Facebook फेक न्यूज़ पर लगेगा पूर्ण विराम, सभी यूज़र्स को मिलेगा फैक्ट चेक करने का काम
हमारा सोशल मीडिया का रेंज जितना बड़ा है, उतने ही लोग उससे जुड़े हुए हैं। लोग दिनभर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से जुड़े रहते हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के बढ़ते इस्तेमाल ने इस प्लेटफॉर्म पर फेक न्यूज यानि झूठी ख़बरों का सिलसिला काफी बढ़ा दिया है। इन प्लेटफॉर्म पर काफी भरोसा होने के चलते लोग इन फेक न्यूज पर विश्वास कर लेते हैं।

इन फेक न्यूज़ के चलते कई जगह दंगे भड़कने और मॉब लिंचिंग की घटनाएं भी सामने आई हैं। हालांकि फेसबुक लगातार फेक न्यूज़ पर रोक लगाने के लिए कोशिश कर रही है। इसी कड़ी में अब सोशल मीडिया जायंट फेसबुक ने इंडिया में फेक न्यूज़ पर लगाम लगाने के लिए एक नया ऑप्शन शुरू करने की तैयारी में है। ये ऑप्शन गलत खबरों को पहचानने में मदद करेगा और आपको एक फॉल्स अलर्ट भी देगा। अगर कोई व्यक्ति गलत जानकारी पोस्ट करता है तो पोस्ट पर फॉल्स इंफॉरेमेशन लिखा आएगा।
फेक न्यूज़ अलर्ट
जैसा हमने आपको ऊपर भी बताया कि जैसे फेसबुक को कोई पोस्ट या तस्वीर गलत मिलती है तो उस पर एक अलर्ट का मार्क मिलेगा। इस मार्क पर रियल ख़बर का लिंक होगा, आप जैसे ही अलर्ट पर क्लिक करेंगे तो आप सीधे सही फैक्ट्स वाली ख़बर पर पहुंच जाएंगे। इसके अलावा यूज़र्स को भी ये सुविधा मिल रही है कि किसी भी फेक न्यूज़ को पहचान कर उसकी रिपोर्ट कर सकें।
आप किसी भी न्यूज़ को फैक्ट्स के तौर पर रेंटिग दे सकते हैं। जैसे-जैसे पोस्ट की रेटिंग डाउन होगी वैसे ही वो कम संख्या में लोगों तक पहुंचेगी। अगर किसी अकाउंट या पेज के पोस्ट्स की रेटिंग इस तरह बार-बार डाउन होगी तो उसके खिलाफ कार्रवाई हो सकती है या उस अकाउंट को ब्लॉक कर दिया जाएगा। इस ख़बर की पुष्टि फेसबुक ब्लॉग में हुए इस न्यूज़ अपडेट से होती है।
अगर कोई फैक्टचेकर किसी खबर को फेक के तौर पर रेट करता है, तो वो न्यूज फीड में नीचे दिखाई देगा. इससे उसे देखने वाले लोगों की संख्या बहुत कम हो जाएगी। फेसबुक पर अब से बार-बार गलत जानकरी, फेक न्यूज या गलत फैक्ट पोस्ट करने पर उस अकाउंट के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है या अकाउंट को ब्लॉक भी किया जा सकता है।
इस चीज को एक उदारहण के तौर पर समझने के लिए आप इस फेसबुक पोस्ट पर जाकर देख सकते हैं और नीचे दी हुई फेसबुक पोस्ट की कुछ तस्वीरों को देखकर समझ सकते हैं। हालांकि आपको बता दें कि फेसबुक के ये नया अपडेट फैक्ट चेक फीचर फिलहाल लर्निंग फेज़ में है और इसमें कुछ बग भी हैं।



NCRB की रिपोर्ट के अनुसार
बता दें कि ये जानकारी एक फ्रीलांस सिक्योरिटी रिसर्चर राजशेखर राजहरिया के हवाले से मिली है। आजतक की एक रिपोर्ट्स के मुताबिक राजशेखर ने कहा कि सोशल मीडिया पर फैलती अफवाहों के कारण कई घटनाएं हुई हैं। जिसके चलते सोशल साइट्स पर भी कई बार दबाव बनाया गया था।
NCRB की रिपोर्ट बताती है कि सिर्फ साल 2017 में 170 ऐसे मामले दर्ज किए गए थे जिनमें लोग फेक न्यूज़ का शिकार हुए थे। इन सारी घटनाओं के मद्देनज़र फेसबुक ये नया फीचर शुरू कर रही है। रिसर्चर ने जानकारी दी कि इस फीचर की घोषणा इस साल के शुरुआती महीनों में और चालू चुनावों के समय की गई थी लेकिन उस वक्त सिर्फ पोस्ट शेयर करने वाले को ही फेक न्यूज़ का अलर्ट मिलता था। वहीं, अब ये अलर्ट बाकी यूज़र्स को भी मिलेगा।
फेसबुक ने इस फीचर को चालू करते समय और उसके बाद इसे कामयाब बनाने के लिए भारत में कुछ साझेदारियां भी की है। भारत में गलत खबरों और गलत फैक्ट्स को आईडेंटिफाई कर उनको रिमूव करने का काम भी शुरू किया है। फेसबुक ऐसा करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मशीन लर्निंग का इस्तेमाल कर रही है।
बड़े स्तर पर गलत ख़बरों को पहचानना इज़ी टास्क नहीं है इसीलिए एआई फेक पोस्ट और तस्वीरों को आईडेंटिफाई करती है। फेसबुक थर्ड पार्टी यानि मीडिया का भी सहारा ले रही है। लोगों तक रियल न्यूज़ पहुंचाने के लिए ऑथेन्टिकेटिड वेबसाइट्स के लिंक्स का इस्तेमाल किया जा रहा है ताकि सही फैक्ट्स की जांच की जा सके। ये सब रोबोट्स के जरिए किया जा रहा है।


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