US-China War: भारत बनेगा Apple का नया मैन्युफैक्चरिंग हब; तमिलनाडु और कर्नाटक में खुलेंगे दो नए iPhone प्लांट
US-China War: Apple अब भारत को अपने ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग नेटवर्क का अहम हिस्सा बनाने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रहा है। अमेरिका और चीन के बीच बढ़ते व्यापारिक तनाव और टैरिफ की मार से बचने के लिए Apple ने भारत में दो नए iPhone असेंबली प्लांट्स खोलने का फैसला किया है।
बता दें कि इन प्लांट्स की स्थापना तमिलनाडु और कर्नाटक में की जा रही है और यह कदम भारत में रोजगार के अवसरों को भी काफी बढ़ावा देगा। हालांकि, इसका मुख्य उद्देश्य चीन पर निर्भरता को खत्म करना है।

तमिलनाडु प्लांट शुरू
हाल ही में मिली एक रिपोर्ट से पता चला है कि Tata Electronics ने तमिलनाडु के होसुर में अपने नए iPhone असेंबली यूनिट की शुरुआत कर दी है। फिलहाल इस प्लांट में एक ही प्रोडक्शन लाइन काम कर रही है और यह पुराने iPhone मॉडल्स की असेंबली पर आधारित है।
Tata की यह भूमिका Apple के भारत में विस्तार के लिहाज से काफी अहम है। 2023 में Tata ने Wistron के iPhone मैन्युफैक्चरिंग बिजनेस को ओवरटेक किया था, जिससे उनकी इस क्षेत्र में मौजूदगी और मजबूत हुई है।
जल्द लॉन्च होगा Foxconn का कर्नाटक प्लांट
Apple के सबसे बड़े मैन्युफैक्चरिंग पार्टनर Foxconn ने भी भारत में बड़ा इंवेस्टमेंट किया है। कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में $2.6 बिलियन यानी तकरीब 21,000 करोड़ रुपये की लागत से एक विशाल प्लांट तैयार किया गया है। यह प्लांट iPhone 16 और iPhone 16e जैसे नए मॉडल्स के मैन्युफैक्चर पर आधारित होगा और इसकी शुरुआत कुछ ही दिनों में हो सकती है।
फुल कैपेसिटी पर यह प्लांट प्रति घंटे 300 से 500 iPhones तैयार करने में सक्षम होगा। इसके अलावा, यह प्लांट दिसंबर 2027 तक लगभग 50,000 लोगों को रोजगार दे सकता है, जिससे यह कर्नाटक के लिए एक बड़ा इंडस्ट्रियल बदलाव हो सकता है।
भारत की ओर रुख
Apple का यह कदम केवल प्रोडक्शन विस्तार नहीं, बल्कि भविष्य की रणनीतिक योजना का हिस्सा है। अमेरिका और चीन के बीच चल रही ट्रेड वॉर के चलते Apple को चीन से बाहर ऑप्शन तलाशने पड़े हैं। जब अमेरिकी टैरिफ लागू हुए थे, तब Apple को भारत में बने iPhones को तत्काल अमेरिका भेजना पड़ा था ताकि समय पर डिलीवरी हो सके।
एक्सपर्ट Mark Gurman के अनुसार, कंपनी अब कोशिश कर रही है कि अधिकतर अमेरिकी बाजार के लिए iPhone का निर्माण भारत में ही किया जाए, जिससे टैरिफ से बचा जा सके। हालांकि, Apple के लिए यह आसान नहीं होगा, क्योंकि iPhone 18 जैसे जटिल मॉडल्स या भविष्य के फोल्डेबल iPhones का मैन्युफैक्चरिंग पहली बार में चीन के बाहर करना तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण होगा।
इन दो प्लांट्स के शुरू होने से यह साफ है कि Apple अब भारत को केवल एक ऑप्शन नहीं, बल्कि मेन मैन्युफैक्चरिंग सेंटर के रूप में देख रहा है। इससे भारत को ग्लोबल सप्लाई चेन में एक नई पहचान मिलेगी और लोकली हाई टेक्नोलॉजी जॉब का सृजन होगा। Apple का यह विस्तार न सिर्फ देश की इकोनॉमी को गति देगा, बल्कि 'मेक इन इंडिया' पहल को भी एक नया आयाम देगा।


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