से टक्‍कर लेने में सक्षम नहीं थे। उदाहरण के लिए, इन भारतीय कंपनियों ने फ्लैगशिप-ग्रेड स्मार्टफोन लॉन्च करने में देरी कर दी, जबकि चीनी ब्रांडों ने बेहतरीन स्पेक्सिफिकेशन और कम कीमतों पर उन्हें लांच कर दिया।

मार्केटिंग और डिस्‍ट्रीब्‍यूशन में कमी

अपने प्रतिद्वंद्वियों की तुलना में भारतीय कंपनियों के पास मार्केटिंग और डिस्‍ट्रीब्‍यूशन के लिए कम संसाधन थे। वे अपने उत्पादों को बड़े पैमाने पर बेचने और और उनका प्रचार करने में असमर्थ थे। इसके विपरीत, चीनी और अन्य बड़ी कंपनियों ने भारी बजट के साथ विज्ञापन कैंपेन पर काम किया और एक बड़ा डिस्‍ट्रीब्‍यूशन नेटवर्क बनाया।

टेक्‍निकल हेल्‍प की कमी

कई भारतीय ब्रांड ग्राहकों को अच्‍छी टेक्‍निकल सर्विस देने में विफल रहे। किसी भी प्रोडेक्‍ट के लिए यह एक महत्वपूर्ण पहलू है, खासकर जब प्रोडेक्‍ट ज्‍यादा टेक्‍निकल नैचर का हो। विदेशी कंपनियों द्वारा दी जाने वाली बेहतर सर्विस के कारण भारतीय ब्रांड पीछे रह गए।

आने वाले सालों में भविष्य

हालांकि इस समय भारत में लावा और माइक्रोमैक्‍स दो ही ऐसी भारतीय कंपनियां बची है जिनके स्‍मार्टफोन बाजार में उपलब्‍ध है लेकिन वो भी न के बराबर, लेकिन वे अभी भी सफलता हासिल कर सकते हैं बशर्ते वे गुणवत्ता, इनोवेशन और बेहतर सर्विस पर ध्यान देना होगा। उन्हें अपनी कमजोरियों से सीखना होगा और एक स्मार्ट स्‍ट्रैटजी के साथ बाजार में वापस आना होगा। ऐसा करके ही वे भारतीय बाजार में अपनी पकड़ बना पाएंगे।

 
Best Mobiles in India

English summary
Exploring the reasons behind the failure of Indian smartphone brands in their home market, including lack of innovation, poor quality, weak marketing, and inadequate customer support.
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