आ रही है 'Driverless' मेट्रो ट्रेन, इन सुविधाओं से होगी लैस, यहां जानें सभी डिटेल्स
Driverless metro train: देश के सबसे बिजी शहरों में से एक बेंगलुरु भी है। इसे लोग देश की कॉर्पोरेट राजधानी के तौर पर भी जानते हैं। यहां लोगों को अक्सर ट्रैफिक की समस्या का सामना करना पड़ता है।
जिसके कारण ज्यादातर लोग सार्वजनिक परिवहन या फिर बेंगलुरु मेट्रो का उपयोग करते हैं। जो उन्हें समय बचाने में भी मदद करता है।
अगर आप भी उन्हीं लोगों में से एक हैं तो ये खबर आपके दिन बना सकती है। जी हां, आपको बता दें, बेंगलुरु मेट्रो जल्द ही चालक रहित (Driverless) होने वाली है।
यहां तक की बेंगलुरु मेट्रो की येलो लाइन के लिए पहली ड्राइवर लेस ट्रेन चीन से चेन्नई पहुंच भी गई है। तो चलिए आपको आगे इसके ट्रायल रन से लेकर इसमें मिलने वाली सुविधाओं तक की डिटेल्स बताते हैं।

जी हां, सुनने में जरूर थोड़ा अटपता सा लग रहा होगा, लेकिन बेंगलुरु में अब से ड्राइवरलेस मेट्रो ट्रेन चलेगी। यह ट्रेन चीन से चेन्नई बंदरगाह पहुंची है। वहीं डेक्कन हेराल्ड की रिपोर्ट की मानें तो बेंगलुरु मेट्रो की पहली ड्राइवरलेस ट्रेन मंगलवार को चेन्नई बंदरगाह पर पहुंची है।
बेंगलुरु में ड्राइवरलेस ट्रेन- यह ड्राइवरलेस मेट्रो ट्रेन बहुत जल्द बेंगलुरु की जनता की सेवा के लिए तैयार हो जाएगी। रिपोर्ट्स की मानें बंदरगाह पर कस्टम क्लीयरेंस के बाद इस ड्राइवरलेस ट्रेन को बेंगलुरु ले जाया जाएगा।
गौरतलब है कि, 2019 में, सीआरसीसी नानजिंग पुज़ेन कंपनी लिमिटेड को इस बुनियादी मॉडल ट्रेन के लिए 216 कोच तैयार करने के लिए बैंगलोर मेट्रो रेल ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BMRCL) ने सम्मानित किया था।

जानकारी के अनुसार, बेंगलुरु पहुंचने के बाद इस ट्रेन को इलेक्ट्रॉनिक सिटी में असेंबल किया जाएगा, जहां चीनी इंजीनियरों की एक टीम असेंबली इसकी गतिविधी की निगरानी करेगी।
साथ ही यह खास ट्रेन सिल्क बोर्ड के माध्यम से बोम्मासंद्रा को आरवी रोड से जोड़ने वाली पीली लाइन पर ट्रायल रन करेगी। रिपोर्ट्स के अनुसार इस ट्रेन के ट्रायल के बाद एक रिपोर्ट मुख्य रेलवे सुरक्षा आयुक्त (CCRS) को सौंपी जाएगी।
चेन्नई मेट्रो रेल कंपनी के अधिकारियों के अनुसार यात्रियों की जरूरतों के आधार पर यह 3 या 6 कोच के साथ चलेगी। इसमें यात्रियों के लिए जगह, अतिरिक्त सीसीटीवी कैमरे, सेल फोन और लैपटॉप चार्जिंग की फैसलिटी मिलेगी। ट्रेनों को चलाने के लिए ट्रेन के दोनों तरफ चौड़े आपातकालीन दरवाजे होंगे।

जल्द ही सीपीडीसी नाम की एक नई परियोजना लागू होने जा रही है। ड्राइवर लेस ट्रेनों को चलाने के लिए इस टेक्नोलॉजी सिग्नल की आवश्यकता होगी। यह ट्रेन 80 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चल सकती है।
अभी इन ट्रेन कोचों में अतिरिक्त सुविधाएं जोड़ी गई हैं। अधिकारियों की मानें तो ये मेट्रो ट्रेनें ऑटोमैटिक टेक्नोलॉजी, जीपीएस, सिग्नल रीडिंग, टाइमिंग सीक्वेंस तकनीक के आधार पर चलेंगी। सार्वजनिक तौर पर उपयोग करने से पहले इन ट्रेनों को तकरीबन एक साल तक टेस्टिंग से गुजरना होगा।


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