Aircel की लगेगी बोली, Airtel और Jio समेत कुछ निवेश फर्म होंगे शामिल
2016 में जियो ने जैसे ही टेलिकॉम इंडस्ट्री में कदम रखा, तमाम अन्य टेलिकॉम कंपनियों को कड़े मुकाबले का सामना करना पड़ा। कुछ कंपनियों ने तो कड़े मुकाबले के बाद भी अपने आप को मार्केट में बनाया रखा, लेकिन कुछ इसी प्रतिस्पर्धा में धराशायी हो गयी। इनमें से मलेशिया के मैक्सिस मालिकाना एयरसेल को तो रिलायंस जियो इंफोकॉम के प्रवेश से कड़े मुकाबले का सामना करने के बाद इस साल दिवाला के कठिन मोर्चे का सामना करना पड़ा।

अब वित्तीय और परिचालन लेनदारों के कर्ज को चुकाने के लिए, कंपनी को सबसे ज्यादा बोली लगाने वाले इंस्वेस्टर का इंतजार है, कंपनी ने अपनी पूरी संपत्ति को बेचने का फैसला भी कर लिया है। एयरसेल की संपत्ति को खरीदने के लिए बड़ी बड़ी टेलिकॉम कंपनियों ने अपनी दिलचस्पी दिखाई है, जिसमें भारती एयरटेल, रिलायंस जियो, स्टरलाइट टेक्नोलॉजी और दो अन्य निवेश फर्में शामिल हैं। हालांकि जानकारों का मानना है कि अगर एयरसेल को कोई एक ही खरीदें तो कंपनी के लिए फायदा होगा।
एयरटेल-जियो जैसी बड़ी टेलिकॉमटेलिकॉम कंपनियां बोली में शामिल
लिवमिन्ट से बातचीत में एक व्यक्ति ने कहा की एयरसेल के लिए बोलियां प्राप्त हुई है और बोली को सोमवार को बंद भी कर दिया जाएगा। आगे उन्होंने बताया कि कंपनी एक ही खरीददार के साथ डील करना चाहती है, जो कंपनी को बेहतर कीमत दे सकें। उन्होंने कहा, "एक दो दिनों में, इन बातों को पूरा करने की उम्मीद भी जताई जा रही है और एसेट की सेल से 25,000 हज़ार करोड़ मिलने की उम्मीद है। उल्लेखनीय है कि एयरसेल सेलुलर लिमिटेड और डिशनेट वायरलेस लिमिटेड, एयरसेल के ही रूप में जानी जाती है, 15,545 करोड़ रुपये वित्तीय लेनदारों को देना है, वहीं लगभग 35,000 करोड़ रुपये परिचालन लेनदारों को ।
इसके अलावा, पिछले साल अक्टूबर में, एयरसेल को बड़ा झटका तब लगा था जब कानूनी कारणों और कर्ज के चलते एयरसेल और रिलायंस कम्युनिकेशंस का विलय नहीं हो पाया था। बता दें कि दोनों के बीच विलय की बात साल 2016 से ही चल रही थी, लेकिन अक्टूबर 2017 में यह समझौता रद्द हो गया था। जिसके बाद एयरसेल ने भारत में अपना कारोबार बंद करने का फैसला लिया था। एयरसेल ने फरवरी 2018 में कंपनी को दिवालिया घोषित करने के लिए अर्जी डाली थी।
Aircel के वकील की दलील
Aircel के वकील के अनुसार कंपनी की संपत्ति 32,362 करोड़ रुपये की है और यह 2,100 मेगाहर्ट्ज बैंड में 65 मेगाहर्ट्ज स्पेक्ट्रम, 1800 मेगाहर्ट्ज बैंड में 103 मेगाहर्ट्ज स्पेक्ट्रम, और 900 मेगाहर्ट्ज बैंड में 21 मेगाहर्ट्ज स्पेक्ट्रम रखती है । हालांकि, फाइबर और टावर जैसी संपत्ति के बारे में अभी कुछ नही कहा जा सकता। संपत्ति की बिक्री अगर 25,000 करोड़ रुपए में होती है, तो भारतीय स्टेट बैंक, पंजाब नेशनल बैंक और बैंक ऑफ बड़ौदा सहित एयरसेल के वित्तीय ऋणदाताओं के लिए राहत की सांस साबित होगी।
एक रिपोर्ट के अनुसार एयरसेल की स्पेक्ट्रम एसेट की बोली लगाने वाली अकेली कंपनी भारती एयरटेल रही। वहीं, दूरसंचार टावरों के लिए अकेले रिलायंस जिओ ने बोली लगाई। बहरहाल, कंपनी इन लगाई गई बोलियों से खुश है, क्योंकि नतीजे उम्मीद से ज्यादा बेहतर रहे। बता दें कि अगले एक महीने तक विनर की घोषणा कर दी जाएगी। वहीं, बुधवार को बोलियां खोली जाएंगी।


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