VPN service के मामले में भारत की राह पर निकला पड़ा अमेरिका, तैयारियां शुरू
Virtual Private Network : अमेरिका वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क यानी VPN सर्विस के मामले में भारत की राह निकल पड़ा है। भारत ने कुछ दिनों पहले ही VPN सर्विस पर नकेल कसने का काम किया है. भारत के बाद अमेरिका भी वीपीएन सर्विस प्रोवाइडर (VPN service provider) पर नकेस कसने की तैयारी कर रहा है.

VPN कंपनियों पर लगे ये आरोप
अमेरिकी कानून निर्माताओं ने लीना खान के नेतृत्व वाले फेडरेशन ट्रेड कमीशन (FTC) को संबोधित करते हुए कहा कि सैकड़ों VPN service provider कंपनियां भ्रामक (Deceptive) और अपमानजनक (Offensive) ऑनलाइन सर्विस (Online service) सपोर्ट उपलब्ध करा रही हैं, जो कि यूजर्स को ज्यादा सिक्योरिटी मुहैया कराने के बुनियादी नियमों के खिलाफ है. Consumer VPN Industry भ्रामक विज्ञापन और अपमानजनक डेटा प्रैक्टिस से भरा हुआ है. ऐसा दावा किया गया है कि वीपीएन इंडस्ट्री बेहद अपारदर्शी है. साथ ही वीपीएन सर्विस प्रोवाइडर ग्राहकों को गुमराह करते हैं और ग्राहक उनका फायदा उठाते हैं.
भारत में जारी VPN नियम
Ministry of electronics and information technology की विंग इंडियन कंप्यूटर इमर्जेंसी रेस्पांस टीम (Cert-In) ने वीपीएन को लेकर नए नियम जारी किए हैं, जिसके तहत सभी VPN प्रोवाइडर को 5 साल तक कस्टमर का डेटा सुरक्षित रखना अनिवार्य है. इसके मुताबिक VPN कंपनियों को कस्टमर का नाम, वीपीएन इस्तेमाल समय, IP Address की डिटेल रखना है. Cert-In चाहता है कि VPN सर्विस प्रोवाइडर डेटा को वीपीएन कंपनियां लंबे समय तक स्टोर करें, जिससे असामाजिक तत्वों और साइबर अपराधियों को ऑनलाइन विभिन्न गतिविधियों में शामिल होने में प्रभावी ढंग से पता लगाया जा सके.

वीपीएन का अर्थ
VPN एक वर्चुअल नेटवर्क होते हैं, जो आपकी डिवाइस के IP एड्रेस को बाईपास करने का काम करता है. जिससे आपकी डिवाइस को ट्रैक नहीं किया जा सकता है. जब वीपीएन मोड ऑन होता है, तो आपका नेटवर्क एक सुरक्षित रूट से काम करता है, जो किसी भी ट्रैकिंग से दूर हो जाता है.
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