क्या आप जानते हैं दुनिया का पहला मोशन कैमरा बंदूक की तरह दिखता था ?
आज कल के कैमरों में जहां हम 48 और 55 फ्रेम पर सेकेंड की बात करते हैं वहीं किसी जमाने में इसकी शुरुआत 12 फ्रेम पर सेकेंड से हुई थी। आपको जानकर हैरानी होगी दुनियां का सबसे पहला पोर्टेबल मोशन पिक्चर कैमरा 12 फ्रेंम पर सेकेंड की स्पीड से रिकार्डिंग करता था। इसे फ्रेंच साइंटिस्ट एटिनी जूल्स मारे (Étienne-Jules Marey) ने बनाया था।
देखनें में ये एक बंदूक की तरह लगता था, इस कैमरा गन में बंदूक की तरह अलग-अलग प्लेटें लगीं थी जिसे घूमाने पर एक मोशन पिक्चर बन जाती थी। अगर हम साधारण आखों की बात करें तो ये एक सेकेंड में 10 से 12 बार एक तस्वीर को कैपचर करतीं हैं यानी हमारी आखों की बात की जाए तो इसकी स्पीड 12 फ्रेंम पर सेकेंड है।
एक सेकेंड में जितने ज्यादा फ्रेंम होंगे हमारा वीडियो उतना ही स्मूद और क्लियर होगा। इसीलिए हाईडेफिनेशन कैमरों में 300 से ज्यादा फ्रेंम पर सेकेंड स्पीड प्रोवाइड करते हैं।
आईए देखते हैं कहा पर कितने फ्रेंम पर सेकेंड स्पीड का प्रयोग किया जाता है?
1 फ्रेंम पर स्पीड : टाइम लेप्स फोटोग्राफी के लिए
24 फ्रेंम पर सेकेंड : ज्यादातर मूवी थियेटरों के फिल्म प्रोजेक्टों में प्रयोग की जाने वाली स्पीड
48 फ्रेंम पर सेकेंड : स्लो मोशन फोटोग्राफी के लिए
300+ फ्रेंम पर सेकेंड : हाई स्लो मोशन फोटोग्राफी के लिए
2500+फ्रेंम पर सेकेंड : सबसे ज्यादा हाईस्पीड और साथ में स्पेशल इफेक्ट फोटोग्राफी के लिए।
World’s First Portable Motion Picture Camera
दुनियां का पहला पोर्टेबल मोशन पिक्चर कैमरा
World’s First Portable Motion Picture Camera
दुनियां का पहला पोर्टेबल मोशन पिक्चर कैमरा
World’s First Portable Motion Picture Camera
दुनियां का पहला पोर्टेबल मोशन पिक्चर कैमरा
Frame per second pics
ऐसे दिखती है अलग अलग फ्रेंम में कैपचर की गईं तस्वीरें।
Slow motion photography
जितने ज्यादा फ्रेम पर सेकेंड होंगे उतना ही स्लो मोशन फोटोग्राफी आप कर सकते हैं।


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