ई-सिगरेट से बढ़ती निकोटीन की लत

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    ई-सिगरेट को पारंपरिक सिगरेट को छोड़ने के एक उपाय के तौर पर प्रचारित किया जाता रहा है, लेकिन एक नए अध्ययन में पता चला है कि इससे किशारों में पारंपरिक सिगरेट और निकोटीन की लत बढ़ रही है। शोध पत्रिका 'जेएएमए पिडिएट्रिक्स' में प्रकाशित अध्ययन रिपोर्ट के अनुसार, जो किशोर ई-सिगरेट का प्रयोग करते हैं, उनमें सिगरेट छोड़ने की अपेक्षा इसकी लत पड़ने की आशंका अधिक होती है।

    यूनिवर्सिटी ऑफ कैलीफोर्निया-सैन फ्रांसिस्को (यूसीएसएफ) के सेंटर फॉर टोबैको कंट्रोल रिसर्च एंड एजुकेशन के पोस्ट डॉक्टोरल फेलो लॉरेन डुट्रा ने कहा, "दावा किया जाता रहा है कि ई-सिगरेट लोगों को सिगरेट की लत छोड़ने में मदद करता है, लेकिन हमने पाया है कि ई-सिगरेट किशोरों को सिगरेट छोड़ने के बजाय इसका अधिक प्रयोग करने के लिए प्रेरित करता है। माध्यमिक एवं उच्च विद्यालय के 40 हजार से अधिक किशोरों पर किए गए एक अध्ययन में पाया गया कि 2011-12 के बीच ई-सिगरेट का प्रयोग 3.1 फीसदी से दोगुना बढ़कर 6.5 फीसदी हो गया।

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    ई सिगरेट 2003 में एक चीनी फार्मासिस्ट होन लिक द्वारा ईजाद की गई थी।

    ई सिगरेट की बिक्री सबसे पहले गोल्‍डन ड्रैगन होल्डिंग ने 2005-2006 में विदेशों में शुरू की और बाद में इसका नाम बदलकर रूयान रखा जिसका मतलब धूम्रपान होता है।

    ई सिगरेट में तम्‍बाकू से तैयार होने वाला हानिकारक तत्‍व नहीं बनता जो व्‍यक्ति को नुकसान नहीं करता।

    ई सिगरेट में उक कार्टेंज लगी होती है जिसमें निकोटीन और प्रॉपेलिन ग्‍लाइकोल का तरल पदार्थ होता है जो वाष्‍प होकर धुआ छोड़ता है।

    बच्‍चों को ई सिगरेट नुकसान करती है जबकि बड़ों पर इसका उतना असर नहीं होता।

    ई सिगरेट साधारण सिगरेट के मुकाबले महंगी होती इसकी शुरुआज 800 रुपए से होती है।

    साधारण सिगरेट की तरह ई सिगरेट भी पब्‍लिक प्‍लेस में नहीं पी सकते।

    देखने में ई सिगरेट असली सिगरेट की तरह लगती है बस ई सिगरेट की लम्‍बाई थोड़ी ज्‍यादा होती है।


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    वास्तव में ई-सिगरेट निकोटीन और पारंपरिक सिगरेट की दुनिया में पहुंचने का एक प्रवेश द्वार बनता जा रहा है। पारंपरिक सिगरेट जैसा दिखने वाला ई-सिगरेट बैटरी से चलने वाला एक उपकरण है, जिससे निकोटीन और अन्य रसायनों से मिश्रित हवा खींची जा सकती है। यह चॉकलेट और स्ट्रॉबेरी जैसे फ्लेवरों में उपलब्ध होता है, जिसका उपयोग पारंपरिक सिगरेट में करना मना है, क्योंकि ये फ्लेवर किशोरों को काफी भाते हैं।

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