10 पुरानी टेक्‍नालॉजी जो आज भी आती हैं याद

By Rahul

    एडवांस टेक्‍नालॉजी सभी के लिए फायदेमंद होती है फिर वो चाहे पुराने ख्‍यालों का हो या फिर नए ख्‍यालों का, लेकिन हमें आज भी वे पुराने दिन याद आते हैं जब भारी भरकम फोन हुआ करते थे और जाते ही क्रिकेट के लिए हम सभी रेडियो में कॉन लगाए ध्‍यान से कंमेंट्री सुना करते थे।

    अब भारी भरकम फोन की जगह टच स्‍क्रीन स्‍मार्टफोनों ने ले ली है। वहीं छोट-छोटे वीडियो गेम्‍स की जगह एक्‍सबॉक्‍स और पीएस3 जैसी डिवाइसों ने ली है।

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    एक जमाना था फ्लिपफोन मार्केट में लोगों का स्‍टेट्स सिंबल हुआ करते थे। लेकिन समय के साथ-साथ लोगों के दिलों से फ्लिपफोन का नशा चला गया। टच स्‍मार्टफोन आने के बाद लोगों के दिमाग से फ्लिफोन का नशा उतर गया।

    आपने अक्‍सर नोकिया फोन से जुड़े कई कार्टून देखें होंगे जैसे नोकिया को हथौड़े की तरह कहीं पर मारा जा रहा है तो कहीं नोकिया से दीवाल में छेद करते हुए दिखाया गया है। एक समय में नोकिया के फोन इतने मजबूत हुआ करते थे कि भले ही उन्‍हें 1 मंजिल से गिरा दीजिए बाद में आप उसे जोड़कर फिर से प्रयोग कर सकते थें।

    विनायल हम सबसे दादा के जमाने में काफी पॉपुलर हुआ करता था, इसमें सीडी की तरह बड़े-बड़े रिकार्ड लगते थे। लेकिन एमपी 3 और डीवीडी आने के बाद इनका अस्‍तित्‍व भी खत्‍म हो गया।

    कीपैड फोन का दौरा काफी दिनों तक रहा इसे बरकरार रखने में ब्‍लैकबेरी जैसी कंपनियों का काफी योगदान रहा। लेकिन टच स्‍क्रीन आने के बाद कीपैड की जगह बड़े स्‍क्रीन साइज ने ले ली।

    पहले के स्‍मार्टफोन में बैटरी लाइफ से जुड़ा कोई सवाल शायद ही हमारे मन में हो लेकिन आजकल के स्‍मार्टफोन में बैटरी लाइफ हमारे लिए काफी मायने रखती है क्‍योंकि अब फोन केवल बात करने के लिए प्रयोग नहीं किए जाते।

    अगर आपको याद तो एक जमाने में सोनी ने इंगेज नाम का फोन बाजार में उतारा था जो खासतौर से गेमिंग यूजर्स के लिए बनाया गया था इसकी देखा देखी मार्केट में कई दूसरे इसी तरह से मिलते जुलते फोन आए। लेकिन ज्‍यादा दिनों तक लोगों ने इन्‍हें पसंद नहीं किया।

    80 के दशक में बड़े-बड़े स्‍पीकर को देखकर हम सभी के मन में ये सवाल बार-बार उठता है कि आखिर इन्‍हें लोग एक जगह से दूसरी जगह कैसे ले जाते थे। आपको जानकार हैरानी होंगी उस समय इन्‍हें चलाने में इतनी बिजली खर्च होती थी जितने में एक छोटे गांव के हर घर को बिजली मिल जाए।

    रोल कैमरे के जमाने में हर एक तस्‍वीर अपने आप में अहमियत रखती थी क्‍योंकि उस समय आप चाहे जैसी तस्‍वीरें क्‍लिक करें उसे मिटाया नहीं जा सकता था। एक रोज में 25 के करीब तस्‍वीरें आती थी। लेकिन अब डिजिटल कैमरों में आप 1000 तस्‍वीरें एक साथ सेव कर सकते हैं।

    आजकल के वीडियो गेम और पहले घरों में खेले जाने वाले खेल में कोई खास अंतर नहीं है बस उनका रूप बदल चुका है। पहले छोट-छोटे कंसोल में हम स्‍कूल बस में बैठकर गेम खेलते थे अब एक्‍स बॉक्‍स, प्‍लेस्‍टेशन जैसी डिवाइसों ने गेमिंग का पूरा नजरिया ही बदल दिया है।


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