अमेरिका ने चीन पर लगाया 245% तक टैरिफ, गैजेट्स की दुनिया पर क्या असर पड़ेगा?
हाल ही में व्हाइट हाउस ने एक फैक्ट शीट जारी करते हुए बताया कि अमेरिका ने चीन से आने वाले इंपोर्ट्स पर 245% तक का भारी टैरिफ लगा दिया है। इसमें 125% पहले से था और अब 100% टैरिफ लगाया गया है। यह कदम चीन द्वारा बोइंग डिलीवरी रोकने और हाई-टेक मटेरियल्स की एक्सपोर्ट पर बैन लगाने के जवाब में उठाया गया है। लेकिन इस फैसले का सीधा असर गैजेट्स की दुनिया और आपकी जेब पर भी पड़ सकता है। यहां इसी को समझने की कोशिश करेंगे। आइए जानते हैं इसका टेक और गैजेट्स पर्सपेक्टिव से क्या मतलब है।

स्मार्टफोन और गैजेट्स पर असर
245% का इंपोर्ट टैक्स सीधे-सीधे चीन से आने वाले सस्ते स्मार्टफोन, वायरलेस ईयरबड्स, पावर बैंक, स्मार्टवॉच और दूसरे गैजेट्स को महंगा बना सकता है। भारत में बिकने वाले कई ब्रांड्स जैसे शाओमी, रियलमी, वनप्लस, लेनोवो और कुछ एपल प्रोडक्ट्स भी चीन में बनते हैं या वहां से पार्ट्स मंगाते हैं। अमेरिका में इन गैजेट्स की कीमतें अब बढ़ सकती हैं, जिससे भारतीय यूजर्स के लिए भी इन ब्रांड्स की इंटरनैशनल स्ट्रैटजी पर असर पड़ेगा।
जरूरी कंपोनेंट्स की कमी और कीमत में उछाल
चीन ने gallium, germanium और antimony जैसे हाई-टेक मैटेरियल्स के एक्सपोर्ट पर रोक लगाई है। ये मटेरियल्स सेमीकंडक्टर्स, बैटरियों, LED डिस्प्ले और प्रोसेसर बनाने में बेहद जरूरी होते हैं।
इसका मतलब
स्मार्टफोन लॉन्च में देरी
बैटरी टेक्नोलॉजी में स्लो डाउन
चिपसेट्स और डिस्प्ले कॉस्ट बढ़ने की संभावना
मैन्युफैक्चरिंग का शिफ्ट
इस टैरिफ युद्ध के चलते बड़ी कंपनियां जैसे एपल और गूगल पहले से ही मैन्युफैक्चरिंग को भारत, वियतनाम और मैक्सिको की तरफ शिफ्ट कर रही हैं। आने वाले समय में यह ट्रेंड और तेज हो सकता है, लेकिन शिफ्टिंग में समय लगेगा, इसलिए गैजेट सप्लाई चेन में डिसरप्शन आ सकता है।
क्या है मामला?
दरअसल, अमेरिका द्वारा हाल ही में चीनी सामानों पर 145% टैरिफ लगाया गया था, जिसके जवाब में चीन ने भी अमेरिकी सामानों पर 125% तक टैरिफ बढ़ा दिया। साथ ही, चीन ने अमेरिकी एयरक्राफ्ट कंपनियों से नए ऑर्डर लेना बंद कर दिया है और बोइंग जैसे निर्माताओं की डिलीवरी पर भी रोक लगा दी है।
इसके अलावा, चीन ने गैलियम, जर्मेनियम और एंटीमोनी जैसे जरूरी हाई-टेक मिनरल्स के एक्सपोर्ट पर रोक लगाई है। ये सभी पदार्थ मिलिट्री, एयरोस्पेस और सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री में बेहद अहम माने जाते हैं।
व्हाइट हाउस का जवाब
व्हाइट हाउस ने इस कदम को 'America First Trade Policy' का हिस्सा बताया है। प्रशासन का कहना है कि चीन जानबूझकर उन तकनीकी संसाधनों की आपूर्ति बाधित कर रहा है, जो ग्लोबल सप्लाई चेन के लिए बेहद जरूरी हैं।
साथ ही अमेरिका ने साफ किया है कि अन्य देशों के साथ टैरिफ में छूट की बातचीत चल रही है, लेकिन चीन को इस छूट से बाहर रखा गया है क्योंकि उसने जवाबी कार्रवाई की है।
चीन का जवाब
जब चीनी विदेश मंत्रालय से इस भारी टैरिफ के बारे में पूछा गया, तो प्रवक्ता लिन जियान ने कहा, "आप यह अमेरिकी पक्ष से पूछें कि 245% आंकड़ा कैसे तय किया गया।" उन्होंने आगे कहा, "टैरिफ वॉर की शुरुआत अमेरिका ने की थी, चीन ने केवल अपनी वैलिड सिक्योरिटी और न्याय के लिए जवाबी कदम उठाए हैं। हम टैरिफ वॉर नहीं चाहते, लेकिन डरते भी नहीं हैं।"
लिन जियान ने अमेरिका को यह भी सलाह दी कि अगर वह वास्तव में संवाद चाहता है, तो धमकी और दबाव की नीति छोड़कर सम्मान और आपसी लाभ के आधार पर बातचीत करे।
आगे क्या?
वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका अब चीन के वैश्विक प्रभाव को सीमित करने के लिए टैरिफ वार्ताओं को रणनीतिक रूप से इस्तेमाल करने की योजना बना रहा है। ट्रम्प प्रशासन लगभग 70 देशों के साथ बातचीत कर रहा है ताकि चीन की कंपनियों को अन्य देशों में स्थापित होने और सामान भेजने से रोका जा सके।
अमेरिका और चीन के बीच यह टैरिफ युद्ध अब केवल दो देशों की लड़ाई नहीं रह गया है, बल्कि इसका प्रभाव ग्लोबल सप्लाई चेन, टेक्नोलॉजी सेक्टर और वित्तीय बाजारों पर भी दिखाई देने लगा है। जहां एक तरफ अमेरिका अपने आर्थिक और सामरिक हितों की रक्षा करने की कोशिश कर रहा है, वहीं चीन भी वैश्विक दबाव में झुकने को तैयार नहीं दिख रहा है।


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