बस एक ट्विट से भाग सकता है आपके दिल में बैठा डर
2013 बोस्टन मैराथन बम विस्फोट की घटना के बाद विश्वभर के 95 शहरों में ट्विटर पर दी गई भावनात्मक प्रतिक्रिया पर किए गए अध्ययन से यह बात सामने आई है कि यह आतंकवादी घटना के बाद जनता के बीच व्याप्त भय से निपटने में सरकारी एजेंसी के लिए मददगार साबित हो सकती है।
युनिवर्सिटी ऑफ पिट्सबर्ग और कार्नल युनिवर्सिटी के विशेषज्ञों ने आतंकवादी घटना के बाद विश्वभर के समुदायों के लोगों के डर और सोशल नेटवर्किंग साइट पर उनकी प्रतिक्रिया का व्यापक स्तर पर विश्लेषण किया। अध्ययन में पाया गया कि बोस्टन के बाहर के समुदाय के लोगों ने 'प्रे फॉर बोस्टन' हैश टैग के साथ अपनी भावनाएं जाहिर की और कैसे उनकी भावनाएं भौगोलिक अंतर के बावजूद एक-दूसरे से जुड़ी हुई थीं।

अमेरिका के पिट्स स्कूल ऑफ इंफोर्मेशन साइंसेज के सहायक प्राध्यापक और शोधार्थी यू-रू लिन ने कहा, "हमारे शोध के परिणाम निश्चित रूप से उन अधिकारियों की मदद करेंगे जो अन्य देशों में होने वाली घटनाओं पर अपने देश के लोगों की प्रतिक्रिया का अनुमान लगा रहे हैं।" इस अध्ययन के लिए शोधकर्ताओं ने 95 शहरों के 18 करोड़ लोगों के ट्वीट का विश्लेषण किया।
शोधकर्ताओं ने अमेरिका के 60 सबसे अधिक आबादी वाले महानगरीय इलाकों और अमेरिका से बाहर 35 सबसे ज्यादा घनी आबादी वाले शहरों का अध्ययन किया। अध्ययन में लोगों की एकजुटता और सहानुभूति दर्शाने वाले ट्वीट की पहचान करने के लिए हैशटैग का भी इस्तेमाल किया गया।
शोधकर्ताओं ने पाया कि कुछ शहरों के लोग खास तरह की भावनाएं जाहिर कर रहे थे। हैशटैग 'प्रे फॉर बोस्टन' में सहानुभूति दर्शाई गई, वहीं हैश टैग 'बोस्टन स्ट्रांग' में एकजुटता नजर आई।
कार्नल युनिवर्सिटी में संचार के सहायक प्राध्यापक ड्रीव मारगोलिन ने कहा, "सोशल मीडिया पर तत्काल आई भावनात्मक प्रतिक्रिया अन्य समुदायों की तकलीफ से जुड़ी गहरी भावनाओं का संकेत है।


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