Voice-Only रिचार्ज प्लान्स से अब कम होगा आपका मोबाइल बिल
भारत में मोबाइल यूजर्स के लिए जल्द ही मंथली रिचार्ज का बोझ कम हो सकता है। टेलीकॉम रेगुलेटर अब जियो और एयरटेल जैसी कंपनियों से 'वॉइस-ओनली' प्लान लाने को कह रहा है। ये खास पैक 84 या 365 दिनों जैसे अलग-अलग वैलिडिटी के साथ आएंगे। फिलहाल, जिन यूजर्स को सिर्फ कॉलिंग की जरूरत है, उन्हें भी मजबूरी में उस डेटा के पैसे देने पड़ते हैं जिसका वे इस्तेमाल ही नहीं करते। इस बदलाव से करोड़ों लोगों को बड़ी राहत मिल सकती है।
इस प्रस्ताव का मकसद देश के करोड़ों कम आय वाले यूजर्स और सीनियर सिटीजन्स की मदद करना है। बहुत से लोगों को फोन की जरूरत सिर्फ बेसिक कॉलिंग और मैसेज भेजने के लिए होती है। लेकिन टेलीकॉम कंपनियां अक्सर हर लॉन्ग-टर्म पैक के साथ महंगा डेटा और ओटीटी ऐप्स थोप देती हैं। इस 'जबरन बंडलिंग' की वजह से बेसिक कनेक्टिविटी महंगी हो जाती है और ग्राहकों के पास चुनाव का मौका नहीं बचता।

सिर्फ वॉइस और SMS वाले रिचार्ज पैक से कितना कम होगा आपका मोबाइल बिल?
नए प्लान के तहत, कंपनियों को हर मौजूदा वैलिडिटी पीरियड के लिए 'नो-डेटा' ऑप्शन देना होगा। इसमें 28 दिन, 56 दिन और 84 दिन वाले पॉपुलर साइकल भी शामिल होंगे। यहां तक कि सालाना रिचार्ज का भी एक 'वॉइस-ओनली' वर्जन लाना होगा। यह बदलाव उन यूजर्स के लिए बिल कम कर देगा जो वाई-फाई इस्तेमाल करते हैं या जिनके पास सिंपल फीचर फोन है। इससे बेसिक यूजर्स के लिए मार्केट में बेहतर और सस्ती कीमतें देखने को मिलेंगी।
टेलीकॉम दिग्गज फिलहाल अनलिमिटेड 5G और स्ट्रीमिंग ऐप्स को प्रमोट करने के लिए डेटा-हैवी पैक्स का सहारा लेते हैं। इन डिजिटल एक्स्ट्रा सुविधाओं को हटाने से रिचार्ज पैक काफी सस्ते और किफायती हो जाएंगे। टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (TRAI) का मानना है कि इससे ग्राहकों को ज्यादा आजादी मिलेगी। सभी स्टेकहोल्डर्स इस प्रस्ताव पर 28 अप्रैल की डेडलाइन तक अपनी राय दे सकते हैं।
| प्लान का प्रकार | मौजूदा बंडल पैक्स | प्रस्तावित वॉइस पैक्स |
|---|---|---|
| वैलिडिटी के विकल्प | 28 से 365 दिन | 28 से 365 दिन |
| मिलने वाले फायदे | वॉइस, SMS, डेली डेटा, ऐप्स | सिर्फ वॉइस और SMS |
| टारगेट यूजर्स | ज्यादा डेटा और 5G यूजर्स | बेसिक कॉलिंग यूजर्स और बुजुर्ग |
अक्सर ग्राहक उन महंगे रिचार्ज से परेशान रहते हैं जिनमें अनचाही सर्विसेज और ऐप्स शामिल होते हैं। अगर TRAI इन बदलावों को अनिवार्य कर देता है, तो भारतीय टेलीकॉम मार्केट में एक बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। यह कदम सुनिश्चित करेगा कि मोबाइल कनेक्टिविटी हर नागरिक के लिए एक किफायती बुनियादी अधिकार बनी रहे। इस महीने के अंत में पब्लिक कंसल्टेशन खत्म होने के बाद हमें अंतिम फैसला देखने को मिलेगा।


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