क्या आप जानते हैं हर साल कितने उल्कापिंड पृथ्वी से टकराते हैं? अगर नहीं तो यहां जाने
क्या आप जानते हैं हमारे सौरमंडल का सबसे छोटा सदस्य कौन है? उल्कापिंडों का नाम तो आपने सुना ही होगा. वे हमारे सौरमंडल के सबसे छोटे सदस्य होते हैं.ये एक तरह की चट्टानें हैं, जो पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करते ही जलने लगती हैं. इससे आकाश में प्रकाश उत्पन्न होता है. उसे उल्का कहा जाता है. कई उल्कापिंड अपनी यात्रा के दौरान पूरी तरह से नहीं जलते हैं और उनके अवशेष पृथ्वी पर पहुंच जाते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि हर साल कितने उल्कापिंड पृथ्वी की सतह से टकराते हैं? नहीं न तो आज हम आप को बताएगें.

बता दें कि वैज्ञानिकों का अनुमान है कि हर साल लगभग 10,000 उल्कापिंड पृथ्वी से टकराते हैं. लेकिन, ऐसा बहुत कम होता है कि अंतरिक्ष से कोई विशाल वस्तु पृथ्वी की सतह से टकराती हो. सामान्यतः पृथ्वी पर गिरने वाली चट्टानें बहुत छोटी होती हैं और उनमें से कुछ पृथ्वी तक पहुंच जाती हैं. वे पृथ्वी पर जीवित प्राणियों के लिए कोई खतरा पैदा नहीं करते हैं. हालांकि, हर साल पृथ्वी से टकराने वाले उल्कापिंडों की संख्या चंद्रमा की तुलना में बाल्टी में पानी की एक बूंद के बराबर होती है.
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हालांकि यह जानना नामुमकिन है कि हर साल कितने उल्कापिंड समुद्र में गिरते हैं. तनक्रेडी ने बताया कि लगभग 33 फीट (10 मीटर) चौड़ी अंतरिक्ष चट्टानों के हर 6 से 10 साल में पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करने की उम्मीद है. ऐसी ही एक घटना साल 1908 में रूस में घटी थी, जिसे तुंगुस्का घटना कहते हैं. ऐसा हर 500 साल में एक बार होता है.
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