Cyber Fraud पर बड़ा एक्शन; अब बैंक KYC में Biometric और SIM Roaming को Passport से जोड़ने की तैयारी
भारत में तेजी से बढ़ते साइबर फ्रॉड और डिजिटल अरेस्ट स्कैम को रोकने के लिए सरकार और जांच एजेंसियां अब बड़े कदम उठाने की तैयारी कर रही हैं। हाल ही में सामने आई रिपोर्ट्स के मुताबिक, CBI (Central Bureau of Investigation) और Indian Cybercrime Coordination Centre (I4C) सरकार को कुछ अहम सिफारिशें भेजने पर विचार कर रहे हैं।
इन प्रस्तावों का मकसद साफ है कि विदेशों से संचालित हो रहे साइबर अपराध नेटवर्क को तोड़ना और भारतीय नागरिकों को ऑनलाइन ठगी से सुरक्षित बनाना।

Cyber Fraud Ecosystem पर हाई-लेवल कॉन्फ्रेंस
CBI और गृह मंत्रालय के I4C द्वारा हाल ही में एक दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया गया, जिसमें साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ, कानून प्रवर्तन अधिकारी, RBI और बैंक प्रतिनिधि, Interpol अधिकारी और कई सुरक्षा एजेंसियां शामिल हुईं।
इस बैठक में खासतौर पर चर्चा हुई कि कैसे भारतीय SIM कार्ड और Mule Bank Accounts का इस्तेमाल कर विदेशी साइबर गिरोह भारत में फ्रॉड कर रहे हैं।
तीन बड़े पिलर जिन पर Cyber अपराध टिका है
कॉन्फ्रेंस में साइबर फ्रॉड की पूरी व्यवस्था को तीन हिस्सों में बांटा गया:
1. Financial Pillar
जहां mule accounts और money laundering के जरिए पैसा इधर-उधर भेजा जाता है।
2. Telecom Pillar
जहां SIM/eSIM और डिजिटल नेटवर्क का गलत इस्तेमाल किया जाता है।
3. Human Pillar
जहां लोगों को नौकरी के बहाने विदेश ले जाकर scam compounds में जबरन काम करवाया जाता है, जिसे cyber slavery कहा जा रहा है।
Amit Shah का बड़ा बयान
गृह मंत्री अमित शाह ने साइबर अपराध की स्थिति को बेहद गंभीर बताया। उन्होंने कहा कि हर 37 सेकंड में एक व्यक्ति साइबर फ्रॉड का शिकार बन रहा है। औसतन हर घंटे 100 लोग ठगे जा रहे हैं। उन्होंने एजेंसियों को निर्देश दिया कि इस सम्मेलन से निकले सुझाव सरकार को जल्द भेजे जाएं।
Cybercrime Hubs अब विदेश शिफ्ट हो चुके हैं
CBI Director प्रवीण सूद ने बताया कि पहले साइबर अपराध के केंद्र भारत में जामताड़ा, मेवात और भरतपुर जैसे क्षेत्रों में थे, लेकिन अब ये नेटवर्क शिफ्ट होकर कमबोडिया, थाइलैंड और म्यामार जैसे देशों में फैल चुके हैं।
यहां लोगों को नौकरी का लालच देकर बुलाया जाता है और फिर उनसे ठगी करवाई जाती है।
Indian SIM Cards का सबसे बड़ा दुरुपयोग
जांच में सामने आया कि भारतीय SIM कार्ड भारत में एक्टिवेट होते हैं, फिर उन्हें विदेश भेज दिया जाता है, इन्हीं नंबरों से भारतीयों को कॉल कर धमकाया जाता है।
डिजिटल अरेस्ट, फर्जी लोन, नौकरी स्कैम जैसी चालों से लोगों से पैसे ट्रांसफर करवाए जाते हैं। इसके बाद पैसा कई mule accounts में घूमता है और फिर क्रिप्टोकैरेंसी या दूसरे खातों में चला जाता है।
सरकार को भेजे जा सकते हैं ये बड़े प्रस्ताव
CBI और I4C जिन उपायों पर विचार कर रहे हैं, उनमें शामिल हैं:
- International Roaming को Passport से लिंक करना, ताकि SIM का विदेश में गलत इस्तेमाल रोका जा सके।
- Banks के KYC में Biometric Verification जोड़ना ताकि फर्जी दस्तावेजों पर mule accounts खोलना मुश्किल होगा।
- VPN के जरिए विदेश से Bank Accounts Access को नियंत्रित करना, ताकि remote fraud operations रोके जा सकें।
- Customer Profile के आधार पर रोमिंग रेगुलेशन, जिससे सही यात्रियों को परेशानी न हो।
54,000 करोड़ रुपये तक की चोरी
सुप्रीम कोर्ट ने भी हाल ही में कहा कि अनुमान के अनुसार भारत में साइबर अपराधों के जरिए 54,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की ठगी हो चुकी है।
आगे क्या होगा?
सरकार अगर इन सिफारिशों को लागू करती है, तो आने वाले समय में SIM के गलत इस्तेमाल पर रोक लगेगी, बैंक फ्रॉड कम होंगे और Digital arrest जैसे स्कैम पर बड़ा असर पड़ेगा, लेकिन साथ ही privacy और सुविधा को लेकर भी संतुलन बनाना जरूरी होगा।
भारत में साइबर फ्रॉड अब केवल टेक्नोलॉजी नहीं बल्कि एक संगठित अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क बन चुका है। ऐसे में biometric KYC और passport-linked roaming जैसे कदम डिजिटल सुरक्षा के लिए बेहद अहम साबित हो सकते हैं।


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