अब भारत में ही बनेगा "आकाश"

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अब भारत में ही बनेगा


दुनियां का सबसे सस्ता टैबलेट आकाश को पूर्ण रूप से स्वदेशी बनाया जाएगा। इस कार्य में मानव संसाधन विकास मंत्रालय के साथ दूरसंचार मंत्रालय, सूचना एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय एवं अन्य संगठन सहयोग करेंगे।

 

मानव संसाधन विकास मंत्रालय के एक उच्चाधिकारी ने कहा कि मानव संसाधन विकास मंत्रालय के नेतृत्व में यह उपकरण तैयार किया गया है। लेकिन इसके अनेक कलपुर्जे अलग अलग देशों से प्राप्त किए गए हैं। सरकार चाहती है कि इसे पूरी तरह से भारत में तैयार किया जाए। अधिकारी ने कहा, इसके 16 प्रतिशत कलपुर्जे भारतीय हैं।

लैपटाप के 39 प्रतिशत कलपुर्जे दक्षिण कोरिया से, 24 प्रतिशत चीन से, 16 प्रतिशत अमेरिका तथा पांच प्रतिशत अन्य देशों से प्राप्त किए गए है।उन्होंने कहा, यह कार्य मानव संसाधन विकास मंत्रालय के साथ दूरसंचार मंत्रालय, सूचना एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अलावा कुछ सार्वजनिक कंपनियां, आईआईटी राजस्थान, आईआईटी बम्बई, आईआईटी मद्रास और आईआईटी कानपुर के अलावा सीडेक आपस में मिल कर करेंगी।

अधिकारी ने कहा कि अभी प्रोसेसर किसी एक देश से आ रहा है, स्क्रीन किसी दूसरे देश से तथा अन्य पुर्जे अलग अलग देशों से आ रहे हैं जबकि हमारी अवधारणा एक स्वदेशी सस्ता टैबलेट लैपटाप तैयार करने की है।उन्होंने कहा कि एक-दो वर्ष में इस पर अमल करने और इसमें 80 से 90 प्रतिशत भारतीय पुरजे का उपयोग करने का प्रयास किया जाएगा। साथ ही मंत्रालय को योजना पर अमल करने के लिए 22 करोड़ अतिरिक्त आकाश की जरूरत होगी।

इसके लिए नयी निविदा जारी की जायेंगी और अन्य कंपनियों को भी मौका मिलेगा। आकाश के निर्माता डाटाविंड और आईआईटी राजस्थान के बीच मतभेद भी उभर कर सामने आए हैं।

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