पानी से चलता है ChatGPT? जानिए क्यों हर दिन खर्च होता है हजारों लीटर!
आपने अक्सर सुना होगा कि AI यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस बहुत ताकतवर तकनीक है, लेकिन क्या आपको पता है कि यह सिर्फ बिजली नहीं, पानी भी बहुत ज्यादा खपत करती है?
जी हां, OpenAI के ChatGPT जैसे बड़े भाषा मॉडल को चलाने में हर दिन हजारों लीटर पानी खर्च होता है और ये सुनकर चौंकना लाजमी है।

AI को पानी की जरूरत क्यों?
AI सिस्टम को चलाने के लिए बड़े-बड़े डेटा सेंटर्स की जरूरत होती है, जिनमें हजारों कंप्यूटर लगातार काम करते हैं। जब ये मशीनें घंटों तक चलती हैं तो ये बहुत गर्म हो जाती हैं। इन मशीनों को ठंडा रखने के लिए कूलिंग सिस्टम का इस्तेमाल किया जाता है, और यही सबसे बड़ा कारण है भारी मात्रा में पानी की खपत का।
OpenAI और अन्य टेक कंपनियां अपने डेटा सेंटर्स को ठंडा रखने के लिए आमतौर पर Evaporative Cooling तकनीक का इस्तेमाल करती हैं, जिसमें टावर के जरिए हवा और पानी मिलाकर तापमान कम किया जाता है।
कितना पानी खर्च होता है?
2023 की एक रिपोर्ट के अनुसार, ChatGPT जैसी AI सेवाएं हर बार सवाल का जवाब देने के लिए औसतन करीब 500 मिलीलीटर से 1 लीटर तक पानी की खपत करती हैं। यानी अगर एक दिन में लाखों लोग चैटजीपीटी से सवाल पूछ रहे हैं, तो हर दिन हजारों लीटर पानी खर्च हो रहा है।
एक अनुमान के मुताबिक, Microsoft और OpenAI मिलकर हर साल लगभग 70 करोड़ लीटर पानी का इस्तेमाल कर रहे हैं, जो कि एक छोटे शहर की पानी की सालाना जरूरत के बराबर है।
क्या है इसका असर?
जहां एक ओर AI हमारी जिंदगी को आसान बना रहा है, वहीं दूसरी ओर यह पर्यावरण पर भी असर डाल रहा है। जल संकट झेल रहे देशों में इस तरह की तकनीकों की बढ़ती खपत चिंता का विषय बन रही है।
समाधान क्या हो सकता है?
टेक कंपनियों को चाहिए कि वो
- ग्रीन एनर्जी का इस्तेमाल बढ़ाएं।
- वॉटर-एफिशिएंट कूलिंग सिस्टम पर काम करें।
- डेटा सेंटर्स को ऐसे क्षेत्रों में बनाएँ जहां पानी की उपलब्धता ज्यादा हो।


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