फेसबुक मैसेंजर के बारे में फैली हुई हैं ये 5 अफवाहें

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    फेसबुक हाल के कुछ महिनों में अपनी मैसेंजर ऐप को ज्‍यादा से ज्‍यादा पॉपुलर करने के लिए कई प्रयास करने में लगा हुगा है। जिसके चलते कई लोग फेसबुक मैसेंजर को लेकर थोड़ा कंफ्यूज़ होने लगे हैं।

    दिसंबर के महिने में हफिंगटन पोस्‍ट के एक ब्‍लॉग ने इस बात का दावा किया था कि अगर आपको फेसबुक कॉल करनी है तो इसके लिए फोन में मेसेंजर ऐप होनी चाहिए इस खबर को सुनते ही दुनिया भर के लोगों ने फेसबुक मैसेजेंर एप डाउनलोड करना शुरु कर दिया था। लेकिन बाद में फेसबुक ने इसे सिर्फ एक अफवाह कहा। इसी तरह से फेसबुक मैसेंजर को लेकर लोगों के मन में ढेरों अफवाहे हैं आईए जानते हैं कुछ ऐसी ही अफवाहों के बारे में,

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    अफवाह
    अगर आपको अपने दोस्‍तों को मैसेज भेजना है तो इसके लिए फेसबुक मैसेंजर एप्‍लीकेशन होनी चाहिए।
    सच्‍चाई
    अगर आप फेसबुक का प्रयोग अपने एंड्रायड फोन या फिर आईफोन में कर रहे हैं तो आपके पास मैसेंजर ऐप होनी चाहिए लेकिन डेस्‍कटॉप में मैसेज करन के लिए मैसेंजर की कोई आवश्‍यक्‍ता नहीं।

    अफवाह
    फेसबुक मैसेंजर ऐप की टर्म और कंडीशन फेसबुक की टर्म और कंडीशन से थोड़ा अलग है।
    सच्‍चाई
    फेसबुक के सभी नियम व शर्ते सभी मोबाइल ऐप के लिए एक जैसी है फिर वो चाहे मोबाइल कि लिए हों या फिर डेस्‍कटॉप के लिए उसमें कोई भी बदलाव नहीं होता।

    अफवाह
    फेसबुक मसैंजर ऐप आपके फोन के माइक्रोफोन को रिकार्डिंग डिवाइस के तरह प्रयोग करता है यानी ये आपके द्वारा की गई सारी बात रिकार्ड करता है।
    सच्‍चाई
    फेसबुक मैसेंजर में बात करते समय जब आप माइक्रोफोन कनेक्‍ट करते हैं तो वो आपकी परमीशन मांगता है अगर आप परमीशन देते हैं तभी आप अपने दोस्‍तों को फोटो या फिर उनसे बात कर सकते हैं।

    अफवाह
    फेसबुक बिना आपकी परमीशन के मैसेज और एसएमएस भेज देता है।
    सच्‍चाई
    फेसबुक में मैसेज रिसीव, एडिट करने के लिए आपको एक बार परमीशन देनी पड़ती है। लेकिन इसका मतलब ये नहीं फेसबुक अपने मन से कोई भी मैसेज अपके दोस्‍तों को भेज दे।

    अफवाह
    फेसबुक मैसेंजर ऐप नई है
    सच्‍चाई
    फेसबुक मैसेंजर ऐप 2011 में अप्रेल के महिने के करीब आई थी इसे सबसे पहले यूरोप में लांच किया गया था दो हफ्ते पहले ही कंपनी ने इसे दूसरे देशों में देने का एलान किया है।


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    English summary
    Facebook recent effort to force people to adopt its standalone mobile messaging app has privacy-concerned users up in arms. Many of them believe the app is especially invasive.
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