Budget 2026 का असर: क्या स्मार्टफोन और इलेक्ट्रॉनिक्स सच में होंगे सस्ते?
Budget 2026 पेश होते ही आम लोगों के मन में एक बड़ा सवाल है- क्या अब स्मार्टफोन, टीवी और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स सस्ते हो जाएंगे? वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी को लोकसभा में बजट पेश किया और इसमें इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग से जुड़े कई अहम ऐलान किए।
पहली नजर में ये फैसले ग्राहकों के लिए राहत जैसे लगते हैं, लेकिन हकीकत थोड़ी अलग और ज्यादा परतदार है।

बजट 2026 में क्या बदला?
Budget 2026 में सरकार का फोकस साफ तौर पर घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को मजबूत करने पर रहा है। इसके तहत लिथियम-आयन बैटरी और बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम से जुड़े कैपिटल गुड्स पर Basic Customs Duty (BCD) में छूट को आगे बढ़ाया गया।
माइक्रोवेव ओवन और इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स में इस्तेमाल होने वाले कुछ इनपुट मटीरियल्स पर कस्टम ड्यूटी कम की गई। इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग स्कीम के लिए ₹40,000 करोड़ का विस्तारित आवंटन किया गया। इन कदमों का मकसद आयात पर निर्भरता घटाना और भारत में ही उत्पादन को बढ़ावा देना है।
वित्त मंत्री ने क्या कहा?
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि ग्रीन मोबिलिटी और एनर्जी सिक्योरिटी को बढ़ावा देने के लिए हमने लिथियम-आयन सेल मैन्युफैक्चरिंग में इस्तेमाल होने वाले कैपिटल गुड्स पर बेसिक कस्टम ड्यूटी छूट का दायरा बढ़ाया है।"
उन्होंने यह भी जोड़ा कि India Semiconductor Mission 2.0 जैसे कदम रोजगार, इनोवेशन और मजबूत सप्लाई चेन बनाने में मदद करेंगे।
क्या इससे स्मार्टफोन सस्ते होंगे?
विशेषज्ञों का मानना है कि बैटरी और कुछ इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स पर ड्यूटी में छूट से मैन्युफैक्चरिंग कॉस्ट जरूर घटेगी। पहले इन्हीं इनपुट्स पर ज्यादा टैक्स लगने से फोन और गैजेट्स महंगे हो जाते थे।
लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हर स्मार्टफोन या गैजेट की कीमत तुरंत कम हो जाएगी या आने वाले हफ्तों में दुकानों पर बड़े प्राइस कट दिखने लगेंगे इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स कहते हैं कि कीमतों में बदलाव इस बात पर निर्भर करेगा कि कंपनियां लागत में हुई बचत को ग्राहकों तक कितनी जल्दी और कितनी मात्रा में पहुंचाती हैं।


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