आंध्र प्रदेश सरकार का बड़ा फैसला; 13 साल से कम बच्चों के लिए Social Media बैन!
भारत में बच्चों के बीच बढ़ती स्मार्टफोन और सोशल मीडिया लत को लेकर सरकारें अब गंभीर कदम उठाने लगी हैं। इसी दिशा में आंध्र प्रदेश सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। राज्य के मुख्यमंत्री N. Chandrababu Naidu ने घोषणा की है कि 13 साल से कम उम्र के बच्चों को सोशल मीडिया इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं होगी।
सरकार इस नियम को जल्द लागू करने की तैयारी कर रही है और बताया गया है कि इसे अगले तीन महीनों यानी 90 दिनों के भीतर चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। इसके अलावा सरकार भविष्य में इस प्रतिबंध को 16 साल तक के बच्चों पर लागू करने पर भी विचार कर रही है।

ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर उठाया गया कदम
सरकार का कहना है कि यह फैसला बच्चों की मानसिक स्वास्थ्य और डिजिटल सुरक्षा को ध्यान में रखकर लिया गया है। पिछले कुछ वर्षों में बच्चों के बीच मोबाइल और सोशल मीडिया के अत्यधिक उपयोग को लेकर कई चिंताजनक रिपोर्ट सामने आई हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार लगातार स्क्रीन देखने से बच्चों में कई समस्याएं देखने को मिल रही हैं, जैसे:
- मानसिक तनाव और चिंता
- पढ़ाई में ध्यान की कमी
- नींद की समस्या
- सोशल मीडिया की लत
- साइबर बुलिंग और ऑनलाइन धोखाधड़ी का खतरा
सरकार का मानना है कि कम उम्र में सोशल मीडिया का अत्यधिक उपयोग बच्चों के मानसिक विकास पर नकारात्मक असर डाल सकता है।
इंटरनेट पर अनफिल्टर्ड कंटेंट भी चिंता का कारण
सरकार और विशेषज्ञों की चिंता का एक बड़ा कारण इंटरनेट पर मौजूद अनफिल्टर्ड और अनुचित सामग्री भी है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कई तरह का कंटेंट मौजूद होता है, जो कम उम्र के बच्चों के लिए उपयुक्त नहीं होता।
कम उम्र में इस तरह की सामग्री देखने से बच्चों की सोच और व्यवहार पर गलत प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए सरकार चाहती है कि बच्चों को एक सुरक्षित डिजिटल वातावरण मिले और वे अपनी पढ़ाई तथा रचनात्मक गतिविधियों पर अधिक ध्यान दे सकें।
कर्नाटक ने भी उठाया इसी तरह का कदम
दिलचस्प बात यह है कि आंध्र प्रदेश ही नहीं, बल्कि पड़ोसी राज्य कर्नाटक भी इसी तरह के कदम उठा रहा है। कर्नाटक के मुख्यमंत्री Siddaramaiah ने विधानसभा में घोषणा की है कि 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया के उपयोग पर प्रतिबंध लगाने की योजना बनाई जा रही है।
यह घोषणा राज्य के 2026-27 बजट के दौरान की गई। सरकार का कहना है कि बच्चों में बढ़ती मोबाइल और सोशल मीडिया की लत को कम करने के लिए यह जरूरी कदम है।
शिक्षा और स्कूल इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी फोकस
कर्नाटक सरकार ने अपने बजट में शिक्षा और स्कूल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत बनाने के लिए कई अहम घोषणाएं भी की हैं।
सरकार के अनुसार:
- आने वाले समय में 15,000 शिक्षकों की भर्ती की जाएगी।
- स्कूलों में नए क्लासरूम बनाने और मरम्मत के लिए 565 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।
- शैक्षणिक संस्थानों में अधिक शौचालय बनाने के लिए 75 करोड़ रुपये दिए गए हैं।
- स्कूलों के लिए फर्नीचर खरीदने के लिए 25 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है।
- सरकारी स्कूलों और कॉलेजों के रखरखाव और साफ-सफाई के लिए 125 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।
- इन कदमों का उद्देश्य छात्रों के लिए बेहतर शैक्षणिक वातावरण तैयार करना है।
भारत में डिजिटल सुरक्षा पर बढ़ती बहस
इन फैसलों के बाद भारत में बच्चों की डिजिटल सुरक्षा और सोशल मीडिया उपयोग को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि सख्त नियम बच्चों को सोशल मीडिया की लत और खतरनाक ऑनलाइन कंटेंट से बचाने में मदद करेंगे।
हालांकि कुछ लोग यह भी मानते हैं कि केवल प्रतिबंध लगाने से समस्या का समाधान नहीं होगा। उनका कहना है कि माता-पिता और स्कूलों को भी बच्चों को डिजिटल दुनिया के बारे में सही जानकारी देना जरूरी है, ताकि वे सुरक्षित तरीके से इंटरनेट का उपयोग कर सकें।
आगे क्या हो सकता है?
फिलहाल आंध्र प्रदेश सरकार इस नीति को लागू करने की तैयारी कर रही है और आने वाले समय में इसके नियमों और तकनीकी व्यवस्था को लेकर अधिक जानकारी सामने आ सकती है। अगर यह नीति सफल रहती है, तो संभव है कि भारत के अन्य राज्य भी इसी तरह के कदम उठाएं।
कुल मिलाकर यह फैसला इस बात की ओर संकेत करता है कि भारत में अब बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा और डिजिटल आदतों को लेकर सरकारें ज्यादा गंभीर हो रही हैं। आने वाले महीनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि इन नियमों का बच्चों की डिजिटल जिंदगी पर क्या प्रभाव पड़ता है।


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